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CTDDR 2019 औषधि अनुसंधान 7वां महाकुंभ : मानसिक रोगों, तंत्रिका विकारों, कैंसर और हृदय रोगों पर रहा केन्द्रित तीसरा दिन


GAURAV SHUKLA 22/02/2019 18:36:44
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Lucknow. सीटीडीडीआर-2019 के तीसरे दिन तंत्रिका तंत्र संबंधी विकारों के सत्र में, अपने प्लेनरी व्याख्यान में यूएसए के प्रोफेसर जेफरी कॉन ने शिज़ोफ्रेनिया (जिसे खंडित मानसिकता/पागलपन भी कहते हैं) के उपचार के लिए नवीन दृष्टिकोण पर चर्चा की। यह शिज़ोफ्रेनिया के रोगियों में पाये जाने वाले सकारात्मक, नकारात्मक और संज्ञानात्मक लक्षणों को नियंत्रित कर सकता है। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि कैसे शिज़ोफ्रेनिया का इलाज जीपीसीआर्स (GPCRs) के पॉजिटिव एलोस्टेरिक मॉड्यूलेटर्स से किया जा सकता है।

 CTDDR 2019 ausadhi anusandhan ka 7va mahakumbh
इसी सत्र में निम्हान्स (NIMHNS) बेंगलुरु के डॉ. संजीव जैन ने कोशिका आधारित मॉडल सिस्टम्स पर अपने हालिया शोध पर चर्चा की और कहा कि "ओमिक्स" एप्रोच के माध्यम से पार्किंसंस रोग, शिज़ोफ्रेनिया और संबंधित मानसिक विकारों की क्रियाविधि को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

वहीं एनसीबीएस (NCBS), बेंगलुरु के डॉ. रघु पाडिन्यत ने बाइपोलर अफेक्टिव डिजीज (BPAD) के बारे में बात की, जो युवाओं की एक न्यूरोसाइकिएट्रिक बीमारी है। इस बीमारी में बार-बार मूड स्विंग (मिजाज बदलना) एक आम लक्षण है।

उन्होंने कहा कि लिथियम का उपयोग अक्सर प्रथम पंक्ति की एंटी-साइकोटिक (मनोरोग-निवारक) दवा के रूप में किया जाता है और यह बीपीएड के लक्षणों को नियंत्रित करने में अत्यधिक प्रभावी भी हो सकता है।

हालांकि, बीपीएड वाले सभी रोगियों में लिथियम समान रूप से प्रभावी हो यह आवश्यक नहीं है। उन्होंने मानसिक रोगों के लिए व्यक्तिगत तौर पर सेलुलर मेकेनिज़्म के माध्यम से समाधान खोजने हेतु किए जा रहे उनके प्रयासों को साझा किया।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच, यूएसए से आए डॉ. जॉन ए एलन ने न्यूरो-चिकित्सा के लिए नए डोपामाइन डी1 रिसेप्टर एगोनिस्ट की खोज एवं उसके विकास पर अपने हाल के अनुसंधान को साझा किया। उनकी यह खोज, डोपामिनर्जिक सिग्नलिंग से जुड़े न्यूरोलॉजिकल डिसओर्डर्स (मनोरोगों) के इलाज के लिए उम्मीद की नई किरण लाती है।

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ओरल कैंसर में ट्यूमर की वृद्धि को एपिजेनेटिक रेगुलेशन के द्वारा कम किया जा सकता है: प्रो. तपस कुमार कुंडू

सीएसआईआर-सीडीआरआई के निदेशक प्रोफेसर तपस कुमार कुंडू ने ओरल (मुख के) कैंसर के चिकित्सीय रेगुलेशन में एपिजेनेटिक दृष्टिकोण के बारे में अपने अनुसंधान के बारे में चर्चा की।

