जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और विधि 


ARCHANA PANDEY 20/03/2019 10:36:00
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Lucknow. रंगों का त्योहार होली किसी न किसी रूप में पूरे विश्व में मनायी जाती है, लेकिन संभवतः होलिका दहन का प्रावधान हमारे देश में ही है, जहां होली के इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

Know the auspicious time and method of Holika Dahan

होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा रहित प्रदोष काल में होली दहन को श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि होली की बची हुई अग्नि और भस्म को अगले दिन सुबह अपने घर ले जाने से सभी नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है।     

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होलिका दहन की परंपरा
भारत में नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पहली तिथि को शुरू होता है। इसके आने से पहले पुराने संवत्सर को विदाई दी जाती है। जिसकी विदाई के लिए होलिका दहन किया जाता है। इसे संवत जलाना भी कहते हैं। होलिका दहन में किसी वृक्ष कि शाखा को जमीन के अंदर डाला जाता है, चारों तरफ से लकड़ियां, उपलों से घेर कर निश्चित मुहूर्त में जलाया जाता है। इसमें गोबर के उपले, गेंहू की नई बालियां और उबटन जलाया जाता है, ताकि वर्ष भर व्यक्ति को आरोग्य कि प्राप्ति हो सके और उसकी सारी बुरी बलाएं अग्नि में भस्म हो जाएं। कई जगहों पर होलिका दहन के बाद उसकी राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है। 

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होलिका दहन की कहानी
पौराणिक मान्यता के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप खुद को भगवान मानता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के अलावा किसी की पूजा नहीं करता था। यह देख हिरण्यकश्यप काफी क्रोधित हुअा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अाग से कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद आग से बच गया, जबकि होलिका अाग में जलकर भस्म हो गई। उस दिन फाल्गुन मास की पुर्णिमा थी। इसी घटना की याद में होलिका दहन करने का विधान है। बाद में भगवान विष्णु ने लोगों को अत्याचार से निजात दिलाने के लिए नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया।

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कैसे करें होलिका दहन 

होलिका दहन से पहले पूजा करते समय होलिका पर हल्‍दी का टीका लगाएं। होलिका के चारों ओर अबीर गुलाल से रंगोली बनाएं और उसमें पांच फल, अन्‍न और मिठाई चढ़ाएं। होलिका के चारों ओर 7 बार परिक्रमा करके जल अर्पित करें। ऐसा करने से इससे घर में समृद्धि आती है। होलिका दहन का पर्व पौराणिक घटना से जुड़ा हुआ है। इस दिन बुराई पर अच्‍छाई की जीत हुई थी। भगवान विष्‍णु के भक्‍त प्रह्लाद को होलिका की अग्नि भी जला नहीं पाई थी।

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होलिका दहन का मुहूर्त- 21:05 से 11:31 तक

भद्रा पूंछ- 17:23 से 18:24 तक

भद्रा मुख- 18:24 से 20:07 तक

रंगवाली होली- 21 मार्च को खेली जाएगी

पूर्णिमा तिथि आरंभ- 10:44 (20 मार्च)

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 07:12 (21 मार्च)

Web Title: Know the auspicious time and method of Holika Dahan ( Hindi News From Newstimes)


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