मुख्य समाचार
जानिए जातिवाद पर हरियाणा हाईकोर्ट ने क्या टिप्पणी की स्वरा भास्कर के निशाने पर आईं प्रज्ञा ठाकुर, हेमंत पर दिया था बयान वेडिंग एनिवर्सरी पर अभिषेक ने शेयर की ऐश की फोटो, लिखा हनी मून, फैंस बोले इतना गुरूर... कॉफी विद करण मामला : पांड्या और राहुल पर लगा 20-20 लाख रुपये का जुर्माना बाइक पोल से टकराई, युवक की मौत अधिकारियों को नहीं दिखाई पड़ रहा आचार संहिता का उल्लंघन मथुरा में आइसक्रीम फैक्ट्री में अमोनिया गैस का रिसाव,15 की ​बिगड़ी तबियत मोदी ने इस नेता को बताया स्पीड ब्रेकर शूट के दौरान विक्की कौशल को आई गंभीर चोटें अपने सबसे बड़े चुनावी वादे को लेकर बुरी फंसी कांग्रेस सुरवीन चावला के घर आई नन्ही परी, देखें तस्वीर खोदा पहाड़ निकली चुहिया साबित होगा नकली भतीजा-बुआ का गठबंधन : केशव मौर्य एलएचबी कोच बने सुरक्षा कवच, बची भीषण तबाही स्पाइसजेट बना जेट के कर्मचारियों का सहारा, 100 पायलटों सहित 500 लोगों को दी नौकरी जल्‍द फाइटर जेट के कॉकपिट में नजर आएंगे विंग कमांडर अभिनंदन पूर्वा एक्सप्रेस हादसे के चलते बाधित हुआ हावड़ा रूट पर ट्रेनों का संचालन कोहली की पारी ने दिखाया कमाल, 10 रन से जीती RCB नोट्रे डेम को पहले जैसा बनाना चाहते हैं मैक्रों, येलो वेस्ट प्रदर्शन से बिगड़ी छवि को सुधारने की कवायद सीएम योगी बोले- बाबा साहेब ने न किया होता यह काम, तो आज भी किसी जमींदार के यहां भैंस चरा रहे होते अखिलेश 
 

जानिए क्यों और कहां-कहां मनाया जाता है कुंभ मेला


RAGHVENDRA CHAURASIA 10/01/2019 17:44:22
106 Views

Prayagraj. कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। कुंभ मेला में देश -विदेश से श्रद्वालु आते हैं। कुंभ मेला आखिर क्यो मनाया जाता हैं और कितने-कितने सालों पर मनाया जाता है? कुंभ का पर्व हर 12 वर्ष के अंतराल पर मनाया जाता है। देश में चारों जगहों पर कुंभ का त्योहार मनाया जाता है। कुंभ का त्योहार नदी के पावन तट पर मनाया जाता है। ​देश में हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं।

Janiye Kyu Aur Kahan Kahan Manaya Jata Hain Kumbh Mela

  कुंभ की मान्यता समुद्र मंथन से जुड़़ी हुई

ज्योतिष के मुताबिक, जब बृहस्पति कुम्भ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तब कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है। प्रयाग का कुम्भ मेला सभी मेलों में सर्वाधिक महत्व रखता है। कुंभ का अर्थ है- कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिह्न है। कुंभ मेले की पौराणिक मान्यता अमृत मंथन से जुड़ी हुई है।

  समुद मंथन में अमृत निकला था

देवताओं एवं राक्षसों ने समुद्र के मंथन तथा उसके द्वारा प्रकट होने वाले सभी रत्नों को आपस में बांटने का निर्णय किया। समुद्र के मंथन द्वारा जो सबसे मूल्यवान रत्न निकला वह था अमृत, उसे पाने के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच संघर्ष हुआ। असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वह पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। असुरों ने जब गरुड़ से वह पात्र छीनने का प्रयास किया तो उस पात्र में से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिरीं। तभी से प्रत्येक 12 वर्षों के अंतराल पर इन स्थानों पर कुम्भ मेला आयोजित किया जाता है।

Janiye Kyu Aur Kahan Kahan Manaya Jata Hain Kumbh Mela

  12 स्थलों पर अमृत छलका था
इन देव दैत्यों का युद्ध सुधा कुंभ को लेकर 12 दिन तक 12 स्थानों में चला और उन 12 स्थलों में सुधा कुंभ से अमृत छलका जिनमें से चार स्थल मृत्युलोक में है, शेष आठ इस मृत्युलोक में न होकर अन्य लोकों में (स्वर्ग आदि में) माने जाते हैं। 12 वर्ष के मान का देवताओं का बारह दिन होता है। इसीलिए 12वें वर्ष ही सामान्यतया प्रत्येक स्थान में कुंभ पर्व की स्थिति बनती है।

 

 

 

Web Title: Janiye Kyu Aur Kahan Kahan Manaya Jata Hain Kumbh Mela ( Hindi News From Newstimes)


अब पाइए अपने शहर लखनऊ की खबरे (Lucknow News in Hindi) सबसे पहले Newstimes वेबसाइट पर और रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें न्यूजटाइम्स की हिंदी न्यूज़ ऐप एंड्राइड (Hindi News App)


कमेंट करें

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपकी प्रतिक्रिया