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लोकसभा: BSP की गणित में फेल होंगे विरोधी, यूपी में मिलेंगी इतनी सीटें और फतह होगा...


NAZO ALI SHEIKH 17/03/2019 10:46:46
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Lucknow. लोकसभा चुनाव के बीच बढ़ती सियासी गहमागहमी में सभी पार्टियां जीत की उम्मीद लगाए बैठी हैं। वहीं जीत के लिए सभी अपनी- अपनी पार्टियों को धार देने में लगे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएसपी को पूरी उम्मीद है कि वह इस बार पीएम की कुर्सी पर विराजमान हो सकती हैं। उन्हें दिल्ली अब दूर नजर नहीं आ रही है। ऐसा हम नहीं बल्कि यहां कुछ आंकड़े हैं जो बता रहे हैं कि बीएसपी इस बार मजबूती से अपना पक्ष रखने वाली है। 

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  बीजेपी से गठबंधन

बीएसपी का बीजेपी से गठबंधन होने का एक ही विकल्प था पीएम की कुर्सी लेकिन बीजेपी गठबंधन के बदले कुर्सी देने को किसी बी सूरत में राजी नहीं हो सकती थी। ऐसे में बसपा सुप्रीमों ने दिल्ली तक पहुंचने का नया रास्ता ढूंढ लिया उन्होंने अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी पार्टी सपा के साथ पुरानी दुश्मनी को दरकिनार करते हुए रिश्तों को नए नाम देने से पीछे नहीं हटीं। 

  बसपा का मजबूत गणित

बसपा को लगता है कि अगर बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो कांग्रेस के लिए भी पूर्ण बहुमत पाना मुश्किल है। कांग्रेस के लिए बसपा का आंकलन सिर्फ 100 से 125 सीटों तक ही है। दूसरे इलाकाई दल अगर अपने राज्य की शत-प्रतिशत सीट जीतते हैं तो भी वह इस आंकड़े को नहीं पा सकेंगे। क्योंकि दूसरे राज्यों में कुल सीटें यूपी से आधी या उससे भी कम हैं। इलाकाई दलों में उसके पास सबसे ज्यादा सीट होन की वजह से उसके पक्ष में जुटान हो सकती है। कांग्रेस की भी बीजेपी सरकार बनने से रोकने के लिए उसे समर्थन देना मजबूरी होगी। 

  कांग्रेस से दूर होने की वजह

कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन ने करने के फैसेले पर पॉलिटिकल सर्कल में लोग भले ही यह कह रहे हैं कि ऐसा केंद्र सरकार के दबाव में हो रहा है, लेकिन हकीकत तो  यह कि बसपा को लगता है कि गठबंधन से अगर कांग्रेस मजबूत हो गई तो यह एख तरह से उनके लिए अपने हाथों अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। क्योंकि कांग्रेस के अगर ज्यादा सीट पा लीं तो फिर पीएम पद के लिए मायावती की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में कांग्रेस खुद सरकार बनाने का दावा कर देगी। साथ ही कांग्रेस को दूसरे इलाकाई दलों का भी समर्थन मिल सकता है। 

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  सपा क्यों है बेहतर विकल्प? 

आंकड़ो के अनुसार 2014 में बीजेपी सरकार आने के बाद अपर कास्ट पूरी तरह से बीजेपी में शिफ्ट हो गई है। ओबीसी का काफी हिस्सा भी बीजेपी में चला गया है। इस बदलाव का नतीजा यह हुआ की चुनाव में बीएसपी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। तभी बसपा सुप्रीमो मायावती समझ गईं थीं। कि आगे की राजनीति के लिए नई रणनीति तैयार करनी होगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में दलित-मुस्लिम वोटों के बिखराव के चलते बसपा का यह दांव कामयाब नहीं हो पाया था। इस बार दलित-मुस्लिम वोट को एकजुट रखने के लिए सपा से अपनी नाराजगी को खत्म कर सपा-बसपा ने गठबंधन कर लिया। 

Web Title: Loksabha bsp kI ganit mein Faill honge virodhi, up mein milengi itani seeten aur fatah hoga ( Hindi News From Newstimes)


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