यूपी का एक अपराधी जिसने ले ली सीएम की सुपारी, गर्लफ्रेंड के चक्कर में हो गया एनकाउंटर


GAURAV SHUKLA 14/05/2019 13:31:47
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Lucknow. 1997-98 के दौर में यूपी में एक ही नाम का चर्चा चारों ओर चलता था। वह नाम कोई और नहीं बल्कि 25-26 साल का एक शार्प शूटर पूर्व यूपी के गोरखपुर का सुपारी किलर श्री प्रकाश शुक्ला का था। उस दौर में श्री प्रकाश शुक्ला के पास मौजूद एके-47 का खौफ खाकी भी खाती थी और श्री प्रकाश भीड़-भाड़ में सरेआम उसके इस्तेमाल में कोई भी गुरेज नहीं करता था। 

encounter story of shree prakash shukla

बता दें कि गोरखपुर के मामखोर गांव के रहने वाले श्री प्रकाश के पिता एक अध्यापक थे। बचपन से ही श्रीप्रकाश को पहलवानी का शौख था और उसने लोकल अखाड़ों में काफी नाम कमाया हुआ था। श्री प्रकाश का नाम पुलिस इतिहास में पहली बार उस दौरान आया जब वह महज 20 साल का था। 1993 के दौर में राकेश तिवारी नाम के एक युवक ने श्री प्रकाश की बहन को देख सीटी बजा दी। इसके बाद श्रीप्रकाश ने उसे मार दिया औऱ बैंकॉक निकल गया। जब श्री प्रकाश वापस आया तो बिहार के मोकामा में उसे गॉडफादर सूरजभान मिल गया। धीरे-धीरे कदम दर कदम बढ़ते हुए श्रीप्रकाश ने यूपी, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल औऱ नेपाल में गैर कानूनी धंधे शुरु कर दिये। फिर फिरौती के लिए किडनैपिंग, मार्डर, सुपारी, ड्रग्स औऱ तमाम धंधे भी श्री प्रकाश से ज्यादा दिनों तक दूर न रह सके।

अंदाजन उसने तकरीबन 20 से अधिक लोगों की जान ली। मीडिया रिपोर्टस बताती है श्री प्रकाश ने उस दौरान हजरतगंज से स्टेशन की ओऱ जाने वाली सड़क पर स्थित दीप होटल में ही घुसकर दो लोगों को गोलियों से भून डाला। इस घटना के दो दिन बाद ही उसने दवा व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी। साथ ही एक करोड़ की फिरौती के लिए उसके बेटे का अपहरण कर लिया। हालांकि बाद में बेटे को मोकामा बिहार से रिहा करवा लिया गया। 

सरेआम विधायक को गोलियों से भूना 

श्री प्रकाश क्राइम की दुनिया का कितना बड़ा बादशाह था इसका अंदाजा इन घटनाओं से भी लगाया जा सकता है कि 1997 के दौर में ही उसने महाराजगंज के लक्ष्मीपुर से विधायक वीरेंद्र शाही को गोलीयों से भून दिया।

इसके बाद श्री प्रकाश की हिट लिस्ट में दूसरा नाम कल्याण सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी का था। वह चुल्लूपार विधानसभा सीट से 15 सालों से विधायक थे। अचानक श्री प्रकाश ने तय किया कि उसे चिल्लूपार विधानसभा सीट चाहिए जिसके बाद उसने बहुत ही कम समय में कई दुश्मन बना लिये। 

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पुलिस के साथ हुई श्री प्रकाश की मुठभेड़ 
श्री प्रकाश के साथ पुलिस का पहला एनकाउंटर 9 सितंबर 1997 को हुआ। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक श्री प्रकाश बाल कटवाने के लिए अपने साथियों के साथ हजरतगंज जनपथ मार्केट स्थित सैलून में आने वाला था। जिसके बाद पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी की।

हालांकि यह ऑपरेशन फेल हो गया। ऑपरेशन में श्री प्रकाश ने दरोगा आर के सिंह को गोली मार दी। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार उस दौरान राजधानी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे अरुण कुमार बताते हैं कि हमें दरोगा आर के सिंह की हत्या हमारे लिए नाकाबिल बरदाश्त थी। बता दें कि अरुण कुमार ही एसटीएफ के पहले एसएसपी रहें। 

ले ली मुख्यमंत्री की सुपारी 

श्री प्रकाश को लेकर पुलिस ने उस दौरान एक्शन का मूड बना लिया जब उसने यूपी के तत्कालीन सीएम की सुपारी ले ली। पूरब से पश्चिम रेलवे के तकरीबन सभी ठेकों पर श्रीप्रकाश का एकछत्र राज्य था।

बिहार के मंत्री के कत्ल का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि इसी बीच पुलिस को जानकारी मिली की श्री प्रकाश ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुपारी ले ली है। 6 करोड़ की यह सुपारी की खबर पुलिस महकमें पर बम गिराने जैसी थी।  

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शुक्ला के लिए बनी एसटीएफ 

ताबड़तोड़ अपराध के जरिए पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके श्री प्रकाश के खत्में के लिए पुलिस ने पूरे तौर से मन बना लिया। इसके लिए सचिवालय में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी स्तर की बैठक हुई।

जिसके बाद अपराधियों से निपटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाने की योजना पर विचार किया गया। इसके लिए एडीजी अजय राज शर्मा ने 4 मई 1998 को राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को छांट कर एसटीएफ बनाई। गठन के बाद एसटीएफ का पहला टास्ट श्री प्रकाश जिंदा या मुर्दा था। 

ऐसे पकड़ा गया श्री प्रकाश 

एसटीएफ के लिए श्री प्रकाश को पकड़ने में सबसे बड़ी कड़ी उसकी गर्लफ्रैंड साबित हुई। श्री प्रकाश अफनी गर्लफ्रेंड से खूब बाते करता था। एसटीएफ ने उसके मोबाईल को सर्वलांस पर लिया। लेकिन जैसे ही श्री प्रकाश को शक हुआ उसने पीसीओ से बात करना शुरु कर दिया। हालांकि वह इस बात से अनजान था कि उसकी गर्लफ्रेंड का नंबर भी सर्विलांस पर है। सर्विलांस के जरिए पता चला कि श्री प्रकाश गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में पीसीओ पर है। जिसके बाद एसटीएफ टीम तुरंत रवाना हुई और चुपचाप पीछा करते हुए श्री प्रकाश की गाड़ी को सूनसान इलाके में ले गयी। अचानक ओवरटेक कर पहले श्री प्रकाश को सरेंडर करने को कहा गया लेकिन जब उसने फायरिंग शुरु की तो पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया। 

 

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Web Title: encounter story of shree prakash shukla ( Hindi News From Newstimes)


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