इस बिल से सभी वर्ग के लोगों को समानता का अधिकार मिलेगा : अरुण जेटली 


GAURAV SHUKLA 08/01/2019 18:37 PM
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Lucknow. लोकसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ा दांव खेलते हुए कमजोर सवर्णों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। जिसके बाद मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया गया। शाम 5 बजे शुरु हुई इस बहस को लेकर पूर्व में ही बीजेपी की ओर से अपने सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने को लेकर व्हिप जारी किया गया था। बता दें कि गरीब सवर्णों को मिलने वाला यह 10 फीसदी आरक्षण 50 फीसदी की सीमा से अलग होगा। कैबिनेट ने सोमवरा को इस संशोधन को मंजूरी दी थी।

loksabha me hui arakshan bill par charcha  
सवर्णों को साधने के लिए बड़ा दांव 
विपक्षी दलों का कहना है कि बीजेपी ने नाराज सवर्णों को साधने के लिए ही यह बड़ा दांव चला है। जिसके बाद शीत सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही को भी एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया। अब राज्यसभा का कामकाज 9 जनवरी तक होगा। बिल के लोकसभा में पेश होने के बाद टीएमसी के सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि कोटा बिल की तरह महिला आरक्षण बिल को ये सरकार प्राथमिकता के साथ क्यों नहीं ला रही है। यह बिल नौकरियों से संबंधित नहीं है इस बिल के जरिए युवाओं को छलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान अरुण जेटली ने कांग्रेस का 2014 का घोषणापत्र पढ़ते हुए कहा कि कांग्रेस ने उस समय ही अगड़ी जाति के गरीब समाज को आरक्षण देने का वादा किया था। इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि इस बिल के साथ ही सभी वर्गों को समानता का अधिकार मिलेगा। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि बिल को विधानसभाओं से पास करवाने की आवश्यकता नहीं है अनुच्छेद 368 के पार्ट तीन में इसकी व्यवस्था की गयी है। 


बिल को लेकर कांग्रेस सांसद के वी थामस ने कहा कि इस बिल से पार्टी को ऐतराज नहीं है। लेकिन इसे राजनीतिक मकसद के साथ जल्द लाया गया। सवर्णों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए ये कदम उठाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि इस बिल ने ईसाई, मुस्लिम सभी को लाभ मिलेगा। निजी संस्थाओें में भी आरक्षण का प्रस्ताव है। 

 

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