पशु आश्रय स्थल बन रहे जिन्दा श्मशान स्थल


LEKHRAM MAURYA 11/02/2019 16:54:59
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MALIHABAD. उत्तर पदेश सरकार ने जहां एक ओर आवारा पशुओं से किसानों को निजात दिलाने के लिए बिना किसी नीति के शासनादेश जारी कर कांजी हाउसों एवं गोशालाओं मे गोवंश बंद करने का आदेश जारी कर दिया था। उस आदेश का एक सप्ताह में अनुपालन करके सभी आवारा गोवंश को बंद कर देना था, लेकिन न कांजी हाउस थे, न गोशालों की वास्तविक स्थिति का पता था। ऐसे में सरकार का यह आदेश हथेली पर सरसों जमाने की कहावत जैसा ही था।

Living cremation grounds becoming a livestock shelter site

सीएम और डीएम के तुगलकी फरमान का अनुपालन नामुमकिन

जब पिछले आदेश का पालन नहीं हो पाया तो सभी ग्राम पंचायतों में पशु आश्रय स्थल बनाने का नया आदेश जारी कर दिया गया। उसके बाद नया आदेश आया कि पहले पशुओं की गणना होगाी, उसके बाद न्याय पंचायत स्तर पर या पशुओं की संख्या के अनुपात में पशु आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। जब इस पर भी कोई समाधान नहीं हुआ तो फिर सभी पंचायतों में पशु आश्रय स्थल बनाने का आदेश कर दिया गया। अब यही पशु आश्रय स्थल प्रधानों एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों के लिए मुसीबत बन रहे हैं, क्योंकि इन आधी अधूरी तैयारियों के साथ शुरू किए गए इन पशु आश्रय स्थलों में चारा, पानी और छाया की समुचित व्यवस्था नहीं हो पायी है। ऐसे में इन पशु आश्रय स्थलों में पशुओं का मरना जारी है, जिसे लेकर आम जनता इन पशु आश्रय स्थलों को जानवरों की मरणशाला कहना शुरू कर दिया है। 

Living cremation grounds becoming a livestock shelter site

अव्यवस्था के बीच चालू किये जा रहे पशु आश्रय स्थल

सीएम के आदेश के एक माह बाद डीएम कौशलराज शर्मा का आदेश आया कि यदि 24 घंटे बाद एक भी आवारा गोवंश सड़क पर घूमता पाया गया तो उस क्षेत्र के लेखपाल को निलम्बित कर दिया जाएगा। डीएम के इस फरमान का अनुपालन होना इतना आसान नहीं था, क्यों​कि सरकार की इस सम्बन्ध में कोई स्पष्ट नीति नहीं है। फिर भी जहां के प्रधानों एवं अधिकारियों ने इसमें तेजी दिखाई उनके यहां बन चुके पशु आश्रय स्थलों में पशुओं के मरने का सिलसिला भी जारी है, क्योंकि पशुओं के​ लिए चारा, पानी के साथ छाया की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद किसी—किसी पशु आश्रय स्थल मे आवारा गोवंश की संख्या 4 सौ से अधिक पहुंच गयी, जिसमें खूंखार साड़ों ने कमजोर और छोटी गायों एवं बैलों को मारना या उनके साथ जबरन एक से अधिक सांड़ों ने सेक्स करना शुरू कर दिया। ऐसे में भूखे प्यासे गोवंश की मौत होना स्वाभाविक है। 

अव्यवस्थाओं के बीच संचालित पशु आश्रय स्थलों मे गोवंश का मरना जारी

विकास खण्ड माल की ग्राम पंचायत मड़वाना में करीब एक माह पूर्व पशु आश्रय स्थल में पशुओं को रखने का काम शुरू हुआ था, जहां लगभग हर दिन तीन गोवंश मर रहे हैं। अभी तक यहां के सभी पशुओं की टैगिंग और सांड़ों को बधिया नहीं किया जा सका है। दूसरे स्थान पर ससपन का पशु आश्रय स्थल है, जहां साढ़े तीन सौ से अधिक गोवंश दो दिन में ही बंद कर दिये गये। बिना चारे पानी की व्यवस्था किये ही यहां गोवंश को लाकर रख दिए जाने का नतीजा यह हुआ कि यहां भी रोजाना तीन से चार पशुओं के मरने का ​क्रम जारी है, क्योंकि यहां पानी के लिए बोरिंग तो कर ​दी गयी, लेकिन उसमें से पानी कैसे निकलेगा। इसकी व्यवस्था जेनरेटर सेट के जरिये की जा रही है। लोगों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल समुचित व्यवस्था करने की बात कही। दो ट्राली पुआल लाया गया है, जो पर्याप्त नहीं है। 

Living cremation grounds becoming a livestock shelter site

टैगिंग और बधियाकरण में लगेंगे महीनों

पशु पालन विभाग के डाक्टर और कर्मचारी रोजाना अपना काम कर रहे हैं। बावजूद इसके अभी इस काम मे महीनों लगेंगें, तब तक हजारों गोवंश की इन पशु आश्रय स्थलों में मौत हो जाएगी। मड़वाना के रोजगार सेवक समतन्जय सिंह ने कहा कि इससे बड़ा कोई पाप सरकार नहीं करवा सकती। वहीं प्रधान पति राकेश सिंह ने कहा कि भूसे का रेट 11 सौ रुपए कुन्तल हो चुका है वह भी ढूंढ़े नहीं मिल रहा है, अब तो केवल भूसा ही तलासते रहते हैं। वहीं, दूसरी ओर ससपन में प्रधान के सहयोगियों ने कहा कि भूसा मिल नहीं रहा है, इसलिए पुआल ला रहे हैं। वह भी मंहगा हो गया है। पूर्व प्रधान राजकुमारी ने आरोप लगाया कि जब तक पानी और चारे की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक यहां मरने के लिए जानवरों को नहीं रखना चाहिए था। आज भी सैकड़ों जानवर सड़कों पर आवारा घूम रहे हैं, जिससे किसान परेशान हैं। वह यह पता लगा रहे हैं कि उनकी ग्राम सभा के जानवर कहां किस गोशाला मे रखे जाएंगे। अभी यह स्थिति कम से कम एक माह रहने की उम्मीद की जा रही है।

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