मोदी चुन-चुन कर निकाल रहे लोकसभा चुनाव 2019 की राह के कांटे


DEEP KRISHAN SHUKLA 10/01/2019 11:41:33
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NEW DELHI. तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद फायर ब्राण्ड नेता व पीएम नरेन्द्र मोदी को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं थी। विपक्ष के साथ आम लोगों ने भी यह कहना शुरू कर दिया था कि इस लोकसभा चुनाव में मोदी का वो जादू नहीं चलेगा जो पिछले लोकसभा चुनाव में दिखा था। इन सब बातों से बेखबर वक्त की नब्ज को पहचानने वाले नरेन्द्र मोदी ने तो लोकसभा चुनाव के लिए कुछ अलग ही तैयारी कर रखी थी। इन तैयारियों के बंद पत्ते एक-एक कर खुलने शुरू हो गए हैं। हां, यह बात अलग है कि विकास की राजनीति करने वाले मोदी ने इस बार भावनात्मक रूप से मतदाताओं के दिल में जगह बनाने की शुरूआत की है। न्यूज टाइम्स ने इस संबंध में हाल ही में एक खबर भी प्रकाशित की थी, जिसमें इस बात का जिक्र किया था कि मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए भावनात्मक मुद्दे की दरकार है। तो आइए आपको विस्तार से बताते है कि वो भावनात्मक मुद्दे क्या हैं और मोदी के लोकसभा चुनाव 2019 में कितने गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। पेश है एक रिपोर्ट...

modi chun chun kar nikal rahe loksabha 2019 ki raah ke kaante

 मुद्दा नंबर एक "सवर्ण"

माना जा रहा था कि जातीय आधार पर देश का सबसे बड़ा वोट बैंक वाला यह तबका खास तौर से मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार का सबसे प्रमुख कारण रहा, जिसके पीछे कुछ समय पहले सरकार द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए गए संशोधन को माना जा रहा था। इस बड़े तबके के लिए चुनाव की घण्टी बजने से ठीक पहले 10 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक पास करा कर नरेन्द्र मोदी ने एक बड़ा काम किया है। यह चुनाव में कितना प्रभावी होगा, यह तो आने वाला समय ही तय करेगा, लेकिन जो कयास लगाए जा रहे हैं। उसके अनुसार, इस जाति वर्ग का एक बड़ा हिस्सा इससे संतुष्ट जरूर होगा।

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मुद्दा नंबर दो "हिन्दुत्व"

भाजपा और हिन्दुत्व को एक ही सिक्के के दो पहलू के रूप में देखा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकास वाली राजनीति के चलते पार्टी की हिन्दुत्व वाली छवि प्रभावित हुई थी, जिसकी भरपाई करने के लिए भी नरेन्द्र मोदी ने पहले से ही रणनीति बना रखी थी। उसी का उदाहरण है दो दिन पूर्व पारित हुआ नागरिकता संशोधन विधेयक, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश के उन मुस्लिमों को वापस जाना होगा, जिनके पास यहां की नागरिकता नहीं है। खास तौर से उन रोहिंग्या मुस्लिमों को, जिन्हें वापस भेजने के लिए देश भर में बीते वर्ष प्रदर्शन हुए थे। इसके साथ ही विधेयक से उन हिन्दुओं को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जो अभी तक इससे वंचित थे। ऐसे में मोदी का यह कदम उनकी हिन्दूवादी छवि को और उभारने का काम करेगा।

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मुद्दा नंबर तीन "राम मंदिर"

अभी तक भाजपा पर यह ठप्पा लगा था कि राम मंदिर के नाम पर सिर्फ राजनीति ही करती है। कुछ हद तक यह बात सही भी थी। इस मंदिर मुद्दे को लेकर भाजपा के तमाम सहयोगियों में भी खासा नाराजगी व्याप्त थी। बात तो यहां तक पहुंच गयी कि तमाम अपने ही इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ खड़े होने से कतराने लगे। स्वयं नरेन्द्र मोदी ने भी एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है। जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता है तब तक सरकार अध्यादेश नहीं लाएगी। 

बता दें कि बीते दिन भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मामले में संवैधानिक पीठ से सुनवाई का ऐलान कर सबको चौंका दिया। सुप्रीम कोर्ट में अपनी तरह का यह पहला मामला होगा, जिसमें मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश पर संवैधानिक पीठ का गठन हुआ हो, वह भी तब जबकि इसी मामले में तीन जजों की बेंच के उस आदेश को भी रद्द कर दिया गया, जिसमें संवैधानिक पीठ की मांग को खारिज किया जा चुका हो। 

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मुद्दा नंबर चार "किसान"

माना जा रहा था कि देश के किसानों को अपेक्षाकृत सहूलियतें अभी तक नहीं मिल पाई हैं, जिससे उनकी आय बढ सके। किसानों से जुड़े कर्जमाफी जैसे तमाम मुद्दों पर विपक्ष केन्द्र की एनडीए सरकार को घेर रखा था। तीन राज्यों में भाजपा की हार के पीछे भी किसानों को ही बड़ी वजह माना जा रहा था, क्योंकि कर्जमाफी के अपने चुनावी वादे को भाजपा इन राज्यों में पूरा नहीं कर पाई थी। इस समस्या का भी हल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों को प्रति एकड़ 4 हजार रूपए की आर्थिक मदद देने के रूप में करके कर लिया है।

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अन्य योजनाएं व भाजपा शासित राज्यों की सरकारें करेंगी बाकी काम

इन सब मुद्दों के अलावा भाजपा के पास प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, उज्जवला, सौभाग्य व आयुष्मान जैसी तमाम योजनाएं गिनाने के लिए पर्याप्त हैं। यहीं नहीं, भाजपा शासित राज्यों में भी वहां की सरकारों ने सबसे ज्वलंत मुद्दों पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है। सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार भी इस प्रयास में जुटी नजर आ रही है। यहां चुनावी एजेंडे में शामिल गौवंश संरक्षण पर बहुत ही तेजी के साथ काम शुरू हो गया है। हर जिले में एक पशु आश्रय स्थल के साथ ही तहसील क्षेत्रों में भी पशु आश्रय स्थल बनाए जाने का काम शुरू हो गया है। 

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आवारा मवेशियों की समस्या पर अंकुश लग जाता है तो इसके दो तरफा फायदे भाजपा को मिलेंगे। एक तो चुनावी वादा पूरा होगा दूसरे आवारा मवेशियों से परेशान किसान लाभांवित होंगे। साथ ही प्रयागराज में कुंभ मेले से ही भी भाजपा लोकसभा चुनाव में अपने पक्ष में माहौल बनाने का काम करेगी। कुल मिला कर यह कहें कि नरेन्द्र मोदी बड़े ही शातिराना अंदाज में लोकसभा चुनाव 2019 की राह के कांटों को एक एक कर निकालते जा रहे हैं तो यह कोई अतिशयोक्ति न होगी और मोदी की यह रणनीति आगामी आम चुनाव में भाजपा के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

यह भी पढ़े...सवर्ण आरक्षण : आखिर किसे मिलेगा फायदा और कितना

Web Title: modi chun chun kar nikal rahe loksabha 2019 ki raah ke kaante ( Hindi News From Newstimes)


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