केले मे लगे रोग से किसानों को भारी नुकसान


LEKHRAM MAURYA 14/02/2019 13:01:22
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केले मे लगे रोग से किसानों को भारी नुकसान
लखनऊ। केले मे लगे एक रोग ने उत्तर पदेश सहित देश के कई हिस्सों मे फसल को काफी नुकसान पहुॅचाया है। अब केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान एवं केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ ने इस रोग से बचाव का उपाय खोज लिया हैं। 
 
रोग निदान के लिए वैज्ञानिकों ने 50 टन दवा की आवश्यकता बताई
उत्तर प्रदेश राज्य मे छोटे एवं सीमान्त युवा किसानों द्वारा उच्च पारिश्रमिक की प्राप्ति एवं सतत आजीविका उपाय को ध्यान मे रखते हुए केले का उत्पादन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। वर्तमान समय मे केले की खेती राज्य मे 55342 हेक्टेयर भूमि मे की जा रही है जो महाराष्ट्र तथा गुजरात जैसे प्रमुख केला उत्पादक राज्यों के बराबर है। जून 2017 के दौरान अयोध्या जिला के सोहावल ब्लाक मे फयूजेरियम आॅक्सीसफोरम एफ.एसपी. क्यूबेन्स केला मे होने वाला एक खतरनाक रोग है जो उष्ण प्रदेश मे होने वाले ग्रैन्ड नाइन नामक केले की किस्मों मे विशेष रूप से देखा गया हैं। इस रोग से केला उत्पादकों को भारी क्षति होती है तथा मृदा एवं जल के माध्यम से यह तेजी से फैलता है। यह फफूॅद मृदा मे 40 वर्षों तक रह सकता हैं। इसका उन्मूलन करने मे काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। एशियाई तथा आ​स्टे्रलियाई देशों मे इस रोग के कारण पूर्व मे लाखों डालर का नुकसान हो चुका है तथा ये देश इस रोग को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधन प्रणाली विकसित करने हेतु अथक प्रयास कर रहे हैं। केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान एवं केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ द्वारा इस रोग की उपस्थिति की मौरफोलोजिकल तथा आण्विक तकनीक द्वारा पुष्टि की गयी। इन अनुसंधान संस्थानों के सर्वेक्षण रिपोर्ट से यह पुष्टि होती है कि यह रोग बाराबंकी, महाराजगंज,कुशीनगर,संतकबीर नगर तथा गोरखपुर जिलों मे भी फैला है। 
उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र तक फैला रोग 
उक्त दोनो संस्थानों के वैज्ञानिकों ने फयूजीकौन्ट नामक एक अनूठा जैव फार्मूला तैयार किया है। जिससे इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसका प्रयोग किसानों की 48 एकड़ मे फैली केले की खेती वाले 72 प्रक्षेत्रों मे किया गया, जिसका परिणाम सकारात्मक पाया गया है। अब इसका प्रयोग अयोध्या के सोहावल ब्लाक तथा अम्बेडकर नगर जिले के किसानों द्वारा किया जा रहा है। 
इस सम्बन्ध मे जानकारी देते हुए सीआईएच रहमानखेड़ा के निदेशक डा.शैलेन्द्र राजन ने कहा कि अभी एक साल मे डेढ़ टन दवा का उत्पादन हो रहा है जबकि यूपी बिहार के लिए 50 टन टवा की आवश्यकता होगी। उन्होने कहा कि इस दवा से 90 फीसदी रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 

 

 

 Heavy losses to farmers in banana disease

Web Title: Heavy losses to farmers in banana disease ( Hindi News From Newstimes)


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