गोवंश संरक्षण को लेकर अधिकारियों का छूट रहा पसीना


LEKHRAM MAURYA 14/01/2019 18:35:40
242 Views

Lucknow. गोवंश के संरक्षण को लेकर शासन एवं प्रशासन को पसीना आ रहा है, क्योंकि आधी अधूरी जानकारियों और तैयारियों को लेकर जिस तरह आनन-फानन में दो जनवरी को शासनादेश जारी कर कहा गया कि इसका अनुपालन भी 10 जनवरी तक हो जाना चाहिए। वहीं, जब शासनादेश के अनुपालन करने के लिए गांव और शहर में अधिकारियों ने काम करना शुरू किया तो पता चला कि इसमें महीनों लगेंगे। इसके साथ ही प्रदेश में गोसेवा आयोग के अध्यक्ष का पद कई माह से रिक्त होने के कारण वहां की गतिविधियां ठप हैं। गोशालाओं से सम्बन्धित किसी भी जानकारी के लिए शासन के अधिकारी और इससे जुड़े मंत्रियों को गोसेवा आयोग की जगह पशुपालन विभाग से जानकारियां मांगी जा रही हैं, क्योंकि जैसे-जैसे प्रदेश से गोवंश को लेकर किसानों द्वारा सरकारी संस्थानों में बंद करने की खबरें आ रही हैं। वैसे-वैसे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ने के साथ ही उनके हाथ पांव फूलते जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि गोवंश के संरक्षण को लेकर शासन स्तर पर किसी न किसी अधिकारी द्वारा रोजाना बैठक बुलाई जा रही है। 

Excessive sweating of officials regarding cow protection

  किसानों के लिए मुसीबत बने गोवंश

केन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद जहां बिना किसी योजना के गोवंश के कटने पर रोक लगा दी गई। वहीं, प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद यह आदेश और प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया। गोवंश की अपरोक्ष रूप से बिक्री भी बंद हो गयी, जिससे दूध न देने वाली गायों एवं उनके बछड़ों का भरण पोषण करने में असमर्थ किसानों ने उनको छोड़ना शुरू कर दिया,  क्योंकि किसानों को उन पर जितना खर्च करना पड़ता है, उससे लाभ की अपेक्षा हानि अधिक उठानी पड़ती है। सरकार ने ऐसे गोवंश के गोबर और मूत्र से क्या उपयोग किया जा सकता है अभी तक उसकी योजना तक नहीं बना पाई है। 

Excessive sweating of officials regarding cow protection

  अभी तक गोशालाओं की स्थिति नहीं पता लगा सकी सरकार

संयुक्त निदेशक गोशाला जीसी पाण्डेय ने बताया कि गोशालाओं के पंजीकरण के बाद उनके नवीनीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। 1960 से गोशालाओं का पंजीकरण शुरू होकर आज तक जारी है, अब तक प्रदेश मे 516 गोशालाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। नवीनीकरण की व्यवस्था न होने के कारण पशुपालन विभाग के पास उनकी वर्तमान में क्या स्थिति है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। दो सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन अभी तक सभी जिलों की गोशालाओं में कितनी क्षमता है और उनमे कितने गोवंश हैं तथा कितनी सक्रिय हैं और कितनी निष्क्रिय हैं? इसका पता नहीं हो पाया है। 

Excessive sweating of officials regarding cow protection

श्री पाण्डेय का कहना है कि पशुओं के संरक्षण का काम नगर निकायों का है। इसलिए हमारे पास अन्य चीजों की कोई जानकारी नहीं है। पशुचर की भूमि राजस्व और पंचायत विभाग को पता होती है कितनी खाली है, कितने अवैध कब्जे हैं। कांजी हाउस की देखरेख जिला पंचायतों के जिम्मे था। करीब तीन दशक से कांजी हाउस बंद पड़े हैं, क्योंकि पिछली सरकारों ने उनका उपयोग करना बंद कर दिया। जिससे गांवों मे विवाद और झगड़े बढ़ गए। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार के पास गोवंश को सही तरीके से संरक्षित करने के लिए कोई स्थायी योजना नहीं थी, जिससे इनका समाधान होने में अभी कई माह का समय लगेगा। तब तक किसान की इस बार की रबी की फसल भी गोवंश के हवाले हो जाएगी।

Excessive sweating of officials regarding cow protection

  प्रशासन के मौन धारण करने से ग्रामीणों में आक्रोश

गत शनिवार को विकास खण्ड माल के ग्राम गांगन बरौली में गांव वालों ने परेशान होकर आसपास के करीब 6 दर्जन गोवंश को पकड़कर श्मशान में बंद कर मलिहाबाद के उपजिलाधिकारी जय प्रकाश को फोन पर जानकारी दी, जिसके एक घंटे बाद कानूनगो मौके पर आए और पांच सौ रुपए देकर चारे की व्यवस्था करने को कहकर चले गए और कहा कि रविवार को इनको कहीं गोशाला में भिजवा दिया जाएगा, लेकिन शाम तक कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया। गांव के माल के एक नेता ने उनके चारे की व्यवस्था करने और अधिकारियों को उनकी व्यवस्था कराने के बजाय रात में फिर फसल चरने के लिए छोड़वा दिया, जिससे गांव वालों में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

Web Title: Excessive sweating of officials regarding cow protection ( Hindi News From Newstimes)


अब पाइए अपने शहर लखनऊ की खबरे (Lucknow News in Hindi) सबसे पहले Newstimes वेबसाइट पर और रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें न्यूजटाइम्स की हिंदी न्यूज़ ऐप एंड्राइड (Hindi News App)

कमेंट करें

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपकी प्रतिक्रिया