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एक बार फिर शुरू हुई गन्ने के सहारे सियासत की वैतरणी पार करने की जोर आजमाइश


DEEP KRISHAN SHUKLA 26/03/2019 11:22:58
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Lucknow. अपनी मिठास के लिए जाना जाने वाला गन्ना 2019 के आम चुनाव में सियासी दलों के लिए कड़ुवा साबित हो सकता है। एक बार फिर से गन्ना किसानों की पीड़ा को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गर्माने लगी है।

Ek Bar Fir Shuru Hui Ganne Ke Sahare Chunavi Vaitarni Par Karne Ki Jor Aajmaish

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने गन्ना किसानों के मुद्दों को लेकर भाजपा की घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे यह तय हो गया है कि मिठास का यह श्रोत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम मुद्दा बन गया है।

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ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि गन्ने के मुद्दे पर किसानों में सभी दलों के प्रति नाराजगी है। जिसके चलते किसान नेता नोटा का राग अलाप रहे हैं। जमीनी तौर पर किसानों से जुड़े इस मुद्दे का भावनात्मक रिश्ता है, जो चुनाव के दौरान खास अहमियत रखता है।

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इसी का नतीजा है कि गन्ना और गन्ना किसानों से जुड़े किसी बयान पर राजनीतिक दल त्वरित प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वर्तमान में यूपी की मौजूदा सरकार भी गन्ना किसानों के मसले पर सक्रिय नजर आ रही है।

इस मुद्दे पर गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा ने एक बयान जारी कर बताया कि गत वर्ष और मौजूदा सत्र में गन्ना किसानों को 58 हजार करोड़ का भुगतान सरकार कर चुकी है।

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2015-16 में 18 हजार करोड़ रुपए और 2017-18 में 35 हजार करोड़ रुपए की गन्ना खरीद हुई थी। उनका कहना है सपा और बसपा सररकारों के समय में गन्ना किसानों के लिए कुछ नहीं किया गया। अब यही गन्ना किसानों को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं।

उधर, भारतीय किसान यूनियन के राष्टीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसी भी सरकार में गन्ना किसानों का भुगतान समय से नहीं किया।

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उन्होंने यूनियन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि यह किसान की अपनी राय कि वह अपना वोट किसे देता है। 

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गन्ना किसान है केन्द्र से लेकर राज्य की सत्ता की धुरी

देश की राजधानी से लेकर प्रदेश की राजधानी तक सत्ता में काबिज होने के लिए राजनीतिक दल गन्ना किसानों के सहारे ही चुनावी वैतरणी पार करने की रूपरेखा बनाते हैं। मसलन यह कहा जाए कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान राजनीति की वह धुरी है, जिसके इर्द गिर्द सभी दल चक्कर लगाते हैं। इस मुद्दे को लेकर किसान यूनियन बड़ा आंदोलन कर चुकी है। वहीं, कैराना के उपचुनाव में 'जिन्ना नहीं गन्ना' का नारा देकर आरएलडी ने बाजी मार ली थी। 

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ये है ताजा हालात 

सूबे की योगी सरकार ने दावा किया है कि मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली जोन में 6 हजार करोड़ से अधिक बकाए का भुगतान गन्ना किसानों का हो चुका है। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष के जो आंकड़े हैं, वह चौकाने वाले हैं। विपक्ष की मानें तो मेरठ में 700 करोड़, शामली में 552 करोड़, बिजनौर में 650 करोड़, मुजफ्फरनगर में 1100 करोड़, बागपत में 400 करोड़ और सहारनपुर में 577 करोड़ रुपये गन्ना किसानों बकाया है। 

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प्रदेश की चीनी मिलों पर एक नजर

बता दें कि उत्तर प्रदेश में निजी और सरकारी क्षेत्र की कुल मिलाकर 235 चीनी मिलें हैं। चीनी मिल निगम की 23 मिलें हैं जबकि सहकारी चीनी मिलों की संख्या 94 है। इसमें से प्रदेश में 118 चीनी मिलें निजी क्षेत्रों की है। 

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Web Title: Ek Bar Fir Shuru Hui Ganne Ke Sahare Chunavi Vaitarni Par Karne Ki Jor Aajmaish ( Hindi News From Newstimes)


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