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नवरात्र का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलती है भय से मुक्ति 


ARCHANA PANDEY 08/04/2019 09:19:06
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Lucknow. आज नवरात्र का तीसरा दिन है। इस दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा स्वरूप की उपासना की जाती है। मां चंद्रघंटा को इसलिए चंद्रघंटा कहा जाता है, क्योंकि मां के सर पर घंटे के आकार का चन्द्रमा है। मां दसों हाथों में अस्त्र-शस्त्र के साथ युद्ध की मुद्रा है। मां चंद्रघंटा तंत्र साधना में मणिपुर चक्र को नियंत्रित करती हैं। ज्योतिष में इनका संबंध मंगल ग्रह से है। नवरात्रि का ये दिन भय से मुक्ति और अपार साहस प्राप्त करने वाला होता है। 

On the third day of Navaratri, worship of mother Chandhghanta comes from the fear of fear

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि 

मां चंद्रघंटा को लाल रंग अति प्रिय है इसलिए मां की पूजा करते समय हो सके तो लाल कपड़े पहनने चाहिए। मां को को लाल पुष्प, रक्त चन्दन और लाल चुनरी समर्पित करनी चाहिए। विधि से पूजा करने से मणिपुर चक्र मजबूत होता है और भय का नाश होता है।

बता दें कि अगर  पूजा से कुछ अद्भुत सिद्धियों जैसी अनुभूति होती है, तो उस पर ध्यान न देकर आगे साधना करते रहनी चाहिए।  पूजा के बाद इस मंत्र का जाप जरूर करें।

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

On the third day of Navaratri, worship of mother Chandhghanta comes from the fear of fear

मंगल को मजबूत बनाने के लिए पूजा 

आपकी कुंडली में अगर मंगल कमजोर है या मंगल दोष है तो उसके निवारण के लिए आप पूजा के दौरान लाल रंग के कपड़े ही पहने। मां को लाल फूल, ताम्बे का सिक्का या ताम्बे की वस्तु चढ़ाएं, हलवा या मेवे का भोग लगाएं और मां के मंगल के मूल मंत्र "ॐ अँ अंगारकाय नमः" का जाप करें।

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इसके बाद मां को अर्पित किये गए ताम्बे के सिक्के को अपने पास रख लें। या फिर सिक्के में छेद करवाकर लाल धागे में गले में धारण कर लें। 

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