महिला अपनी ताकत को पहचाने और समाज को यह संदेश दें कि नारी अबला नहीं अब सबला है : अनुपमा जायसवाल


GAURAV SHUKLA 19/06/2019 10:07:55
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LUCKNOW.  नारी के बिना न तो सृष्टि की रचना हो सकती है और न ही सृष्टि आगे गतिमान हो सकती है। नारी माता के रूप में सबसे बड़ी गुरू, पत्नी के रूप में सबसे घनिष्ट मित्र और बहन के रूप में पूजनीय एवं सम्मानीय है। यह विचार प्रदेश की बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में नारी अदालत, घरेलू हिंसा से मुक्त संघर्षशील महिलाओं के राज्यस्तरीय सम्मेलन ‘नई पहचान’ कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।

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अनुपमा जायसवाल ने कहा कि समाज में छोटे बच्चों एवं महिलाओं पर हो रहे अत्याचार से उबरने के लिए यह जरूरी है कि महिला अपनी ताकत को पहचाने और समाज को यह संदेश दें कि नारी अबला नहीं अब सबला है। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित महिला समाख्या की यह विशेषता है कि यह गांव और गरीब के अंतिम छोर तक पहुंचती है, उनकी समस्याओं को सुनती है, समाधान करती है और उनके अंदर संघर्ष की एक नई ताकत देकर सफल बनाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं से संबंधित मामले चाहे वे घरेलू हिंसा के हांं या सामाजिक रूप से कहीं किसी महिला के ऊपर अत्याचार की घटना हो इन सभी समस्याओं से महिलाओं एवं बच्चों को शिक्षा देकर छुटकारा पाया जा सकता है। उ0प्र0 का बेसिक शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल कल्याण विभाग मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में लगातार इस दिशा में उल्लेखनीय काम कर रहा है।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि माता, बेटी, पत्नी, बहन और पुत्री हर रूप में मातृशक्ति वंदनीय है। उन्होने कहा कि महिला समाख्या महिलाओं को बिल्कुल निचले स्तर से उठाकर ऊंचाईयों पर बैठाने का प्रयास कर रही है। इसके सारे प्रयास सराहनीय एवं वंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि नारी को चार चीजें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन और समानता का अधिकार उसे दिला दिए जाएं तो महिला कभी कमजोर नहीं हो सकती। उन्होंने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि महिला समाख्या के माध्यम से महिलाओं को शिक्षित करने का भी प्रयास किया जा रहा है। महिला समाख्या ने उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ उन्हें स्वावलम्बी बनाकर आर्थिक आजादी भी देने का प्रयास किया है।
इस कार्यक्रम में उपस्थित महिला समाख्या की राज्य परियोजना निदेशक डॉ0 स्मृति सिंह ने कहा कि हमें पितृ सत्तात्मक सोच को बदलना होगा तभी महिलाओं को पूर्ण सम्मान मिलेगा। उन्होंने बताया कि नारी अदालत, उ0प्र0 सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित महिला समाख्या कार्यक्रम महिलाओं के साथ हो रहे घरेलू हिंसा, लिंग आधारित भेदभाव, भू्रण हत्या और दहेज उत्पीड़न जैसे आदि मुद्दों पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नारी अदालत एक अनौपचारिक न्यायिक ढांचा है। यहां वंचित समूह की महिलाएं सामाजिक नजरिए से संतुलन बनाते हुए न्यायिक प्रक्रिया चलाती हैं।

Web Title: MAHILAO KI SAMSYA KE LIYE SAMADHAN JARORI ( Hindi News From Newstimes)


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