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लोकसभा चुनाव में नोटा फैक्टर: जानिए, पिछली बार कहां कितना प्रभावी रहा था यह विकल्प


DEEP KRISHAN SHUKLA 25/03/2019 13:08:12
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New Delhi. इलेक्शन में खड़े होने वाले दलीय और निर्दलीय प्रत्याशियों में से कोई भी आपकी पसंद का नहीं है तो इसके लिए नोटा यानि कि 'इनमें से कोई नहीं' का विकल्प बीते लोकसभा चुनाव में पहली बार दिया गया। 2014 के चुनाव में देश के कुल 83.41 करोड़ मतदाताओं में 55.38 करोड़ ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इन मतदाताओं में तकरीबन 60 लाख मतदाता ऐसे थे जिन्हें कोई उम्मीदवार समझ में नहीं आया। नोटा चुनने वाले मतदाताओं की संख्या कुल हुए मतदान का 1.1 फीसदी थी। तमिलनाडु की नीलगिरी सीट पर सबसे अधिक 46,559 वोट तो लक्षद्वीप सीट पर सबसे कम 123 वोट नोटा को पड़े थे।

आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जमकर चला था नोटा

सबसे चौंकाने वाला तथ्य तो यह है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा नोटा का विकल्प आदिवासी क्षेत्रों में देखने को मिला था। सर्वाधिक नोटा विकल्प का चुनाव करने वाली देश की टाप 10 सीटों में 9 सीटें आदिवासी बाहुल्य इलाकों की थीं। खास बात यह है कि इनमें 7 सीटों ऐसी थी जहां पर आदिवासियों की आबादी 50 फीसदी से अधिक थी। 

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10 सीटों में कहां, कितने लोगों ने चुना था नोटा

आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु की नीलगिरी सीट पर 46,559, ओडिशा की नबरंगपुर और कोरापुट सीटों  में क्रमश: 44,408 व 33,232 वोट, छत्तीसगढ की बस्तर में 38,772 वोट, राजस्थान की बांसवाड़ा सीट पर 34,404, छत्तीसगढ के राजनांदगांव, कांकेर व सरगुजा लोकसभा क्षेत्रों में क्रमश: 32,384, 31,917 व 31,104, गुजरात के दाहोद में 32,305, मध्यप्रदेश की रतलाम सीट पर 30,364 वोट नोटा को मिले थे।  

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यूपी और हरियाणा में सबसे कम रहा था नोटा

सबसे कम नोटा का चुनाव करने वाली देश की प्रमुख 10 सीटों में यूपी और हरियाणा की पांच सीटे थीं।   इनमें उत्तर प्रदेश की मथुरा, अमेठी और फर्रुखाबाद और हरियाणा की हिसार और भिवानी सीटें शामिल थी। केन्द्र शासित तीन प्रदेशों के मतदाताओं ने भी नोटा का कम पसंद किया था। 

सबसे कम नोटा चुने जाने वाली 10 सीटें

बीते लोकसभा चुनाव में तमाम लोकसभा सीटें ऐसी भी रहीं थीं जिनमें लोगों ने नोटा के विकल्प का सबसे कम प्रयोग किया था। जिनमें सबसे पहले नंबर पर केन्द्र शासित राज्य की लक्षद्वीप सीट पर मात्र 123 लोगों ने नोटा दबाया था। जम्मू कश्मीर की लद्दाख सीट पर भी महज 1,207 मतदाताओं ने नोटा चुना, दमन और दीव में यह संख्या 1,316 रही थी। अंडमान-निकोबार में 1,564 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था।

हरियाणा की हिसार में यह आंकड़ा 1,645 पर ही ठहर गया था। उत्तर प्रदेश की अमेठी में 1,784 नोटा को वोट मिले थें। आंध्र प्रदेश की अरुणाचल-पश्चिम सीट पर 1,816 लोगों ने इनमें से कोई नहीं का विकल्प चुना था। यूपी की मथुरा में 1,953 तो फर्रूखाबाद में 1,986 मतदाताओं ने नोटा को चुना। हरियाणा की भिवानी-महेन्द्रगढ़ सीट से नोटा का चयन करने वाले मतदाताओं की संख्या 1,994 तक पहुंची थी। 

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293 सीटों पर टॉप-5 में रहा ​था नोटा

बीते लोकसभा चुनाव में नोटा ने गेम चेंजर का काम किया था। मसलन नोटा के वोट अगर मिल जाते तो दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे प्रत्याशियों के समीकरण बदल जाते हैंं। देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में आधे से अधिक सीटें ऐसी थी जहां दलीय और निर्दलीय प्रत्याशियों को पछाड़ कर नोटा ने पांचवे स्थान तक जगह बनाई थी। ऐसी 293 लोकसभा सीटें रहीं​ थीं। ​जबकि 44 सीटें ऐसी भी थीं जहां विनर और रनर के बाद नोटा का ही नंबर रहा। अगर यही नोटा वाले वोट दूसरे नंबर को मिल जाते तो पूरी तस्वीर ही बदल जाती। 

महाराष्ट्र और हरियाणा में दोबारा हुए थे स्थानीय चुनाव

नोटा को सर्वाधिक वोट मिलने पर महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने नवंबर 2018 में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों दोबारा कराने का निर्णय लिया था। आयोग ने नोटा को एक प्रत्याशी मानते हुए यह कहा था कि ऐसे हालातों में अन्य सभी प्रत्याशी अयोग्य माने जाएंगे। हरियाणा में भी इसी तर्ज पर राज्य चुनाव आयोग ने पांच जिलों में नगर निगम चुनाव दोबारा कराने का फैसला लिया था।

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कई दलों से अधिक रह चुका है नोटा का वोट शेयर

नोटा के वोट शेयर की बात करें तो कई बार ऐसी स्थितियां बनी है जब प्रमुख राजनैतिक दलों पर भी नोटा भारी पड़ चुका है। 2018 में छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 85 उम्मीदवार 0.9 फीसदी वोट मिले थे जबकि 2 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा चुना था।

इसी तरह मध्यप्रदेश में नोटा को 1.4 फीसदी वोट मिले थे जबकि सपा 1.3 प्रतिशत वोटों पर ही सिमट गयी थी। राजस्थान के विधानसभा चुनाव में नोटा को 1.3% वोट मिले, जबकि सपा को 0.2%, आप 0.4% और रालोद को 0.3% मिले। 

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Web Title: LOksabha Chunav Me NOTA Factor, Janiye Pichhli Dafa Kahan Kitna Prabhavi Raha Tha yah Vikalp ( Hindi News From Newstimes)


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