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क्या है पैंक्रियाटिक कैंसर,  जिसकी जंग में हार गए पर्रिकर


ARCHANA PANDEY 18/03/2019 10:43:11
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Lucknow. गोवा के मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार देर रात 63 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पर्रिकर एडवांस्ड पैंक्रियाटिक कैंसर से ग्रस्त थे, जिसका पता पिछले साल फरवरी में चला था, जिसके बाद उनका इलाज गोवा, मुंबई, दिल्ली और न्यूयॉर्क के अस्पतालों में कराया गया। लेकिन अखिरकार इस गंभीर बीमारी से लड़ते हुए हुए पर्रिकर जिंदगी की जंग हार गए। हम आपको बताते हैं कि ये बीमारी है क्या और इसकी पहचान कैसे होती है।  

What is pancreatic cancer, which has lost its battle in Parrikar

घातक बीमारी है पैंक्रियाटिक कैंसर

पैंक्रियाटिक कैंसर बहुत ही घातक बीमारी है। इंसान के पेट में मौजूद अग्‍नाशय में कैंसर युक्‍त कोशिकाओं का जन्‍म होने के कारण पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरूआत होती है। इस बीमारी की चपेट में ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक आते हैं, 60 साल की उम्र के बाद लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं और मनोहर पर्रिकर की उम्र 63 साल थी।

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मेडिकल साइंस में इसे 'मूक कैंसर' भी कहते हैं

मेडिकल साइंस में इस बीमारी को 'मूक कैंसर' भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस बीमारी के लक्षण आपके शरीर में मौजूद तो होते हैं, लेकिन आसानी से नजर नहीं आते हैं। इस बीमारी के ट्यूमर शुरुआती स्तर पर डॉक्टरों की पकड़ में नहीं आते हैं, लोगों को कुछ महसूस भी नहीं होता है, जब तक कि ये बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों में न पहुंच जाए। बता दें कि मनोहर पर्रिकर की ये बीमारी डॉक्टरों को 18 मार्च 2018 को पकड़ में आई।

महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा होती है ये बीमारी 

पैंक्रियाटिक कैंसर महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को ज्यादा शिकार बनाता है। आम तौर पर देखा जाता है कि पुरुष धूम्रपान ज्यादा करते हैं, इस कारण उनके इस रोग के चपेट में आने की संभावना ज्यादा होती है। धूम्रपान करने वालों में अग्‍नाशय कैंसर के होने का खतरा सामान्य व्यक्ति के मुकाबले दो से तीन गुना तक ज्यादा होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रेड मीट और चर्बी युक्‍त आहार का सेवन करने वालों को ये जानलेवा बीमारी शिकार बनाती है। अगर आप फल और सब्जियों का सेवन प्रचुर मात्रा में करते हैं तो इस बीमारी के होने की आशंका कम होती है।

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बता दें कि उम्र बढ़ने के साथ ही इंसान के डीएनए में कैंसर पैदा करने वाले बदलाव होते हैं। इसी कारण 60 साल या इससे अधिक उम्र के शख्स इस बीमारी का ज्यादा शिकार बनते हैं।
 

अग्नाशय कैंसर के लक्षण

कमजोरी महसूस होना, वजन घटना

स्किन, आंख और यूरिन का रंग पीला हो जाना

भूख न लगना, जी मिचलाना

पेट के ऊपरी भाग में दर्द

पीलिया

पेल या ग्रे मल

हाई ब्लड शुगर 

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अग्नाशय कैंसर से बचाव और उपचार

यदि आप नियमित रूप से अपना हेल्थ चेकअप कराते हैं तो इस बीमारी से आप काफी हद तक बच सकते हैं। जैसे ही इस बीमारी का पता चले तुरंत स्पेशलिस्ट डॉक्टर से मिलें। मॉडर्न मेडिकल साइंस कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के द्वारा इस बीमारी का इलाज करता है। वहीं कुछ घरेलु उपाय करके भी इस बीमारी से बचाव कर सकते है। 
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अब हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बता रहे हैं जिसको अपनाकर आप इस बीमारी से दूरी बना सकते हैं
फलों का जूस: ताजे फलों का जूस और हरी सब्जियां खाने से अग्नाशय कैंसर से लड़ने में फायदा मिलता है।
ब्रोकली: पैंक्रियाटिक कैंसर के उपचार के लिए ब्रोकली को अच्छा समझा जाता है। ब्रोकली में मौजूद फायटोकेमिकल, कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने में मदद मिलती है। ब्रोकली एंटी ऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं और खून को साफ रखने में मदद रखते हैं। 

इसके अलावा ग्रीन टी, लहसून, सोयाबीन और एलोवेरा का भी सेवन भी इस बीमारी में काफी लाभदायक है। हालांकि अगर किसी को भी जैसे ही इस बीमारी के होने की जानकारी मिले तो तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

Web Title: What is pancreatic cancer, which has lost its battle in Parrikar ( Hindi News From Newstimes)


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