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कोमा में मरीज, सांस नली चोक और दिमाग में भरा फ्लूड फिर भी हार नहीं माने डॉक्टर 


GAURAV SHUKLA 11/03/2019 10:44:51
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Lucknow.  राजधानी स्थित किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के आरआईसीयू यूनिट में 71 वर्षीय मरीज की जिंदगी बचा कर डॉक्टर्स की टीम ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मरीज उम्रदराज होने के साथ ही कोमा में था, उसकी सांस नली चोक थी, फेफड़े काम नहीं कर रहे थे और दिमाग में फ्लूड भी भरा हुआ था। बावजूद इसके डॉ की टीम ने हार न मानते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी मरीज की जान बचाने का काम किया। मरीज को होश में लाने के लिए उसे 37 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया इस बीच दो बार उसका दिल फेल हुआ और दोनों बार उसे कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन यानी सीपीआर देना पड़ा और 8 बार ब्रॉन्कोस्कोपी करनी पड़ी। 

KGMU Koma me tha marij sans nali thi chowk fir bhi haar nahi mane docter
गौरतलब है कि 71 वर्षीय आजमगढ़ निवासी बलिहारी यादव को 29 जनवरी को ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया था। उस दौरान बलिहारी को दिमागी बुखार और निमोनिया की शिकायत बताई गयी थी। कोमा में बेहोशी की हालत में उल्टी होने के कारण बलिहारी की सांस नली चोक हो गयी और उनके फेफड़े भी ठीक ढ़ंग से काम नहीं कर रहे थे। इलाज के दौरान पल्मोनरी ऐंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के हेड डॉ वेद प्रकाश की टीम ने पाया कि इंफेक्शन के कारण मरीज के शरीर के भीतर ब्लीडिंग हुई जिसके चलते भीतर ही खून के थक्के भी जम गये। यह थक्के एक्स-रे की भी पकड़ में नहीं आ रहे थे। जिसके चलते ब्रॉन्कोस्कोपी किये जाने पर इसका पता चला। 

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दो बार फेल हुआ मरीज का दिल 
डॉ. वेद ने बताया कि इलाज के दौरान मरीज का दिल दो बार फेल हुआ। इस दौरान डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। पहली बार मरीज को 12 मिनट जबकि दूसरी बार उसके 18 मिनट सीपीआर दी गयी। इसके अलावा मरीज के दिमाग में सेरिलो स्पाइनल फ्लूड के प्रवाह में रुकावट के चलते दिमाग में भी फ्लूड भर गया था। मरीज के उम्रदराज होने के कारण फ्लूड को शंटिंग के जरिए निकाला नहीं जा सकता था लिहाजा फ्लूड को बाहर निकालने के लिए दवाओं का सहारा लिया गया। इस उपचार के साथ ही मरीज को 37 दिन वेंटिलेटर पर रखा उसकी दिक्कतों से छुटकारा दिलाया गया। फिर मरीज को गत दो दिन पहले डिस्चार्ज किया गया। 

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