विदेशों को लुभा रही भारत में बनी सबसे सस्ती ट्रेन-18


DEEP KRISHAN SHUKLA 19/01/2019 09:45:54
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New DElhi. 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली पहली 'ट्रेन-18' के संचालन को लेकर भले ही अभी संशय बरकरार हो, लेकिन अपनी तमाम विशेषताओं के चलते यह ट्रेन अन्य देशों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। आलम यह है कि देश में बुलेट ट्रेन परियोजना का अमली जामा पहनाने में मददगार जापान समेत तमाम देशों ने रेलवे से इस ट्रेन को देखने की इच्छा जताई है। 

videshon ko lubha rahi bharat me bani sabse sasti train 18
रेलवे के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो देश में आजादी के बाद रेल कोचों के विकास के पांचवे चरण में विकसित की गयी 'ट्रेन-18' विश्व की सर्वाधिक सस्ती सेमी हाईस्पीड ट्रेन सेट है। महज 100 करोड़ की लागत में इस ट्रेन के 16 कोच का सेट तैयार हुआ है। प्रति कोच के हिसाब से आंकलन करें तो एक कोच की लागत 6 से 6.50 करोड़ रुपए है, इसकी अपेक्षा मेट्रो ट्रेन के कोच की लागत तकरीबन 10 करोड़ आती है। खास बात यह है कि अगर इन कोचों के निर्माण का आर्डर आगे भी मिलता है तो लागत में 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इतनी कम लागत पर ट्रेन सेट बनाना किसी भी देश में संभव नहीं है, इस लिहाज से इस क्षेत्र में भारत ही एक मात्र देश होगा। भविष्य के लिए यह शुभ संकेत है। 

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रेलवे अधिकारियों की मानें तो 'ट्रेन-18' की लोकप्रियता का आलम यह है कि विभिन्न देशों के राजनायिकों ने इस ट्रेन को देखने में दिलचस्पी जताई है। इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के अनेक देश शामिल हैं। दुनिया की सस्ती हाईस्पीड रेल परियोजना का दावा करने वाली चीन की रेल कंपिनिया इसे चुनौती के रूप में देख रही हैं। 

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  'ट्रेन-18' खोलेगी विश्व के बाजार में भारत का रास्ता

दुनिया में तकरीबन 200 अरब डालर का बाजार रेल कोचों, वैगनों आदि का है, जो लगातार विकसित हो रहा है। अभी तक भारत इस बाजार में शून्य था। 'ट्रेन-18' भारत के ​इस बाजार में प्रवेश करने का रास्ता खोलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक अवसर पर 'ट्रेन-18' एवं मेट्रो कोच के निर्माण की क्षमता को लेकर अगली दूतावासों/उच्चायोग के प्रमुखों की बैठक में एक प्रेजेंटेशन दिखाने को कहा है।

ट्रेन के संचालन की तारीख नहीं हो सकी तय

चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्टरी में 'मेक इन इंडिया' के तहत 'ट्रेन-18' को बनकर तैयार होने में मात्र 18 महीने का समय लगा। इस ट्रेन को नई दिल्ली से वाया कानपुर व प्रयागराज जंक्शन से वाराणसी के बीच चलाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन यह बहुप्रतीक्षित ट्रेन कब से चलेगी, इसकी ता​रीख तय होने का मामला अभी अधर में लटका है। फिलहाल बताया जा रहा है कि प्रयागराज के आगे रामबाग के मार्ग में विद्युतीकरण का चल रहा कार्य इसके संचालन में रूकावट बना है। यह कार्य जनवरी माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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