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भारत के पहले लोकपाल का नाम हुआ तय, सोमवार को हो सकती है अधिकारिक घोषणा


DEEP KRISHAN SHUKLA 17/03/2019 15:41:32
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New Delhi. लोकपाल को लेकर लम्बे समय से चल रही चर्चाओं पर सोमवार को अधिकारिक रूप से विराम लग सकता है। वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिननाकी चंद्र घोष भारत के पहले लोकपाल होगें। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो गया है। 

Bharat Ke Lokpal Ka Naam Hua Tay Hua, Somwar Ko, Ho Sakti Hai Adhikarik Ghoshna
मालूम हो कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपनी भ्रष्टाचार विरोधी के तहत लोकपाल नियुक्ति में देरी के विरोध में बीते दिनों एक बार फिर आंदोलन शुरू किया था। जल्द लोकपाल के गठन की शर्त पर ही उन्होंने अपने आंदोलन को वापस लिया था। 

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तमाम आलोचनाओं के बीच लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केन्द्र सरकार ने लोकपाल नियुक्ति के लिए आमंत्रित किए गए थे। नौ सदस्यीय लोकपाल चयन समिति की पहली बैठक इसके गठन के लगभग चार महीने बाद जनवरी में हुई थी।

इस समिति में एसबीआई की पूर्व प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य, प्रसार भारती के अध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश और इसरो के प्रमुख एएस किरण कुमार को बतौर सदस्य शामिल किया गया था। लोकपाल चयन समिति की अध्यक्ष न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई हैं।

 
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चन्द्र घोष को भारत का पहला लोकपाल बनाए जाने पर सहमति बन गयी है। माना जा रहा है कि 18 मार्च यानी की सोमवार को इसकी अधिकारिक घोषणा हो सकती है।  

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  लोकपाल के सदस्य बनने के ये हैं मानक
लोकपाल के न्यायिक सदस्य बनने के लिए आवेदक को या सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान या पूर्व प्रधान न्यायाधीश या किसी भी हाईकोर्ट का वर्तमान या पूर्व मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। गैर-न्यायिक सदस्यों में भ्रष्टाचार रोधी संबंधित क्षेत्र का 25 सालों का अनुभव रखने वाला कोई भी व्यक्ति हो सकता है।

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  5 साल होगा अध्यक्ष का कार्यकता, मुख्य न्यायाधीश के बराबर वेतन
यह पात्रता लोकपाल अधिनियम के मुताबिक निर्धारित की गई है। अध्यक्ष पद के लिए कोई निर्वाचित प्रतिनिधि या कोई भी व्यवसाय करने वाला या किसी भी क्षेत्र का पेशेवर आवेदन नहीं कर सकता है। इसके साथ ही उसे किसी ट्रस्ट या लाभ के पद भी नहीं होना चाहिए। लोकपाल समिति के अध्यक्ष का चयन पांच वर्ष के लिए किया जाएगा। उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश के बराबर वेतन दिया जाएगा। 
  अध्यक्ष बनने के बाद ये रहेगा प्रतिबंध
लोकपाल समिति के अध्यक्ष बनने व्यक्ति को सरकार से किसी भी प्रकार पद को प्राप्त करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा सरकार में किसी लाभ के पद पर उनकी नियुक्ति भी नहीं हो सकेगी। इतना ही नहीं अध्यक्ष पद छोड़ने के पांच साल तक संसद या राज्य विधानसभाओं के चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध रहेगा। 

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Web Title: Bharat Ke Lokpal Ka Naam Hua Tay Hua, Somwar Ko, Ho Sakti Hai Adhikarik Ghoshna ( Hindi News From Newstimes)


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