पहली बार सांसद बने सनी देओल से हुई बड़ी चूक, जा सकती है लोकसभा की सदस्यता 


DEEP KRISHAN SHUKLA 19/06/2019 14:20:50
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New Delhi. अभिनेता से नेता बने पंजाब के गुरदासपुर सांसद सनी देओल की लोकसभा सदस्यता खतरे में है। इसका कारण बना उनका चुनाव के दौरान किया गया खर्च। नियमानुसार सांसद प्रत्याशी की चुनावी खर्च सीमा 70 लाख रुपए होती है। इससे अधिक खर्च करने वाले पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्धारित से ज्यादा धनराशि खर्च कर कोई उम्मीदवार जीत हासिल कर लेता है तो ऐसी स्थिति में उसकी सदस्यता समाप्त कर दूसरे नंबर पर रहने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जा सकता है। चुनाव खर्च में 86 लाख का खर्च दिखा कर सिने अभिनेता से सांसद बने सनी देओल फंस गए हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इन पर क्या कार्रवाई करता है। 

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बता दें कि मशहूर फिल्म अभिनेता सनी देओल ने लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा की टिकट से पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे थें। 
पहली बार राजनीति के मैदान में उतरे सनी देओल ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए धुंआधार प्रचार किया। इस प्रचार में खर्च में मामले में भी उन्होंने अपनी जिंदादिली दिखाते हुए दोनों हाथों से पैसे लुटाए। 
लेकिन राजनीति के मामले में सनी कच्चे खिलाड़ी साबित हुए और उन्होंने निर्धारित व्यय सीमा से अधिक धनराशि खर्च कर डाली। 
दरअसल लोकसभा उम्मीदवार के लिए व्यय सीमा 70 लाख रुपए थी जबकि सनी की और से चुनाव आयोग को जो खर्च दिखाया गया है वह 86 लाख है। 

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प्रत्याशियों के चुनावी खर्च का हिसाब किताब लगाने में जुटे आयोग के पर्यवेक्षकों के संज्ञान में जब यह मामला आया तो उन्होंने सनी को दोबारा खर्च का ब्यौरा देने के लिए नोटिस जारी की है। 
वहीं दूसरी ओर सनी देओल के कानूनी सलाहकारों का कहना है कि खर्च का हिसाब किताब लगाने में आयोग की टीम से गलती हुई है। 
बता दें कि गुरदासपुर सीट में विजेता रहे सनी देओल के बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील जाखड़ रहे थे।उन्होंने अपने चुनाव में 63 लाख रुपए, आम आदमी पार्टी के पीटर मसीह 7 लाख 65 हजार रुपए तो लालचंद कटारूचक्क ने 9 लाख 62 हजार रुपए का चुनावी खर्च दर्शाया था। 
गुरदासपुर सीट से रनर रहे कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ का कहना है कि नियमों का उल्लंघन साबित होने पर चुनाव आयोग को भाजपा उम्मीदवार सन्नी देओल के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। 
चुनाव आयोग यदि सनी देओल पर कार्रवाई करता है तो आयोग उन्हें आयोग्य घोषित कर रनर रहे प्रत्याशी को विजेता घोषित कर सकता है। 
चुनाव में किए गए खर्च का ब्योरा छिपाने पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। अगर कोई प्रत्याशी ऐसा करता है तो आरपी एक्ट 1951 की धारा 77 के तहत उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। 

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Web Title: A big mistake made by Sunny Deol who became M.P. for the first time, may be missed by the Lok Sabha membership, know what is the reason ( Hindi News From Newstimes)


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