जानें मकर संक्रांति का महत्म व महत्व


DEEP KRISHAN SHUKLA 09/01/2019 11:21:13
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Lucknow.  मकर संक्रांति का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में गमन ही मकर संक्रांति हैं। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति की अवधि ही सौरमास है। 12 सूर्य संक्रांतियों चार ही अधिक महत्वपूर्ण हैं। इन चार महत्वपूर्ण संक्रांतियों में मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति हैं। ​जिनमें सबसे ज्यादा महत्व मकर संक्रांति को दिया जाता है क्यों कि इसी दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते है।

jane makar sankranti ka mahatm v mahatv
मकर संक्रांति से ही सूर्य उत्तर दिशा में गमन करना शुरू करता है, यही इस संक्रांति की विशेषता है। मान्यता है कि हर साल मकर संक्रांति अलग-अलग वाहनों पर, विभिन्न प्रकार के वस्त्र पहन कर, शस्त्र, खाद्य एवं अन्य पदार्थों के साथ आती है। इस बार मकर संक्रांति सिंह पर सवार होकर आ रही हैं जिसका उपवाहन है गज यानी हाथी। सिंह और हाथी के संयोग से यह संक्रांति और वैभवशाली बना रही है। वास्तव में प्रति माह होने वाला सूर्य का निरयण यानी राशि परिवर्तन संक्रांति कहलाता है। सामान्यतया आमजन को सूर्य की मकर संक्रांति का पता है, क्योंकि इस दिन दान-पुण्य किया जाता है। इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इस संक्रांति को सजीव माना गया है। 

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  पुण्यफल चाहिए तो संक्रांति पर यह करें  
मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्नान, दान व पुण्य के मंगल समय का विशेष मह‍त्व है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुड़ व तिल लगा कर नदी में स्नान करना शुभदायी होता है। इसके पश्चात दान संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है तथा पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 

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  सेहत व शांति बढाती है उत्तरायण सूर्य की किरणें  
सूर्य के उत्तर की ओर गमन की प्रक्रिया 14 जनवरी से शुरू होती है। सूर्य के उत्तर में रहने का समय अच्छा माना जाता है इसीलिए कहा जाता है कि संक्रांति से अच्छे दिनों की शुरूआत प्रथ्वी पर होती है। मान्यता है पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते समय सूर्य की किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं।
  सूर्य के उत्तरायण काल प्रकाश में ब्रह्म को प्राप्त करता है जातक
भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्व बताते हुए गीता में कहा है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त हैं। 

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Web Title: makar sankranti 2019 ( Hindi News From Newstimes)


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