केपटाउन जल संकट भारत के लिए भी सबक!


RAJNISH KUMAR 03/05/2019 18:15 PM
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Lucknow. दुनिया के खूबसूरत शहरों में शुमार दक्षिण अफ्रीका का केपटाउन पीने के पानी के भयंकर संकट से जूझ रहा है, यहां से लोग पलायन करने लगे हैं। ये स्थिति सिर्फ केपटाउन की नहीं है, ब्राजील के साओपोलो, इंडोनेशिया के जकार्ता के अलावा लॉस एंजेलिस (अमेरिका), कराची (पाकिस्तान), नैरोबी (केन्या), ब्रिसबेन (ऑस्ट्रेलिया) समेत भारत के तमाम क्षेत्रों में जलसंकट का भीषण खतरा मंडरा रहा है। इस समस्या को लेकर सरकारों की ओर से कोई खास रणनीति नहीं बनाई गई, जो काफी चिंता का विषय है।

Cape Town Water  crisis India ke liye sabak

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो केपटाउन में ये स्थिति है कि स्थानीय प्रशासन प्रति व्यक्ति सिर्फ 50 लीटर की पानी ही मुहैया करा रहा है। इस 50 लीटर पानी में ही नहाने, खाने से लेकर कपड़े साफ करना शामिल है। ऐसे में आप की अंदाजा लगा सकते हैं कि स्थिति कितनी भयावह है। केपटाउन का भीषण जल संकट विश्व के तमाम देशों के लिए सबक है। भारत के भी तमाम शहरों में जल संकट बना हुआ है। 

शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल संकट है। गर्मी शुरू होते ही, भूजल स्तर में भारी गिरावट के साथ पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। वर्तमान में देश के कई क्षेत्रों में भूजल के अति दोहन के कारण इसका स्तर 50 फीट से भी नीचे गिर गया है। मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग में भूजल का स्तर 400 फीट, उज्जैन संभाग में 500 फीट तथा सागर संभाग में 600 फीट नीचे पहुँच गया है।

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महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश, उड़ीसा, मध्यप्रदेश के मालवा और उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड आदि क्षेत्रों में टैंकर द्वारा पेयजल पहुंचाया जाता है। पेयजल को लेकर मोहल्ले-मोहल्ले, गांव-गांव, घर-घर में लोगों को आपस में झगड़ते देखा जा सकता है। स्थिति ऐसी हो जाती है कि कहीं–कहीं महिलाओं को मीलों दूर से पसीना बहाते हुए पानी ढोना पड़ता है, तो कहीं सूखे के कारण गांव के गांव खाली होने लगते हैं।

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अंतरराष्ट्रीय संस्था वाटरऐड की 'द स्टेट ऑफ वल्ड्र्स वाटर' नामक रिपोर्ट में बताया गया कि साफ पानी तक प्रति व्यक्ति पहुंच के मामले में भारत सबसे नीचे है और करीब 16.3 करोड़ भारतीय इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में भी यदि केंद्र और प्रदेश की सरकारें अलर्ट नहीं हुई हैं तो अपने वाले दिनों में देश की स्थिति केपटाउन जैसी न हो जाए, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा।

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भारत में चुनावी दौर है, ऐसे में सवाल उठता है कि राजनीतिक दल तमाम अपने घोषणापत्रों में तमाम तरह के लोकलुभावन दावे और वादे करते हैं, लेकिन पानी की समस्या को दूरे करने के लिए कोई बात नहीं करता है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में वादा कर रहे हैं कि उनकी सरकार जल मंत्रालय का गठन करेगी, जिससे पानी की समस्या दूर हो सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या जल मंत्रालय के गठन से ही पानी का संकट दूर हो जाएगा। इस समस्या को लेकर सरकारों की कोई स्पष्ट नीति नहीं दिखाई दे रही है। 

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सरकार ही नहीं आम जन को भी पानी की किल्लत के बारे में सोचना होगा और जल संचयन को लेकर कदम उठाने होंगे। पानी को खराब न करें, किसानों को भी सिंचाई के लिए नई तकनीकि का प्रयोग करना चाहिए। किसानों को ड्रिप विधि से सिंचाई को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ जल संरक्षण को लेकर हमें रूफ रेन वॉटर हार्वेस्टिंग विधि का भी प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा सड़कों पर पानी न बहायें सहित तमाम कदम उठाने होंगे। यदि हम लोग अभी भी सचेत नहीं हुए तो आने वाले दिनों में केपटाउन जैसी स्थिति से गुजरना होगा।

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Web Title: Cape Town Water crisis India ke liye sabak ( Hindi News From Newstimes)


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