एक व्यक्ति व्यवस्था नहीं बदल सकता,व्यवस्था व्यक्ति को बदल देती है


LEKHRAM MAURYA 17/05/2019 23:58:51
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 A person can not change the system, the system changes the person

LUCKNOW. कोई एक व्यक्ति किसी व्यक्ति को नहीं बदल सकता, एक व्यक्ति व्यवस्था नहीं बदल सकता, यह सच है। जबकि व्यवस्था व्यक्ति को बदल देती है। आपकी सफलता से सभी खुश नहीं हो सकते लेकिन गुरूजन और माता पिता हमेशा खुश होगें यह ब्रम्ह वाक्य मान लो। पड़ोसी भाई और दोस्त जरूरी नहीं खुश हो। छात्रों को लक्ष्य नहीं बदलना चाहिए, साधन बदल सकते हैं। यह विचार शुक्रवार को आर्यकुल ग्रुप आफ कॉलेजेज के परिसर में यूनाइट फाउन्डेशन द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सोशल रिफार्म पर काम करने वाले प्रताप चन्द ने व्यक्त किये। उन्होने कहा कि हम अपने को राजनैतिक नहीं मानते जबकि वोट देने वाला हर व्यक्ति राजनैतिक होता है। उन्होने कहा कि भविष्य बनाने और बदलने के लिए व्यक्ति का राजनैतिक होना जरूरी है। क्योंकि हम जिनको चुनकर भेजते हैं वे अपने लिए सब कुछ करते हैं पर हमारे लिए कुछ नहीं करते। गाड़ी के लिए 8 परसेन्ट, घर के लिए 10 परसेन्ट पर लोन मिलेगा परन्तु शिक्षा के लिए 13 परसेन्ट पर लोन मिलेगा। उन्होने कहा कि हमारे देश में फावड़ा चलाने वाले के लिए 100 दिन के रोजगार की गारन्टी है लेकिन शिक्षित रोजगार की कोई गारन्टी नहीं है। हमारे देश में चुना हुआ राजतंत्र इस तरह के काम करता है, कि हम उससे सवाल भी नहीं पूछ सकते। पूरी दुनिया में राजा की एक ही परिभाषा है जो कानून बना सके, कानून को लागू करा सके, और यह देख सके कि उसका सही पालन हो रहा है कि नहीं। प्रजातंत्र तो आज तक लागू ही नहीं हो सका।

 

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माता पिता के संघर्षों,संसाधनों का सदुपयोग करें 
इससे पूर्व अधिवक्ता योगेश मिश्र ने कहा कि सभी छात्रों को अपने माता पिता के संघर्षों,संसाधनों का सही सदुपयोग करने पर विचार करना चाहिए। सभी को अपने लक्ष्य के प्रति गम्भीर होना चाहिए। जिनकी कोई रणनीति नहीं है। जिनके पास सूचनाएं नहीं हैं। वह लक्ष्य निर्धारित नहीं कर सकते। गोवंशीय पशुओं की तश्करी और गोवध निवारण अधिनियम को लागू करने में उनका सबसे बड़ा योगदान है। श्री मिश्र ने कहा कि उनके स्थापित किए गए सनातन ज्ञानपीठ की शाखाएं 18 देशों के अलावा भारत में भी 250 शाखाएं हैं। तुलसीदास के शब्दकोष मे 12 लाख 27 हजार शब्द हैं जबकि विलियम सेक्सपियर के शब्दकोष में 9 लाख शब्द थे। विश्व की सबसे संपन्न भाषा संस्कृत है। इसका अब तक का शब्दकोष 102 अरब शब्दों का हैं जो बढ़कर 150 अरब तक पहुंच सकता है।

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कम्पटीशन कोई हौवा या बोझ नहीं 
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए न्यूजटाइम्स पोस्ट के वरिष्ठ समाचार सम्पादक ने कहा कि कम्पटीशन कोई हौवा नहीं है। आप को संकल्प लेकर बिना किसी हिचक के आगे आकर कम्पटीशन का स्वागत करना चाहिए । प्रतिस्पर्धा से ​​ही समाज में अच्छे व्यक्तियों का चयन होता है। लक्ष्य तय करके आप अपना भविष्य तय करते हैं। आप उसे बोझ मत समझिए। 

छात्रों को लक्ष्य स्वयं तय करना चाहिए
यूनाइट फाउन्डेशन के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि लक्ष्य स्वयं तय करें लेकिन सहायता माता पिता से अवश्य लें। छात्रों का लक्ष्य से भटकाव नहीं होना चाहिए। पहले परिवार का निर्माण करें, उसके बाद समाज का निर्माण करें, देश का निर्माण स्वयं हो जाएगा। उन्होने कहा पंचायतों के बिना भी देश और प्रदेश का विकास नहीं हो सकता,क्योंकि हमारा देश गावों में बसता है इसलिए गावों के विषय में जानना जरूरी है। हमेशा वरिष्ठजनों के अनुभवों का लाभ उठाएं।

7 छात्रों ने अपने भविष्य का लिया संकल्प
कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित न्यूजटाइम्स नेटवर्क के स्थानीय सम्पादक राधेश्याम दीक्षित ने युवाओं के भविश्य को तय करने के लिए उपस्थित छात्रों में से उनकी इच्छानुसार आगे आने का आग्रह किया और उत्साह बढ़ाने का भी प्रयास किया। जिससे 7 उत्साही छात्र समाज में आगे आकर काम करने का संकल्प लिया। इन छात्रों से उनके भविष्य के सपनों को भी जानने का प्रयास किया। और उनका उत्साहवर्धन किया। इनमें मो0 आजम,शिखा सिंह चौहान, मुकीद अहमद, शुभम चौरसिया, अखिलेश प्रताप सिंह,तारिक अ​हमद, आशुतोष द्विवेदी प्रमुख थे। 

 A person can not change the system, the system changes the person

 

युवाओं के लिए भविष्य का मंच तय करेगा यूनाइट फाउन्डेशन
आर्यकुल ग्रुप आफ कॉलेजेज लखनऊ के निदेशक सशक्त सिंह ने कहा कि यहां उपस्थित विद्वानों ने हमारे कालेज के छात्रों को ज्ञान और मार्ग दर्शन दिया और श्री दीक्षित जी ने जो विचार दिया। वह बहुत ही आवश्यक है। उन्होने कहा कि यूनाइट फाउन्डेशन हमारे छात्रों को किसी भी प्रकार का सहयोग देने के लिए जो वादा किया है। उसमें मैं भविष्य में और अधिक सहयोग करने का प्रयास करूंगा। उन्होने कहा कि आपके दिशा निर्देश पर हम छात्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप उनके लिए मंच प्रदान करने का काम करेंगे।
इस विद्यालय के 40 छात्र सरकारी नौकरी में जा चुके हैं और 15—20 छात्र और जाने वाले हैं। 
श्री सिंह ने कार्यक्रम के संयोजक डा.अ​रविन्द पाण्डेय, कालेज के प्रधानाचार्य दुर्गेशमणि त्रिपाठी, सहायक संपादक धर्मेन्द्र त्रिपाठी,सहित सभी आगन्तुकों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन पूजा कौशिक ने किया।
 


 

 

 

 

 

 

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