सुप्रीम कोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने दिया विपक्ष को जोर का झटका, कहा...


NAZO ALI SHEIKH 22/05/2019 09:33 AM
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New Delhi. लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले आए एक्जिट पोल ने विपक्षियों की नींद उड़ा दी है। वहीं, विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट के बाद चुनाव आयोग से भी झटका लगा है। वीवीपैट के ईवीएम से 100 फीसदी मिलान की मांग को सुप्रीम कोर्ट मंगलवार के दिन फिर से खारिज कर दिया। वहीं उत्तर प्रदेश में ईवीएम की सुरक्षा को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों को भी चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है दोनों तरफ से मिले इस जोरदार झटके के बाद ईवीएम की सुरक्षा खुद विपक्ष अपने तरीकों से कर रहा है। 

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After the Supreme Court, the Election Commission gave a lot of shock to the opposition

बता दें कि उत्तर प्रदेश के चार जिलों में ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल विपक्ष ने उठाए थे। चुनाव आयोग ने ईवीएम सुरक्षा को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब में मंगलवार को साफ कर दिया कि गाजीपुर, चंदौली, डुमरियागंज और झांसी में ईवीएम को लेकर जो विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए वो असल तथ्यों से परे है। जिन ईवीएम का मतदान में इस्तेमाल हुआ है वो पूरी तरह सुरक्षित हैं। दरअसल, मंगलवार को उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो वायरल कर दिए गए थे, जिसमें कथित रूप से ईवीएम हटाए जाने का दृश्य दिखाया गया था। इसे लेकर कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए थे।

याचिका को बताया 'बकवास'

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 100 फीसदी वीवीपैट पर्चियों की जांच किए जाने को लेकर डाली गई याचिका पर सुनवाई की कोर्ट ने याचिका को बकवास बताते हुए कहा कि ऐसी याचिकाओं को बार बार नहीं सुना जा सकता। चेन्नई के एनजीओ टेक फॉर ऑल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि तकनीकी तौर पर  वीवीपैट से जुड़ी ईवीएम नहीं हैं। 

After the Supreme Court, the Election Commission gave a lot of shock to the opposition

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में 100 फीसदी वीवीपैट पर्चियों की जांच किए जाने को लेकर डाली गई याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका को बकवास बताते हुए कहा कि ऐसी अर्जियों को बार-बार नहीं सुना जा सकता।

चेन्नई के एनजीओ 'टेक फॉर ऑल' ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि तकनीकी तौर पर वीवीपैट से जुड़ी ईवीएम नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'इस मामले पर पहले ही मुख्य न्यायाधीश की बेंच फैसला दे चुकी है फिर अवकाश कालीन पीठ के सामने इस मामले को क्यों उठाया जा रहा है?'

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि हम लोग जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन के तरीके के बीच में नहीं आ सकते। कोर्ट की टिप्पणी थी कि देश को सरकार चुनने दिया जाए।

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