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63वां जन्मदिन मना रही बसपा सुप्रीमो, कार्यकर्ताओं से मांगा यह तोहफा


GAURAV SHUKLA 15/01/2019 11:30:43
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Lucknow. बसपा सुप्रीमो मायावती मंगलवार(15 जनवरी) को अपना 63वां जन्मदिन मना रही हैं। इस बार उनके जन्मदिन के मौके पर बसपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ ही सपा कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। सपा बसपा के गठबंधन के बाद सभी विपक्षी दलों की निगाहें जन्मदिन के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई हैं। बसपा सुप्रीमो ने इस दौरान कहा कि पार्टी उनका जन्मदिन जलकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाती है इसलिए वह सभी का आभार और धन्यवाद ज्ञापित करती हैं। सभी कार्यकर्ता मेरे(मायावती) के जन्मदिन पर हैसियत के अनुसार चंदा देते हैं उन कार्यकर्ताओं का आभार। इसी के साथ उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि इस बार सपा-बसपा एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं जिसके चलते कार्यकर्ता उन्हें जीत का तोहफा दें। 

bsp chief celebrating her 63 birthday


बसपा सुप्रीमो ने भाजपा और कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा कि गठबंधन के बाद सभी के होश उड़े हुए हैं। देश में सबसे ज्यादा राज कांग्रेस पार्टी ने किया है। बावजूद इसके हमें 1984 में अपनी पार्टी बनानी पड़ी। हमारे बाद भी कई पार्टियों का गठन हुआ लेकिन वह कांग्रेस से अलग नहीं है। इस चुनाव में हम कांग्रेस एंड कंपनी को सबक सिखायेंगे। उन्होंने आगे कहा कि बसपा के अनुयायी गरीब, लाचार बीमार लोगों की मदद करते हैं, हमारी पार्टी ईमानदारी से संघर्ष रत रहती है। जो भी मेरा जन्मदिन मना रहे हैं उनका आभार प्रकट करती हूँ, इस बार मेरा जन्मदिन ऐसे मौके पर हो रहा है जब लोकसभा का चुनाव होने जा रहा है और हमारी पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे भाजपा और अन्य पार्टियों की नींद उड़ी है, यही प्रदेश तय करता है कौन प्रधानमंत्री बनेगा और किसकी सरकार बनेगी। बसपा सपा के लोगो से अपील करती हूँ पुराने सभी गिले शिकवे भुलाकर निजी हितों को भूलकर विरोधियों के साम दाम से बचकर एकजुट हो,यही मेरे जन्मदिन का तोहफा होगा।

मध्यप्रदेश राजस्थान छत्तीसगड़ में नतीजों ने भाजपा को सबक सिखाया लेकिन इससे कांग्रेस एंड कंपनी को भी सबक सीखने की जरूरत है। कांग्रेस की सरकारों पर अभी से उंगली उठानी शुरू कर दी है। कांग्रेस सरकार में कर्जमाफी की सीमा केवल 9 महीने पहले की क्यों तय की गई ? जिन शर्तों के आधार पर केवल 2 लाख का कर्ज माफ करने की बात कही इससे कोई खास लाभ किसानों को नही मिलने वाला है। किसानों की कर्जमाफी के लिए केंद्र राज्य सरकारों को कोई ठोस नीति बनानी चाहिए,
एक बार पूरी कर्ज राशि माफ करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है, आगे कर्ज न लेना पड़ा इसके लिए सभी समस्याओं को दूर करना चाहिए और स्थायी नीति बनानी चाहिए, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को पूरी तौर पर मानकर अमल करती है तो समाधान निकल सकता है। दलित आदिवासी पिछड़ा अल्पसंख्यक जो भूमिहीन हैं, जो छोटे मोटे काम के लिए कर्ज लेते हैं, इनके कर्ज माफी के लिए कोई ठोस कदम नही उठाये गए, GST नोटबन्दी से इनकी स्थिति और दयनीय हो गई है, इन सरकारों में इनके हित न सुरक्षित रहे हैं न आगे रहेंगे।

मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी धन्नासेठों की ग़ुलामी नही करती। रक्षा सौदों में केंद्र सरकार विपक्षी पार्टियों को भी विश्वास में लेकर एक दीर्घकालीन नीति तैयार करे। BJP आरएसएस ने धर्म के नाम पर न केवल राजनीति करने का काम किया बल्कि देवी देवताओं को भी जाति में बाटने का घिनौना काम किया। ये दुखद स्थिति है। मुसलमानों की जुमा की नमाज रोकना शुरू कर दिया है।  सीबीआई और संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग कर रहे है। इसका ताजा उदाहरण सपा अध्यक्ष का सीबीआई में नाम लाना है। भाजपा के लाख न चाहने के बाद भी इनकी वादाखिलाफी मुद्दा बन गई को खामोशी से अपना काम करती जा रही है। 15 से 20 लाख देकर अच्छे दिन लाने का सपना दिखाया था जो विश्वासघाती साबित हुआ है। 
लोकसभा के चुनाव करीब आते ही पिछले चुनाव की तरह अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए नाटकबाजी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री देश भर में रैली कर तरह तरह की घोषणाएं कर रही हैं। जो सरकार में आने के बाद ठंडे बस्ते में डाल देगे। 10% सवर्ण आरक्षण का हमारी पार्टी समर्थन करती है लेकिन धार्मिक अल्पसंख्याको को खास लाभ नही मिलने वाला जब तक इनकी द्वेषपूर्ण सोच बनी रहती है। हमारी पार्टी अल्पसंख्यकों को अलग आरक्षण देने की मांग करती है इस पर कायम है। कार्यकर्ता अपने खुद के नेतृत्व में सरकार बनाएं ऐसा होता है तो यही जन्मदिन का गिफ्ट होगा। 

Web Title: bsp chief celebrating her 63 birthday ( Hindi News From Newstimes)


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