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क्रिकेट का शेर अब नहीं दिखेगा क्रीज पर


ANKUR SHARMA 10/06/2019 16:13:47
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Mumbai. भारत के 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत के हीरो रहे युवराज सिंह ने सोमवार (10 जून) को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। युवराज सिंह ने मुंबई के साउथ होटल में प्रेस कांफ्रेंस कर संन्यास लेने का ऐलान किया है। 

भारत के पूर्व खिलाड़ी योगराज सिंह के बेटे, युवराज सिंह ने क्रिकेट की जगत में अपने लिए एक पावर पैक और उम्दा बल्लेबाज होने का नाम बनाया हैं। 2000 में हुए अंडर -19 विश्व कप में उन्होंने काफी रन बनाएं जिसके चलते टीम ने ट्रॉफी जीती।

उनकी इस प्रतिभा को जरा सा अनदेखा नहीं किया गया और उन्हें 2000 में हुए ICC नॉकआउट ट्रॉफी(केन्या) में टीम मे शामिल किया गया। जिसके चलते युवराज सिंह ने दूसरे मैच में ही 84 रनों की मैच विजेता पारी खेली वो भी ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली और जेसन गिलेस्पी जैसे दिग्गजों के विरूद्ध।


गांगुली और भारतीय टीम प्रबंधन ने युवराज पर ध्यान दिया, जब उन्हें 2000 अंडर -19 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था, उन्होंने उस टूर्नामेंट में 203 रन बनाए ​साथ ही साथ 12 विकेट चटकाए थे, उनके उस टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण योगदान से मोहम्मद कैफ की टीम ने श्रीलंका को हराकर ट्रॉफी उठाई थी।

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एक समय था जब युवराज सिंह ने जो कुछ भी छुआ था वह सोने के रूप में बदल गया था, उन्होंने एक बड़े मैच के खिलाड़ी होने की प्रतिष्ठा अर्जित की और उन्होंने दिखा दिया कि समय-समय पर देश के लिए वो कितने अहमं और महत्वपूर्ण हैं, पहले 2007 में भारत को उद्घाटन वर्ल्ड कप टी 20 जीतने में मदद कराई और फिर 2011 में भारत में हुए आईसीसी विश्व कप में।

उनकों दोनों टूर्नामेंट में अपने उम्दा प्रर्दशन की वजह से प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट घोषित किया गया । उनका वो पल अब भी याद रहेंगा जब उन्होंने क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के मारे थें।

टी20 विश्व कप के बाद बारी थी अब 50 ओवर के आईसीसी विश्व कप की। युवराज सिंह टूर्नामेंट शुरू होने से पहले फॉर्म और फिटनेस के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन फिर जब उन्होंने लय पकड़ी तो फिर उनकों पीछे मुड़ने से कोई बाधा नहीं रोक सकीं। युवराज ने टूर्नामेंट में 90.50 के औसत से 362 रन बनाए और 25.13 के औसत से 15 विकेट भी लिए। इस उम्दा प्रर्दशन के चलते युवराज ने भारत को 28 साल बाद विश्व विजेता बनवाया और क्रिकेट के महानायक सचिन तेंडुलकर को शान से अलविदा दिया।  

लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी दुनिया दुर्घटनाग्रस्त हो गई क्योंकि उनकों पता चला कि उनको लंग कैंसर है और इसके चलते उन्हें इलाज करवाने अमेरिका जाना पड़ा और गहन कीमोथेरेपी सत्रों से गुजरना पड़ा।
उन्होनें अपने इस फाइटिंग प्रतिष्ठिा के साथ उस कैंसर से लड़ते हुए 2012 में मैदान पर फिरसे वापसी की और यह बता दिया कि उन्हें कोई रोक नहीं सकता।अपने उस नेवर डाई रवैया के चलते वे लाखो लोगों के लिए प्रेरणा का एक स्त्रोत बन गएं और वापस भारत के लिए खेलते हुए दिखें।


उन्होनें अपना यह जलवा आईपीएल में भी भिखेरा और वह 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ विजेता भी रहें जिसके चलते उन्होंने काफी सुर्खिया बटोरी। युवराज सिंह हर किसी के लिए प्रेरणा रहे हैं, और उनकी कहानी इस बात की मिसाल देती है।

Web Title: The lion o f cricket, Yuvraj Singh ( Hindi News From Newstimes)


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