उन्होंने कहा, हमने पाया है कि हिस्टोन के लाइसिन एसिटिलिटेशन और आर्जिनिन मिथाइलेशन की मात्रा नाटकीय रूप से ओरल कैंसर रोगियों में बढ़ जाती है एवं जिससे उनकी अनेक क्रियात्मक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। हालांकि, इसके मोलिक्युलर मेकेनिज़्म की विस्तृत जानकारी हेतु रिसर्च अभी जारी है।

अनेक क्रियात्मक गतिविधिययों (मोडिफिकेशन्स) के लिए जिम्मेदार ये एंजाइम नेक्स्ट जेनरेशन एपिजेनेटिक ट्रीटमेंट के लिए बेहतर टार्गेट हो सकते हैं।

उन्होने आगे कहा, हमने कुछ छोटे अणुओं की खोज की है जो विशेष रूप से इन एंजाइमों को टार्गेट करते हैं और अंततः ट्यूमर की वृद्धि होने से रोकते हैं। P300 और PMRT4 जैसे स्माल मोलिक्युल इन्हिबिटर इसके लिए प्रत्याशित प्रभावी थेरेपी हो सकते हैं।

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देर से निदान और उचित उपचार की कमी ही अग्न्याशय कैंसर को घातक बीमारी बनाती हैं: डॉ ह्युनसुक ली

कोरिया की सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी, सिओल की डॉ. ह्यूनसुक ली ने बीआरसीए2 जीन के जर्म-लाइन म्यूटेशन से संबंधित अपने निष्कर्षों पर चर्चा की, जो स्तन और अग्न्याशय (पैंक्रियाज़) में ट्यूमर के निर्माण को प्रेरित करता है। देर से निदान और उचित उपचार की कमी के कारण ही अग्न्याशय का कैंसर सबसे घातक रोग बन जाता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के बारे में अभी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है इस वजह से 90 प्रतिशत मरीज इसकी सर्जरी नहीं करा सकते हैं, जिससे मामला और खराब हो जाता है। डॉ ली ने आगे बताया, हम मानव रोगियों के फाइन नीडल बायोप्सी (एफएनबी) द्वारा लिए नमूनों से 3-डी पैंक्रियाटिक ऑर्गेनोइड कल्चर कर उनके विश्लेषण में सफल रहे हैं। माउस मॉडल से मोलिकुलर रूट की समझ के साथ, मानव एफएनबी नमूनों के पैंक्रियाटिक ऑर्गेनोइड कल्चर के माध्यम से हम इस घातक बीमारी को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। एफएनबी तकनीक से व्युत्पन्न मानव पैंक्रियाटिक ऑर्गेनोइड का रोगियों की अवश्यकता अनुसार उनके इलाज के लिए भविष्य में एक बेहतर विकल्प होगा।

अन्य सत्रों में क्लिनिकल फार्माकोलॉजी, एक्ट्रेक, इण्डिया से डॉ. विक्रम गोटा (ब्रिटिश कोलंबिया  युनिवर्सिटी), कनाडा से प्रो. डाइटर ब्रोम (डॉ. रेड्डी इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेस), भारत के डॉ. परिमल मिश्रा (जामिया मिल्लिया इस्लामिया), भारत से मो. जाहिद अशरफ़ (मोनाश इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज), ऑस्ट्रेलिया से प्रो. जोनाथन बायल (एबवी इंक) यूएसए से डॉ. अश्वनी सिंह और यूनिवर्सिडाड नैशियल डी रोसारियो अर्जेंटीना से डॉ. गुइलर्मो आर. लबादी, ने बहुत जानकारीपूर्ण और ब्रेन-स्टोर्मिंग व्याख्यान दिये, जिसने विभिन्न रोगों की समझ के लिए नई अंतर्दृष्टि प्रदान की जिससे सभी प्रतिभागी अपने अनुसंधान की दिशा एवं दशा बदलने के लिए प्रेरणा ले सकेंगे।

Web Title: CTDDR 2019 ausadhi anusandhan ka 7va mahakumbh ( Hindi News From Newstimes)


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