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पुण्यतिथि आज : इस तरह हुई थी राजीव गांधी की हत्या 


GAURAV SHUKLA 21/05/2019 11:22:20
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Lucknow. 21 मई की तारीख इतिहास के पन्नों में उस दर्दनाक शाम के नाम पर दर्ज है जब देश ने एक बड़े नेता को समय से पहले ही खो दिया। इसे महज इत्तेफाक ही समझा जाएगा कि राजीव गांधी की इस बार की पुण्यतिथि उस दौरान आई है जब सातों चरण के चुनाव समाप्त हो चुके हैं। पुण्यतिथि के साथ चुनाव का जिक्र होना इसलिए लाजमी है क्योंकि शायद यह पहला वह चुनाव है जिसमें राजीव गांधी के ऊपर तमाम तरह के आरोपों की झड़ी लगी होगी। हालांकि इन लगे आरोपों का जवाब कांग्रेस के साथ ही विपक्षी पार्टियों द्वारा भी समय समय पर दिया जाता रहा। 

is trah hui rajeev ki hatay
21 मई, 1991 को ही मद्रास से तकरीबन 30 मील दूर श्रीपेरमुदूर में राजीव की मृत्यु उस दौरान आत्मघाती बम हमले में हुई थी जब वह चुनावी रैली को संबोधित करने जा रहे थे।

बता दें कि 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव को पीएम पद की शपथ दिलाई गयी थी और कुछ दिन बाद ही उन्हें पार्टी का नेता चुना गया था। राजीव ने अपने प्रधानमंत्री काल में श्रीलंका में शांति प्रयासों के लिए भारतीय सैन्य टुकड़ियों को वहां भेजा था। जिसके चलते ही वह लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ऐलम(लिट्टे) के निशाने पर आ गये थे। तमिलनाडू के श्रीपेरमबुटूर में उन्हें उस वक्त बम से उड़ाया गया था जब वह रैली को संबोधित करने जा रहे थे।

21 मई 1991 की रात जब राहुल कार की अगली सी पर बैठ रैली स्थल तक पहुंचे तो वहां उतरते ही उनका भव्य स्वागत हुआ। हालांकि रात तकरीबन 10 बजकर 10 मिनट पर ही जब मंच की ओर बढ़ते हुए जब एक आत्मघाती महिला ने राजीव को माला पहनाना चाही तो मौजूद सब इंस्पेक्टर अनुसुइया ने उसे रोक लिया।

लेकिन राजीव के कहने पर ही उसे आगे बढ़ने दिया गया। मनु जैसे ही राजीव को माला पहनाकर उनके पैर छूने के लिए नीचे झुकी तो उसने कमर से बंधे बम का बटन दबा दिया। बटन दबते ही हुए जोरदार धमाके के बाद राजीव की जान चली गयी। 

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Web Title: is trah hui rajeev ki hatay ( Hindi News From Newstimes)


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