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सरकार के दावों को आइना दिखा रहे सरकारी स्कूल


LEKHRAM MAURYA 17/01/2019 14:29:53
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Lucknow. प्रदेश की योगी सरकार बच्चों को अच्छी शिक्षा देने और उनके पोषण को लेकर तमाम योजनाएं संचालित कर रही है। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट और कॉन्वेट जैसा बनाने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन जमींनी हकीकत कुछ और ही है। सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए न ही कोई बेंच और डेस्क की व्यवस्था है। यही नहीं, बिल्डिंग भी जर्जर हो चुकी है। ऐसे में आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि बच्चों की शिक्षा को लेकर सरकार कितनी सजग है।

The school

प्रदेश की राजधानी के विकास खंड माल के सरकारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौना में 87 छात्रों पर चार अध्यापक हैं, जिनमें तीन महिला और एक पुरूष अध्यापक है। एक चपरासी भी है, जो इस समय खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संबद्ध है। यहां की प्रधानाध्यापक सीमा सिंह ने बताया कि उनके विद्यालय की इमारत में छत का प्लास्टर गिर रहा है, क्योंकि इमारत के निर्माण के समय छत पर घोट नहीं कराया गया, जिसका नतीजा है कि छत समय से पहले ही गिरने लगी है। किसी छात्र को किसी प्रकार की चोट न लगे, इसलिए वह छात्रों को कमरों में कम ही बैठने देती हैं। उन्होंने बताया कि बरसात में अधिक खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि इस संबन्ध में ग्राम विकास अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी, उपजिलाधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखित में अवगत कराया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वह विद्यालय की रंगाई-पुताई के अलावा साफ सफाई पर पूरा ध्यान दे रही हैं। विद्यालय में वृक्षाारोपण कराने के साथ-साथ बच्चों को खेती करना भी सिखाया जाता है। उनके पास बैठने के लिए फर्नीचर कम था, जिसे वह जल्द ही खरीद लेंगी।  

The school

उज्ज्वला योजना को मुंह चिढ़ा रहे सरकारी विद्यालय

केंद्र की मोदी सरकार महिलाओं को धुंए से बचाने के लिए सभी को गैस उपलब्ध करा रही है, लेकिन सरकारी विद्यालयों में चूल्हे पर ही खाना बन रहा है। चूल्हे पर खाना बनाने वाला यह अकेला विद्यालय नहीं है, यहां अधिकांश विद्यालयों में चूल्हे पर ही खाना बन रहा है, क्योंकि लकड़ी से खाना बनाना सस्ता है। वहीं, रसोइया ने कहा कि एक हजार रुपए महीने कम हैं। सरकार को रसोइयों का मानदेय बढ़ाना चाहिए।

Web Title: The school's shabby building only hinders the school building ( Hindi News From Newstimes)


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