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नियमों को ठेंगे पर रख निजी स्कूलों ने बढ़ाई फीस, बिगड़ा अभिभावकों का बजट


NAZO ALI SHEIKH 24/03/2019 12:22:19
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Lucknow. प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में नए सत्र से बढ़ी फीस ने अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। बचत की रकम से फीस भरने के साथ ही लोगों को उधार तक लेना पड़ रहा है। राजाजीपुरम निवासी सर्वेश त्रिपाठी एक निजी कंपनी में काम करते हैं। बीस हजार रुपये वेतन पाने वाले सर्वेश के अनुसार बेटी एक निजी स्कूल में पढ़ती है। सातवीं में फीस इतनी ज्यादा है कि अब दूसरे स्कूल में नाम लिखवाया है। 

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Regarding the rules, private schools have increased fees, impaired guardians budget

फीस में ही 13,500 रुपये खर्च हो गए। कॉपी किताबों के लिए 5000 रुपये और चाहिए। छोटे बेटे की पढ़ाई का भी खर्च है। मजबूरी में भाई से मदद लेनी पड़ी। बीएसएनएल में काम करने वाले प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के दो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। इस बार तीसरे का भी दाखिला करवाया है। प्रदीप के अनुसार स्कूलों ने ट्यूशन फीस में पांच से सात सौ रुपये की बढ़ोतरी की है। 

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Regarding the rules, private schools have increased fees, impaired guardians budget

हालांकि छोटे बेटे के एडमिशन पर करीब तीस हजार रुपये एक साथ खर्च हो गए। कॉपी-किताबें भी महंगी हो गई हैं। बच्चों की फीस जमा करने के लिए तीन महीने पहले से व्यवस्था कर रहा था। दरअसल ज्यादातर स्कूलों ने कंपोजिट फीस में पांच सौ से लेकर एक हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी है।

उप्र पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनिमय) अधिनियम 2018 के अनुसार स्कूल हर साल ऐडमिशन फीस नहीं ले सकते हैं। ऐडमिशन नर्सरी में होने के बाद पांचवीं क्लास में ही दोबारा ऐडमिशन फीस ली जा सकती है।

हालांकि अभिभावकों का आरोप है कि प्रति वर्ष ऐडमिशन फीस वसूली जा रही है। इतना ही नहीं ऐडमिशन फीस की कोई सीमा न होने से भी स्कूल मनमानी वसूली करते हैं। कुछ प्राइवेट स्कूल 20 हजार से 50 हजार तक ऐडमिशन फीस वसूल रहे हैं। दिल्ली पब्लिक स्कूल में नर्सरी से दसवीं तक 30 हजार, सेंट फ्रांसिस में 20 हजार और लामार्ट्स में 50 हजार तक फीस वसूली जा रही है।

Web Title: Regarding the rules, private schools have increased fees, impaired guardians budget ( Hindi News From Newstimes)


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