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नए तरीकों व मॉनिटरिंग से सुधार की डगर पर सरकारी शिक्षा


DEEP KRISHAN SHUKLA 17/01/2019 15:00:30
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Lucknow. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बीते दो चार वर्षों में काफी हद तक सुधार हुआ है। हालांकि शिक्षा का स्तर अभी भीअपेक्षाकृत दुरुस्त नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने वाली संस्था की असर व प्रथम की रिपोर्ट प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग के लिए राहत भरी है जो शिक्षा व्यवस्था में हुए सकारात्मक बदलावों की ओर इंगित करती है। 

naye tarikon v monitering se sudhar ki dagar par sarkari shiksh
पूर्व के वर्षों में अपने पड़ोसी राज्यों के मुकाबले पीछे रहने वाले उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय औसत शैक्षिक स्तर को पीछे छोड़ दिया है। यूपी में इन बदलावों ने शिक्षाविदों को सोचने पर मजबूर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक दो बड़े बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में देखने को मिले है, जिनमें पहला है सीखने का स्तर, 2014 में यूपी के 70.9 प्रतिशत कक्षा एक से आठ तक बच्चे ऐसे थे जो कक्षा दो के स्तर की पढ़ाई पढ़ लेते हैं। यह प्रतिशत 2018 में 73.7 प्रतिशत हो गया है। मध्य प्रदेश, बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश का स्तर देश के राष्ट्रीय औसत अध्ययन स्तर से भी ज्यादा है।

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दूसरा परिवर्तन प्राइवेट स्कूलों के एडमिशन का ग्राफ है। संगठन की रिपोर्ट में कहा गया कि 2006 से 2016 तक निजी स्कूलों में दाखिले का ग्राफ लगातार बढ़ता रहा जबकि 2016 से 2018 के बीच प्राइवेट स्कूलों में दाखिले का प्रतिशत 52.7 से घटकर 49.7 प्रतिशत रह गया है। इन परिवर्तन के पीछे शिक्षण अधिगम के तरीकों में हुए नए नए बदलावों को वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो यह क्रम बिना रूके जारी रहा तो बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग, एससीईआरटी और डायट के प्रयास से शिक्षण अधिगम के नए-नए तरीकों लाए गए हैं। जिसके लिए शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण के साथ मानिटरिंग सिस्टम में भी सुधार लाया गया है।

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  अच्छे शिक्षकों को दिया जा रहा है प्रोत्साहन
ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर अध्ययन करने वाली संस्था 'असर' के प्रदेश को-ऑर्डिनेटर सुनील कुमार का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए मोबाइल और अन्य तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया है। जो शिक्षक अच्छा पढ़ाते हैं, उनको प्रोत्साहित भी किया जाता है। उनका नाम बेसिक शिक्षा विभाग की वबेसाइट पर डाला जाता है। शिक्षक भी अपना विडियो बनाकर भी विभाग को भेजते हैं। इस पूरी प्रक्रिया की अधिकारी भी आनलाइन मानिटरिंग भी करते है।

 
  प्रयास जारी रखना जरूरी
6 से 14 साल तक के स्कूल जाने वाले बच्चों का प्रतिशत चार साल से स्थिर बना हुआ है। प्रदेश कोऑर्डिनेटर का कहना है कि स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। 26.2 प्रतिशत कक्षा 1 से 8 तक के ऐसे छात्र है जो हिन्दी के सामान्य वाक्य पढ़ नहीं पाते जो बेहद चिंता का विषय है। सीखने के स्तर की न्यूतम सीमा प्रदेश में तय करते हुए उसके लक्ष्य शिक्षकों को दिए गए है। जो भी सुधार हुए उनका आगे जारी रखना शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बेहद जरूरी है।
  नए शिक्षकों की नई सोंच का ही है असर
बाल मंच की संस्थापिका ऊषा विश्वकर्मा का कहना है कि बहुत साल बाद सुनन को मिल रहा है कि प्रदेश के शैक्षिक स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने मानिटरिंग सिस्टम को और बेहतर बनाए जाने की राय दी है। उनका कहना है कि बीते कुछ वर्षों में नए शिक्षकों की बड़ी संख्या में भर्ती हुई है। नए शिक्षकों की नई सोंच व उनके नए तौर तरीके भी इस बदलाव में बड़े सहयोगी है।

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