हीरो बनने की ख्वाहिश लेकर आये थे खलनायक अमरीश पुरी


SHRADDHA SAHU 22/06/2019 10:21:08
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New Delhi. अमरीश पुरी... जिनको हिंदी सिनेमा में अभिनय की दुनिया में एक हीरो से ज्यादा विलेन के रूप में पहचान मिली। 80 के दशक की फिल्मों में सिर्फ हीरो-हीरोइन का प्यार और हीरो खलनायक को हराता था। उस दौर में बतौर खलनायक अपनी पहचान बनाई और आज भी हिंदी सिनेमा में एक खलनायक के रूप में उनको याद किया जाता है।

40 साल की उम्र में हिंदी सिनेमा में अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले अमरीश पुरी उस दौर में हर फिल्मों के जरूरत बन चुके थे। अमरीश ने लगभग 400 बॉलीवुड फिल्मों में काम किया। उन्होंने एक मजबूर पिता से लेकर खूंखार खलनायक तक का किरदार निभाया है। 22 जून, 1932 को पाकिस्तान के लाहौर में जन्में अमरीश पुरी के फिल्मी सफर के बारे में आइए जाने कि कैसे वे बतौर खलनायक हिन्दी सिनेमा में पहचान बनाई ।

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1985 में आई फिल्म- मेरी जंग में भी अमरीश पुरी को खुब सराहना मिली। सुभाष घई के निर्देशन में बनी फिल्म में अमरीश पुरी ने एडवोकेट जी.डी. ठकराल का किरदार निभाया था। यह किरदार अमरीश पुरी के सबसे उम्दा किरदारों में से एक है।

सुभाष घई के निर्देशन में बन रही लगातार चौथी फिल्म में अमरीश पुरी काम कर रहे थे। अमरीश पुरी को ठकराल के किरदार के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का खिताब भी मिला था।

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1989 में आई फिल्म त्रिदेव में अमरीश पुरी एक बार फिर एक खतरनाक और डरावने विलेन के किरदार में नजर आए। राजीव राय के निर्देशन में बनी फिल्म त्रिदेव में सारे किरदारों से अलग भैरो सिंह का किरदार हट कर था। इस फिल्म ने इस साल कुल तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड उन्होंने अपने नाम किए। उनके शानदार अभिनय के लिए उनको फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नामित किया गया था।

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1991 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म सौदागर में अमरीश पुरी को एक प्रभावशाली विलेन का किरदार काफी बड़ी चुनौतीपूर्ण था, क्योकि उस दौर के दो सबसे बड़े अदाकारों दिलीप कुमार और राजकुमार भी शामिल थे।

इसमें अमरीश ने अपने किरदार को बेहतरीन तरीके से निभायी और यह फिल्म भी सुपरहिट रही। इस फिल्म में दमदार विलेन के किरदार के लिए अमरीश पुरी को फिल्मफेयर बेस्ट विलेन के लिए नामित किया गया। इसी फिल्म से सुभाष घई को बेस्ट निर्देशक के तौर पर उनका एकमात्र फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 

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1968 की हॉलीवुड फिल्म व्हेयर ईगल्स डेयर पर आधारित फिल्म तहलका में एक बार फिर अमरीश पुरी के खूंखार विलेन जरनल डांग के रूप को दर्शाको ने खुब पसंद किया था। इस फिल्म में अमरीश पुरी का डायलॉग- 'डांग कभी रॉन्ग नहीं होता' खुब चला और यह आज भी लोगों के जहन में बना हुआ है। यह फिल्म एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई। यह फिल्म 1992 में सबसे ज्यादा कमाई करने के पांचवें स्थान पर रही।

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1992 में फिल्म मुस्कुराहट में अमरीश पुरी एक अलग किरदार में नजर आएं। इस फिल्म में खलनायक की भूमिका से हट कर अमरीश पुरी के लिए एक आदर्श बाप जस्टिस गोपीचंद वर्मा की भूमिका निभाई। 

1992 में आई फिल्म सूरज का सातवां घोड़ा अमरीश पुरी की बाकी कॉमर्शियल फिल्मों से हटकर एक अलग फिल्म थी।फिल्म सूरज का सातवां घोड़ा अमरीश पुरी की बाकी कॉमर्शियल फिल्मों से हटकर एक अलग फिल्म थी।

इस फिल्म में जबरदस्त अभिनय के लिए अमरीश पुरी को सिडनी फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर के खिताब से नवाजा गया। इसके साथ इस फिल्म को साल 1993 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया गया।

1987 में रिलीज हुई फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में एक विलेन का किरदार निभाया था जिसमें उनका नाम ‘मोगैंबो’ था। फिल्म में उनका डायलॉग मोगैंबो खुश हुआ आज भी लोगो के याद है। 

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1986 में रिलीज हुई इस फिल्म नगीना में अमरीश ने एक सपेरे तांत्रिक का रोल निभाया था। उनके साथ इस फिल्म में श्रीदेवी और ऋषि कपूर लीड रोल में थे। इस फिल्म में अमरीश पुरी का एक डायलॉग था ‘अलक निरंजन बोलत’, ये डायलॉग काफी फेमस हुआ था।

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शाहरुख खान और सलमान खान की फिल्म करण-अर्जुन में अमरीश ने बतौर खलनायक वे शाहरुख और सलमान से ज्यादा चर्चीत हुए। उसमें वो ठाकुर दुर्जन सिंह बने थे जो पैसों के लिए अपने भाई का ही खून कर देता है। 

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साल 1987 में आई फिल्म लोहा में अमरीश पुरी के किरदार को फिल्मी करियर का सबसे खतरनाक किरदार माना गया है। इस फिल्म में अमरीश पुरी ने अपनी एक्टिंग के साथ अपने लुक ने भी लोगों को डराया था।

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राकेश रोशन ने निर्दशन में बनी फिल्म ‘कोयला’ 7 अप्रैल 1997 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अमरीश पुरी ने नेगेटिव रोल निभाया था। फिल्म में अमरीश पुरी ने राजा साहब का किरदार किया था। इस फिल्म में उनके साथ शाहरूक खान और माधुरी दीक्षीत भी थी।

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7 सितंबर 2001 को आई फिल्म ‘नायक’ में अमरीश ने मुख्यमंत्री का रोल निभाया था। जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए शहर में दंगा बढ़ने देता है। अमरीश का ये रोल काफी फेमस हुआ था। इस फिल्म में उनके साथ अनिल कपूर भी थे।

अमीषा पटेल और सनी देओल की फिल्म गदर एक प्रेम कथा को कौन भूल सकता है। इस फिल्म में अमरीश पुरी ने एक कट्टर पाकिस्तानी नेता और  पिता का रोल निभाया था, जो हिंदुस्तान की धरती पर पांव रखने के लिए भी राजी नहीं था।

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Web Title: Mumbai came to be a hero, but the world began to recognize him as Villain. ( Hindi News From Newstimes)


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