हारकर भी जीत गये शिवपाल, दे दिया बड़ा सबक


GAURAV SHUKLA 24/05/2019 16:12:55
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Lucknow. लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर देश के साथ ही यूपी से आए चुनावी परिणाम चौंकाने वाले हैं। यूपी से सामने आए परिणाम के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने 62 , बहुजन समाज पार्टी ने 10, समाजवादी पार्टी ने 5, अपना दल एस ने 2, कांग्रेस ने 1 सीट पर जीत दर्ज की है। यह परिणाम विशेष तौर पर गठबंधन के लिए चौंकाने वाले हैं।

Firozabad ki ladai me harkar bhi kamyab hue shivpal yadav

मतदान के बाद एग्जिट पोल और मतगणना का प्रारम्भिक रुझान तक गठबंधन के नेता यूपी में सबसे ज्यादा सीट मिलने का दावा कर रहे थे। हालांकि शाम होते होते साफ हो गया कि सूबे की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां एक साथ आने के बाद भी 80 में से सिर्फ 15 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकीं। गठबंधन की हार का तकाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सपा बसपा गठबंधन में ही शामिल राष्ट्रीय लोक दल का सूपड़ा ही साफ हो गया।

अध्यक्ष अजीत सिंह अपने गढ़ मुजफ्फरनगर में हार गये और बागपत से उनके बेटे जयंत चौधरी को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। यही नहीं, कन्नौज जैसी सीट से पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव और बदायूं से धर्मेंद्र यादव तक को हार का सामना करना पड़ा। इन सभी की हार के साथ एक और सीट थी जहां पार्टी को करारी हार मिली। यह सीट फिरोजाबाद की थी जहां अक्षय यादव को हार का सामना करना पड़ा। 

यूपी की फिरोजाबाद सीट चुनाव के दौरान खासा चर्चाओं का केंद्र रही। इसी सीट के चर्चा में रहने का कारण पूर्व में सामाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और मौजूदा समय में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव का चुनाव लड़ा जाना था। चुनावी लड़ाई में भले ही शिवपाल को जीत हासिल न हो सकी हो लेकिन राजनीतिक जीवन में उनकी यह हार किसी जीत से कम नहीं है।

जानकार बताते हैं कि शिवपाल द्वारा इस सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय ही सिर्फ परिवार की कलह के लिए जिम्मेदार प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को हराना था, जिसमें उन्होंने बखूबी जीत हासिल की है। कहने का तात्पर्य है कि शिवपाल चुनावी लड़ाई में शिकस्त पाने के साथ ही असल लड़ाई को जीतने में कामयाब रहे हैं। 

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बड़ी लड़ाई जीतने को छोटी हार सही 

प्रत्यक्ष तौर पर शिवपाल यादव फिरोजाबाद से बुरी तरह से पराजित हुए है। फिरोजाबाद से शिवपाल यादव को महज 8.54 फीसदी (91869) वोट मिले हैं। जबकि जीत दर्ज करने वाले भाजपा प्रत्याशी चंद्रसेन जादौन को 46.09 फीसदी (495819) वोट और उपविजेता सपा प्रत्याशी अक्षय यादव को 43.41 फीसदी (467038) वोट मिले हैं।

आंकड़ों के अनुसार, शिवपाल इस सीट से नंबर तीन का स्थान हासिल कर सकें, लेकिन जानकार कहते हैं कि अगर शिवपाल इस चुनावी मैदान में न होते तो शिवपाल को प्राप्त 91869 वोट में से तकरीनब 90 फीसदी हिस्सा अक्षय यादव के हिस्से में होता। जिसके बाद 28781 वोटों से हारने वाले अक्षय यादव की जीत तय होती। 

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दरअसल, अपनी इस हार से शिवपाल ने परिवारिक लड़ाई में अहम किरदार निभाने वाले प्रो. रामगोपाल यादव की राजनीतिक साख को बट्टा लगवा दिया है। शिवपाल खुद की अहमियत के साथ ही इस बाद को साबित करना चाहते थे कि नेताजी मुलायम सिंह यादव का गठबंधन न किये जाने का पक्षधर होना बिल्कुल ठीक है। चूंकि रामगोपाल ही इस गठबंधन के खासा पक्षधर थे जिसके चलते ही कथिततौर पर शिवपाल ने फिरोजाबाद की सीट से ही चुनाव लड़ अक्षय यादव को जीत के ताज से दूर करने का फैसला किया था। 

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आज भी परिवार से लगाव 

शिवपाल इस चुनाव के जरिए मुख्य रूप से अपनी अहमियत परिवार के अन्य लोगों को बताना चाहते थे। मीडिया रिपोर्टस बताती है कि शिवपाल अपने परिवार आज भी चाहते हैं कि सभी लोग एक साथ आ जाए। इसी को लेकर दो साल अपमानित होने के बावजूद उन्होंने नई पार्टी नहीं बनाई।

हालांकि बाद में उन्हें यह कदम उठाना भी पड़ा तो उन्होंने मुलायम सिंह यादव समेत अखिलेश के खिलाफ आजमगढ़, बहू डिंपल के खिलाफ कन्नौज और भतीजे धर्मेंद्र यादव के खिलाफ बदायूं से भी कोई उम्मीदवार नहीं उतारा। 

 

Web Title: Firozabad ki ladai me harkar bhi kamyab hue shivpal yadav ( Hindi News From Newstimes)


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