किशोर और किशोरियों को लेकर आया चौंकाने वाला सर्वे, पढ़ें पूरी रिपोर्ट


TARUN JAISWAL 11/01/2019 01:39:42
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Lucknow. किशोर-किशोरियों के साथ जमीनी स्तर पर काम करने के नतीजे अब सामने आने लगे हैं, 2018 में हुए स्वंयसेवी संस्था ब्रेकथ्रू के सर्वे के मुताबिक, 84 फीसदी किशोरियां अब उच्च शिक्षा को लेकर बात करने लगी हैं, जबकि 2015 में यह आंकड़ा 61 प्रतिशत था। साथ ही विवाह की उम्र को लेकर भी उत्साहजनक परिणाम सामने आएं हैं, सर्वे के मुताबिक 56 फीसदी किशोरियां अब परिवार में शादी की उम्र को लेकर आवाज उठाने लगी हैं, जबकि 2015 में यह दर सिर्फ 8 फीसदी थी। ब्रेकथ्रू की सीईओ सोहिनी भट्टाचार्या ने कहा कि ये प्रयास हमें बेहतर दिशा में ले जा रहे हैं, लेकिन इस सफर को जारी रखने की जरूरत है, जिसमें समुदाय, मीडिया, स्वंयसेवी संस्था, सरकार सहित सभी हितधारकों का सहयोग अपेक्षित है। यह सर्वे ब्रेकथ्रू के लिए एनआरएमसी ने किया था। 

Swaymsevi sanstha break through ne kiya uttar pradesh ke saat jilo me survey

ब्रेकथ्रू की सीईओ सोहिनी भट्टाचार्या ने कहा कि 2015 से ब्रेकथ्रू उत्तर प्रदेश के सात जिलों (लखनऊ, गोरखपुर, सिद्दार्थनगर, महाराजगंज, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर ) के कुल 21 ब्लॉक, 514 ग्राम पंचायत और 715 स्कूलों में कार्यक्रम ‘दे ताली’- बनेगी बात साथ-साथ के माध्यम से किशोर-किशोरी सशक्तीकरण मुद्दे पर काम कर रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों का सर्वांगीण विकास है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, जेंडर, कम उम्र में शादी, लैंगिक भेदभाव, समान अवसर जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम लगभग चार लाख किशोर-किशोरियों तक पहुंच कर उनके जीवन में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 2015 में जब हमने काम करना शुरू किया था, तब से लेकर किशोर-किशोरियों की शिक्षा, शादी, आकांक्षाएं को लेकर काफी बदलाव जाहिर होने लगे हैं। हम देख रहे हैं कि शिक्षा देरी से शादी के मामले में एक साधन के रूप में काम करती है। कक्षा 12 तक शिक्षा किशोरियों के लिए पर्याप्त समझी जाती है, लेकिन जिन लड़कियों का स्कूल छूट जाता हैं वो खुद भी शादी के लिए तैयार रहती हैं। 35 फीसदी किशोर-किशोरियां जीवनसाथी को लेकर अपनी पसंद और नापसंद को लेकर बात करने लगी है। जबकि पहले इस मुद्दे को लेकर कोई चर्चा नहीं होती थी। व्यक्तिगत स्तर पर जहां सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वहीं कम उम्र में शादी को लेकर सामाजिक सोच में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। अगर किशोर किशोरियों की आंकाक्षाओं के बारे में बात करें 2015 की अपेक्षा इसमें 42 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है और इनमें से 35 फीसदी ने अपने परिजनों से एक से अधिक बार आंकाक्षाओं (आशाओं) की बात को मजबूती से रखा है। उनकी पढ़ाई को अब उनके रोजगार से जोड़ कर भी देखा जाने लगा है, जो कि एक सकारात्मक बदलाव है। 

उन्होंने कहा कि 95 फीसदी लड़कियां कितनी कक्षा तक पढ़ना है, इस पर बात करने लगी हैं। इनमें से 38 फीसदी लड़किय़ां नियमित बात करती हैं, जबकि बेसलाइन सर्वे में सिर्फ 50 फीसदी लड़कियां इस पर बात करती थीं। किशोर-किशोरियों ने कैरियर को लेकर कई सारे विकल्पों पर चर्चा करनी भी शुरू कर दी है, लेकिन उसको प्राप्त कैसे करेंगे, इसे लेकर अभी उनमें स्पष्टता नहीं है। किशोर-किशोरियों के बीच बातचीत को लेकर रूढ़िवादी सोच में कमी आई है, पहले 50 फीसदी किशोर-किशोरियां मानते थे कि ये गलत है और अब 13 फीसदी ही ऐसा सोचते हैं। लेकिन ये बदलाव माताओं और समुदाय के सदस्यों के बीच खुले तौर अभी स्वीकारा नहीं गया है।

उनका मानना है कि अगर कोई जरूरी काम हो तभी लड़के-लड़कियों को आपस में बातचीत करनी चाहिए। वहीं, घर के काम से अलग खुद के समय के मामले में भी बदलाव देखने को मिला है। इसे लेकर किशोरियां अपना पक्ष रखने लगी हैं। 30 फीसदी लड़कियां ही पहले इस मुद्दे (खुद के समय) को लेकर अपने माता-पिता से बात करती थी, जो बढ़कर 75 फीसदी हो गया है। अकेले बाहर जाने को लेकर किशोरियां अपने परिवार में अब पहले से ज्यादा (90 फीसदी) बात करने लगी हैं, जो कि पहले 59 फीसदी था। जबकि परिवार में अभी भी आवागमन के मुद्दे पर किशोरियों को सुरक्षा के नाम पर गांव से बाहर जाने से रोका जाता है। वहीं समुदाय के स्तर नागरिक समाज लड़कियों के पढ़ाई के लिए बाहर जाने की स्वीकार करने तो लगा है, लेकिन अभी भी सुरक्षा की दृष्टि से किशोरियों के आवागमन रोक लगाते हैं। 

समुदाय का मानना है कि किशोरियां आस-पास के इलाके में स्थित स्कूलों में पढ़ाई के लिए समूह में जा सकती हैं। किशोर-किशोरियां अब 12वीं तक की पढ़ाई करने लगी हैं, लेकिन 15—16 साल की किशोरियों में स्कूल छूटने के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं, जो गांव शहरी इलाकों के करीब हैं। वहां पर किशोर-किशोरी उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज भी जा रहे हैं। जहां पर उच्च शिक्षा के मौके कम हैं, वहां किशोर व्यवसायिक शिक्षा जैसे आईटीआई में पढ़ने जा रहे हैं। इस अवसर किशोर-किशोरी सशक्तिकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत ‘बड़ी सी आशा’ का आयोजन किया गया, जिसमें सभी प्रमुख हितधारक शामिल हुए।

Web Title: Swaymsevi sanstha break through ne kiya uttar pradesh ke saat jilo me survey ( Hindi News From Newstimes)


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