राजधानी से पांच सौ टन आम निर्यात में लग गए 15 साल!


LEKHRAM MAURYA 19/01/2019 18:06:35
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LUCKNOW. उत्तर प्रदेश मे आम का इतना उत्पादन होने के बाद भी आज तक निर्यात की स्थिति सन्तोषजनक नहीं है। पिछले सोलह साल से मलिहाबाद क्षेत्र से आम निर्यात के लिए मंडी परिषद और उद्यान विभाग प्रयासरत हैं, लेकिन अब तक किसी भी वर्ष सरकारी अथवा निजी क्षेत्र की संस्था सौ टन का आंकड़ा नहीं पार कर पाई है। इसे सरकार की विफलता कहें या राजधानी के किसानों का दुर्भाग्य।

राजधानी से पांच सौ टन आम निर्यात मे लग गये 15 साल

सरकार ने करीब डेढ़ दशक पूर्व मलिहाबाद के रहमानखेड़ा में आम एवं सब्जियों के निर्यात के लिए मैंगो पैक हाउस का निर्माण कराया था। निर्माण के बाद 2007 तक मंडी परिषद ने स्वयं आम के निर्यात का प्रयास किया, जिसमें बाहर के दूसरे प्रदेशों के आम निर्यातकों को आम़ंत्रित कर किसानों से आम खरीदकर निर्यात का प्रयास किया, परन्तु नतीजा यह हुआ कि 4 साल में कुल 41 टन आम का ही निर्यात हो पाया। मंडी परिषद ने परिणाम अच्छा न देखकर निजी क्षेत्र की संस्थाओं को पैक हाउस ठेके पर देना शुरू किया। इसके बावजूद राजधानी से आम के निर्यात का आंकड़ा अब तक किसी भी वर्ष सौ टन तक नहीं पहुंच पाया है।

राजधानी से पांच सौ टन आम निर्यात मे लग गये 15 साल

मैंगो पैक हाउस पर निजी संस्थाओं के साथ काम करने वाले मोहसिन खान ने बताया कि पहले इसका किराया 30 हजार रुपए महीने था और गत वर्ष से इसका किराया 92 हजार रुपए हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार से अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण दो संस्थाएं किराया लेकर चली गईं, जिनमे से एक का सामान पड़ा है, लेकिन दूसरे का कुछ भी पता नहीं है। खुशी इंटरनेशनल सरकार का 60 हजार रुपए लेकर तो भागी ही, यह कुर्सी के किसानों को भी चूना लगा चुकी है। श्री खान ने बताया कि अभी तक यहां का हॉट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहा था, जिससे कई बार तापमान के उतार चढ़ा के कारण आम सड़ चुका है। इस साल मेसर्स जैगविन ब्रैवियर ने प्लांट को ठीक कराया। उसके बाद उन्होंने 95 टन आम निर्यात किया और अब सब्जी का निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हॉट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कम है, जिससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इसकी अपेक्षा सहारनपुर से अधिक निर्यात हुआ है, क्योंकि वहां वेपर हीट ट्रीटमेंट लगा है। आम निर्यातकों ने कई बार मंडी परिषद की बैठक में इसकी मांग की थी।

राजधानी से पांच सौ टन आम निर्यात मे लग गये 15 साल 

मंडी परिषद के निदेशक रमाकान्त पाण्डेय ने बताया कि वीएचटी के लिए टेण्डर प्रक्रिया जारी है। दो लोगों ने अभी तक टेण्डर डाले भी हैं। उम्मीद है कि इस बार मलिहाबाद मे भी वीएचटी का प्लांट लग जाए। किसानों ने मंडी परिषद के माध्यम से पैक हाउस को आम देने में अपना घाटा देखा, क्योंकि यहां से आम की ग्रेडिंग कर उसमें से आधा माल वापस कर दिया जाता था, जिससे किसानों ने इसमें रूचि नहीं ली थी, जिसके फलस्वरूप अब आम निर्यात के लिए पैक हाउस को ही ठेके पर दे दिया जाता है। अब देखना है कि इस बार राजधानी से आम निर्यात को लेकर किए जा रहे प्रयास कितने सार्थक परिणाम लाते हैं? और उसका किसानों को कितना लाभ होता है?

Web Title: Five hundred tons from the capital have been exported to 15 years! ( Hindi News From Newstimes)


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