मुख्य समाचार
UPTET : हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त, 1 लाख से ज्यादा शिक्षकों को मिली राहत अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर बोला करारा हमला, कहा- नौजवानों की जिन्दगी में ... फतेहपुर में प्रतिबंधित मांस मिलने पर बवाल, मदरसे पर पथराव साक्षी मामले पर मालिनी अवस्थी का बड़ा बयान, लड़कियां जीवन साथी चुनें लेकिन... यूपी पुलिस को मिली बड़ी सफलता, दो इनामी बदमाश किए ढेर वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल पर लगाए गम्भीर आरोप, मचा घमासान अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी, अचानक युवक की खुली आंखे और फिर जो हुआ... सरकारी आवास के मोह पॉश में जकड़े दो पूर्व मंत्रियों को गहलोत सरकार ने दिया जुर्माने का झटका सलमान संग फिल्मों में डेब्यू कर सुपरस्टार बनीं कटरीना का नहीं है कोई क्राइम रिकॉर्ड 149 साल बाद बन रहा गुरू पूर्णिमा पर चंद्र दुर्लभ योग सपा नेता अखिलेश यादव की गोली मारकर हत्या, सियासत में भूचाल
 

प्रदूषण की वजह से विश्वभर में दमा के मरीजों की बढ़ रही संख्या


ASTHA SRIVASTAVA 07/05/2019 19:22:57
28 Views

LUCKNOW. विश्व अस्थमा दिवस पर मंगलवार को राजधानी में डॉ. वेद प्रकाश की ओऱ से जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि सम्पूर्ण विश्व में अस्थमा के विषय में जागरूकता बढाने के लिए प्रतिवर्ष मई माह के प्रथम मंगलवार को मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस सत मई को मनाया जा रहा है। प्रदूषण की वजह से विश्वभर में दमा के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। who के अनुसार, दुनियाभर में 235 मिलियन लोग दमा से प्रभावित हैं। विश्व के 10 प्रतिशत (लगभग 15-20 मिलियन) और भारत की कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत आबादी दमे से पीड़ित है। 5 से 11 वर्ष की आयु के लगभग 10-15 बच्चों में अस्थमा पाया जा रहा है।

Organizing an awareness program on World Asthma Day

बता दें कि अस्थमा के प्रमुख लक्षण हैं रोगी की श्वांस फूलना, खांसी आना, मरीज के सीने में कसाव व दर्द महसूस होना, बच्चो में अस्थमा का महत्वपूर्ण लक्षण सुबह या रात में खांसी/श्वांस फूलना/पसली चलना है। इलाज के बाद भी यदि खांसी/श्वांस फूलना लगातार बना रहे तो यह भी अस्थमा का लक्षण हो सकता है। 

अस्थमा की बीमारी में फेफड़ों की श्वांस की नलियों में सूजन आ जाती है। सूजन के कारण श्वास की नलियां सिकुड जाती हैं। अस्थमा के रोगियों के फेफड़े अतिसंवेदनशील होते हैं। इस बीमारी के अटैक के लिए जिम्मेदार कारक-  परागकण, फंफूदी, धूल, कण, ठंड/ठंडी हवा, तिलचटटे, घर में साफ सफाई के समय उड़ने वाले कण, घरों मे बिछाए जाने वाले गद्दस, सोफा, कार्पेट में पाए जाने वाले किटाणु 'dust miles', पालतू जानवरों के स्पर्श, सिगरेट का धुंआ, हवा का प्रदूषण, भावनात्मक तनाव शामिल है।

डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि अतिसंवेदनशील फेफड़े उपरोक्त कारकों के सम्पर्क में आने से अस्थमा का अटैक होता है। उपरोक्त में से कोई भी कारण एलर्जी का कारण बन सकता है और यही एलर्जी दमा का कारण बनती है। उन्होंने बताया कि कम वजन के पैदा होने वाले बच्चों, ऑपरेशन से होने वाले बच्चों में अस्थमा होने का खतरा कई गुना होता है।

 

Organizing an awareness program on World Asthma Day

 

