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एलएचबी कोच बने सुरक्षा कवच, बची भीषण तबाही


DEEP KRISHAN SHUKLA 20/04/2019 11:15:10
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Kanpur. पूर्वा एक्सप्रेस डिरेल होने के हादसे में घटना स्थल के हालात देखने वाले लोग सिहर उठे। जिस कदर रेलवे ट्रैक और बोगियों की स्थिति थी उस हिसाब से लोगों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था कि हादसे में भीषण जनहानि हुई होगी। इन अनुमानों पर जब अधिकारियों के बयान आने शुरू हुए तो अचरज में पड़ गए। राहत कार्य में लगे रेलवे अफसरों और इंजिनियरों की माने तो एलबीएच कोच के बजाए सामान्य कोच होते तो भयानक जनहानि होती। आइए आपको बताते है कि यह एलएचबी कोच क्या होते हैं और इनकी मजबूती का राज क्या है। 

LHB coach security cover, survivors devastation
भारत में बढ़ते रेल हादसों में होने वाली जनहानि को कम करने के लिए भारतीय रेलवे ने लिंक होफमान बुश (एलएचबी) डिजाइन के कोच चलाने का निर्णय लिया है। अब रेलवे ने पुराने आईसीएफ डिजाइन कोच का उत्पादन बंद करने का भी फैसला लिया है। 
एलएचबी डिजाइन वाले कोच की खासियत यह होती है कि ये वजन में बेहद हल्के होते हैं। इसके अलावा इनमें बेहतर ढुलाई के अलावा तेज गति में दौड़ने की क्षमता भी है। भारतीय रेलवे इन सुविधाओं के अलावा इस डिजाइन के कोच में बेहतर सुरक्षा सुविधाओं में बढ़ोतरी की है। 

LHB coach security cover, survivors devastation
सबसे बड़ी खूबी यह है कि एलएचबी कोच एंटी-क्लाइम्बिंग की विशेषता से लैस है। मसलन हादसे के दौरान ये कोच एक के ऊपर दूसरी कर नहीं चढ़ती है जिससे इनमें सवार यात्री सुरक्षित रहते है। 

LHB coach security cover, survivors devastation
कानपुर के रूमा में पूर्वा एक्सप्रेस के डिरेल होने की घटना ने यह बात साबित कर दी है। हादसे के दौरान ट्रेन की स्पीड 127 किलोमीटर प्रति घंटा थी। 
जिस गति में ट्रेन की बोगियां डिरेल होकर पलटी है यदि इसमे एलएचबी के बजाए सामान्य कोच होते तो हाहाकार मच जाता। 

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