जानिए क्यों और कहां-कहां मनाया जाता है कुंभ मेला


RAGHVENDRA CHAURASIA 10/01/2019 17:44:22
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Prayagraj. कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। कुंभ मेला में देश -विदेश से श्रद्वालु आते हैं। कुंभ मेला आखिर क्यो मनाया जाता हैं और कितने-कितने सालों पर मनाया जाता है? कुंभ का पर्व हर 12 वर्ष के अंतराल पर मनाया जाता है। देश में चारों जगहों पर कुंभ का त्योहार मनाया जाता है। कुंभ का त्योहार नदी के पावन तट पर मनाया जाता है। ​देश में हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं।

Janiye Kyu Aur Kahan Kahan Manaya Jata Hain Kumbh Mela

  कुंभ की मान्यता समुद्र मंथन से जुड़़ी हुई

ज्योतिष के मुताबिक, जब बृहस्पति कुम्भ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तब कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है। प्रयाग का कुम्भ मेला सभी मेलों में सर्वाधिक महत्व रखता है। कुंभ का अर्थ है- कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिह्न है। कुंभ मेले की पौराणिक मान्यता अमृत मंथन से जुड़ी हुई है।

  समुद मंथन में अमृत निकला था

देवताओं एवं राक्षसों ने समुद्र के मंथन तथा उसके द्वारा प्रकट होने वाले सभी रत्नों को आपस में बांटने का निर्णय किया। समुद्र के मंथन द्वारा जो सबसे मूल्यवान रत्न निकला वह था अमृत, उसे पाने के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच संघर्ष हुआ। असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वह पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। असुरों ने जब गरुड़ से वह पात्र छीनने का प्रयास किया तो उस पात्र में से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिरीं। तभी से प्रत्येक 12 वर्षों के अंतराल पर इन स्थानों पर कुम्भ मेला आयोजित किया जाता है।

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  12 स्थलों पर अमृत छलका था
इन देव दैत्यों का युद्ध सुधा कुंभ को लेकर 12 दिन तक 12 स्थानों में चला और उन 12 स्थलों में सुधा कुंभ से अमृत छलका जिनमें से चार स्थल मृत्युलोक में है, शेष आठ इस मृत्युलोक में न होकर अन्य लोकों में (स्वर्ग आदि में) माने जाते हैं। 12 वर्ष के मान का देवताओं का बारह दिन होता है। इसीलिए 12वें वर्ष ही सामान्यतया प्रत्येक स्थान में कुंभ पर्व की स्थिति बनती है।

 

 

 

Web Title: Janiye Kyu Aur Kahan Kahan Manaya Jata Hain Kumbh Mela ( Hindi News From Newstimes)


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