इस बीमारी से बचाव के लिए एलर्जन के सम्पर्क में न आने के लिये यथासम्भव प्रयास किया जाना चाहिये। अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। अस्थमा को पूर्ण रूप से नियंत्रित करके सक्रिय एवं सामान्य जिंदगी जी सकते है। 

अनुसंधानों से यह तथ्य सिद्ध हो चुका है कि सूजन कम करने वाली दवाएं एवं श्वांस नलियों से फैलाने वाली दवाओं से अस्थमा पर नियंत्रण एवं अस्थमा अटैक को रोका जा सकता है। दवांये श्वांस की नली की सिकुड़न खत्म करने वाली दवाओं की तुलना में अधिक कारगर हैं। इन्हें लम्बे समय तक इनहेलेशनल थिरेपी के रूप में लिया जा सकता है। आज के समय में इंहेलेशनल थिरेपी सबसे सुरक्षित एवं बेहतरीन तकनीकि है। इसमें दवाईयॉं सीधे फेफड़ों मे पहुंचती हैं और तुरंत असर करती हैं। 

इनहेलर के जरिये दवा लेने से शरीर के अन्य अंगों पर औषधियाँ के दुषप्रभाव से बचा जा सकता है। इनहेलर के प्रयोग के पश्चात् रोगी को अपने मुंह को पानी से अच्छी तरह से साफ करना चाहिए, जिससे मुंह में रह गयी दवा रोगी को नुकसान न पहुंचा सके।

नेबुलाइजर मशीन का प्रयोग केवल छोटे बच्चों अथवा गम्भीर रोगियों मे किया जाना चाहिये क्योकि नेबुलाइजर के नियमित प्रयोग से उसकी ट्यूब को साफ ना किया जाये तो इस स्थिति में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

 

Organizing an awareness program on World Asthma Day

 

इस युग में यह एक उन्नत विधा है, जिसमें अस्थमा के गम्भीर रोगियों में जिनमें श्वांस की नली की सिकाई की जाती है। सिकाई से अस्थमा रोगियों की श्वांस नली की मोटी मासपेसियों की परत पतली हो जाती है, जिससे गम्भीर दमा से पीड़ित मरीजों को फायदा पहुंचता है। 

इम्यूनोथैरेपी भी एलर्जी के मरीजों का इलाज करने की अन्य विधा है। इम्यूनोथैरेपी में अस्थमा करने वाले एलर्जन को बढ़ती हुई मात्रा में देकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है। एलर्जी के मरीजों में इम्यूनोथेरिपी द्वारा anti inflamatory एवं broncodilator दवाओं की मात्रा को घटाने मे मदद मिलती है।

आम जनमानस की गलत धारण

रोगी एवं आम जनमानस की यह गलत धारणा है कि इनहेलर का उपयोग इस बीमारी का अंतिम इलाज है, इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिये और इसकी आदत पड़ जाती है। सच यह है कि इनहेलर का उपयोग यह एक अच्छी आदत है और इसका प्रयोग प्रारम्भिक अवस्था से ही किया जाना चाहिये।

 

Organizing an awareness program on World Asthma Day

के.जी.एम.यू. के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा सप्ताह के हर सोमवार को अस्थमा एवं एलर्जी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। इस क्लीनिक में अस्थमा के सामान्य एंव गम्भीर रोगियो का इलाज किया जाता है। अति गम्भीर रोगियो के लिये भर्ती, आईसीयू, आक्सीजन, न्यूबलाइजेसन, बाईपैप (non-invasive ventilator) वेंण्टीलेटर इत्यादि की सुविधाएं अत्यंत कम दरों पर प्रदान की जा रही है।

Web Title: Organizing an awareness program on World Asthma Day ( Hindi News From Newstimes)


अब पाइए अपने शहर लखनऊ की खबरे (Lucknow News in Hindi) सबसे पहले Newstimes वेबसाइट पर और रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें न्यूजटाइम्स की हिंदी न्यूज़ ऐप एंड्राइड (Hindi News App)


कमेंट करें

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपकी प्रतिक्रिया