लोकसभा चुनाव: इस खास सीट पर इतिहास रच सकती है बसपा, लगा चुकी है हैट्रिक


NAZO ALI SHEIKH 12/02/2019 09:15 AM
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Lucknow. लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपनी अपनी खास सीटों पर नजर बनाए हुए हैं, जिन सीटों पर पहले जीत हासिल हुई थी या फिर रिकॉर्ड तोड़ सफलताएं मिली, उन सीटों पर पार्टी नेताओं का उत्साह होना तो स्वाभाविक ही है। चुनावी सरगर्मी के बीच सीटों की गुणा गणित में दिग्गज नेता जुट गए हैं। हालांकि, यूपी की लोकसभा संख्या 30 सीतापुर में अभी भी बीजेपी का ही कब्जा है। यहां के इस सीट की बात करें तो बीजेपी के राजेश वर्मा ने 2014 में बसपा के प्रत्याशी को हराया था। यह सीट हमेशा से ही कुर्मी समुदायों के नाम ही रहा है। जहां इस समुदाय का वोट जाता है, उसकी जीत तय मानी जाती है, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कड़ी मात मिलने वाली है। चूंकि समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बाद बसपा की ताकत काफी बढ़ गई है। यही कारण है विरोधी पार्टियों को भी बसपा और सपा का गठबंधन रास नहीं आ रहा है। सपा बसपा गठबंधन के बाद यहां का मुकाबला बेहद ही दिलचस्प हो गया है। बताते चलें कि इस सीट से बसपा 1999 से 2009 तक जीत की हैट्रिक लगा चुकी है।

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Lok Sabha elections: BSP can make history on this special seat

  1952 से अब तक का इतिहास

बताते चलें कि सीतापुर लोकसभा की इस अहम सीट का राजनीतिक इतिहास हमेशा ही केंद्र बना रहा है। इस सीट पर सभी पार्टियों की नजरें रहती आई है। 1952 से ही ये इस सीट का अपना अलग वर्चस्व बना रहा है। 1952 और 1957 के चुनाव में यहां से कांग्रेस पार्टी की तरफ से उमा नेहरु ने परचम लहराया था। उमा पंडित जवाहर लाल नेहरु की रिश्ते में भाभी लगती थीं। इसके बाद 1962, 1967 के दौरान यहां भारतीय जनसंघ का कब्जा रहा। हालांकि, दोबारा कांग्रेस 1971 में अपना झंडा गाड़ने में सफल रही थी। 

  लगाई थी हैट्रिक

बताते चलें कि जब 1977 में आपातकाल लगा तो कांग्रेस यहां से चुनाव हार गई थी। भारतीय लोकदल को यहां से जीत मिली। इसके बाद 1980, 1984 और 1989 में कांग्रेस ने जबरदस्त तरीके से वापसी करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। वहीं,1990 में बीजेपी की किस्मत पलटी और 1991 में अपना झंडा गाड़ दिया। इसके बाद 1996 में सपा और 1998 में बीजेपी को जीत हासिल हुई। वहीं, 1999 से 2009 तक बसपा ने भी इस सीट पर हैट्रिक लगाते हुए तीन बार चुनाव जीता। इसके बाद 2014 में फिर यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई।

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  इनका वोट निर्णायक

यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर की सीटों का निर्णायक कुर्मी वोटरों को ही माना जाता है। चूंकि यहां कुर्मी वोटरों की संख्या काफी है। पिछली लोकसभा चुनाव 2014 के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यहां लगभग 16 लाख वोटरों की संख्या है। इन वोटरों में पुरुषों की संख्या 8 लाख से अधिक तो महिला वोटरों की संख्या 7.5 लाख से अधिक है। सीतापुर में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं। इन सीटों में सीतापुर, लहरपुर, बिसवां, सेवता और महमूदाबाद है। बताते चलें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी लहर होने के बाद भी महमूदाबाद सीट से सपा ने जीत का झंडा गाड़ दिया था। 2014 के चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी से राजेश वर्मा को 40 फीसदी और बसपा की कैसर जहां को 35 फीसदी वोट हासिल हुए थे। कैसर यहां से 2009 में सांसद रह चुकी हैं। कुल वोट 66 फीसदी पड़े थे।

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  बसपा से की थी शुरुआत

फिलहाल आपको बता दें कि बीजेपी से इस सीट पर वर्तमान सांसद राजेश वर्मा ने 1999 में बसपा से ही जीत हासिल कर पहली बार संसदी की सीट पर कब्जा किया था। बसपा से ही उन्होंने अपनी राजनैतिक करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह राजनीति के मंझे खिलाड़ी बन गए। वर्मा दोबारा यहां से 2004 में फिर सांसद बने। अंत में मौके की नजाकत को देखते हुए उन्होंने 22 साल बाद बसपा को छोड़ 2013 में बीजेपी का हाथ थाम लिया। रिपोर्ट के मुताबिक वर्मा की संपत्ति 4 करोड़ से अधिक है। फिलहाल अब देखना ये होगा कि सपा और बसपा गठबंधन के बाद वर्मा अपनी ये अहम सीट बचा पाते हैं, या नहीं।

Web Title: Lok Sabha elections: BSP can make history on this special seat ( Hindi News From Newstimes)


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