यूपी विधान परिषद के इतिहास का देश के स्वाधीनता संग्राम से अटूट संबध: रमेश यादव


LEKHRAM MAURYA 16/03/2019 08:52
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Lucknow. उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि उच्च सदन के सदस्यों से ऐसे व्यवहार की अपेक्षा कर सकते हैं कि देश में जहां-जहां उच्च सदन नहीं है, वहां भी हो, इसलिए हमें अपने कार्यप्रणाली से उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से परस्पर विचार-विमर्श की परम्परा थी। लोक जीवन के आधार पर पूर्व और पश्चिम का चिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम में व्यक्तिवाद की अधिकता है, परन्तु भारतीय जीवन में सामूहिक जीवन जीने को महत्वपूर्ण माना गया है। 

vidhan parishad ke itihsa se desh ka sambandh

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित संवैधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान द्वारा जनहित में ‘‘विधान परिषद की सार्थकता‘‘ विषय पर विधानसभा स्थित तिलक हाल में आयोजित विचार गोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शोरगुल से युक्त वातावरण में जनता द्वारा सीधे निर्वाचित विधानसभा में अस्थाई बहुमत द्वारा लिये गये निर्णयों की तुलना में विधान परिषद का गठन इस प्रकार होता है कि वह अपेक्षाकृत शान्त वातावरण में विवेकपूर्ण तथा संतुलित निर्णय लेने में सक्षम होता है और इस प्रकार संवैधानिक सरकार की कार्य करने में बहुत उपयोगी भूमिका अदा करता है। 

विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने कहा कि हम जिस सदन की सार्थकता पर चर्चा कर रहे हैं निश्चय ही इसका अतीत और इतिहास बहुत ही गौरवशाली है। इसके कई सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम ही नहीं अपितु उसके पश्चात स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण हेतु गठित संविधान सभा में भी सदस्य के रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के इतिहास का देश के स्वाधीनता संग्राम से अटूट रूप से संबध रहा है। एक ओर इसने स्वतंत्रता की यज्ञ-ज्योति से प्रेरणा और स्फूर्ति प्राप्त की तो दूसरी ओर इसमें मूल्यवान आहूतियां देकर उस ज्योति को अधिक प्रखरता से प्रज्जवलित करके उसे पुष्ट और तुष्ट किया है। 

प्रमुख सचिव विधान परिषद डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन के विभिन्न पहलू ऐसे होते हैं जिन पर सदन में गंभीरता, दूरदृष्टि, स्पष्ट तथा निष्पक्ष भाव से विचार करने की आवश्यकता होती है। 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने अपना योगदान सिर्फ सदन तक ही सीमित नहीं रखा है अपितु मिनी सदन अर्थात संसदीय समितियों के माध्यम से भी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अपनी सार्थकता सिद्ध की है। 

इस संगोष्ठी में कई विधान परिषद सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी का समापन करते हुए सभापति रमेश यादव ने संगोष्ठी में आये हुए सभी विधान परिषद सदस्यों एवं अतिथियों का अभार प्रकट किया। 

इस अवसर पर विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक, विधान परिषद सदस्य शतरूद्र प्रकाश, प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Web Title: vidhan parishad ke itihsa se desh ka sambandh ( Hindi News From Newstimes)


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