नशे की लत जितनी ही खतरनाक है टिकटॉक और पबजी की डिजिटल लत, ऐसे पाएं छुटकारा


ANKUR SHARMA 22/06/2019 17:29:54
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 New Delhi. बच्चे ही नहीं बड़ी संख्या में वयस्क भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की लत का शिकार हो रहे हैं। मनोचिकित्सकों ने आगाह किया है कि डिजिटल लत वास्तविक तौर पर उतनी ही खतरनाक है, जितनी की नशे की लत।

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पिछले सप्ताह टिकटॉक खेलने से रोकने पर तमिलनाडु में 24 वर्षीय एक मां के आत्महत्या करने और मध्यप्रदेश में पिछले महीने लगातार छह घंटे पबजी खेलने वाले एक छात्र की दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत की खबरों के आने के बाद डॉक्टरों ने ये चेतावनी दी है। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल लत से लड़ने के लिए सबसे जरूरी है, इस लत के बढ़ने पर इसका एहसास कराना। संदीप वोहरा के अनुसार, 'गैजेट्स के आदी लोग हमेशा गैजेट्स के बारे में सोचते रहते हैं या जब वे इन उपयोगों का उपयोग नहीं कर पाते तो उन्हें अनिद्रा या चिड़चिड़ापन होने लगता है।

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डिजिटल लत किसी भी अन्य लत जितनी खराब है। ऐसे में अगर आपको डिजिटल लत है तो ये संकेत है कि आप अपने दैनिक जीवन से दूर जा रहे हैं, आप हमेशा स्क्रीन पर निर्भर हैं। ऐसे लोग समाज और अपने परिवार से बात करना बंद कर देते हैं और अपनी जिम्मेदारियों के बारे में सोचना या अपने नियमित काम करना भी बंद कर देते हैं।

ऐसे लोगों में अवसाद, चिंता, उग्रता, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन के साथ-साथ अन्य चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी भी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों के लिए काम, घर के अंदर जीवन, बाहर के मनोरंजन तथा सामाजिक व्यस्तताओं के बीच संतुलन कायम रखना सबसे महत्वपूर्ण काम है। उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि वे पर्याप्त नींद ले रहे हैं, यह बहुत जरूरी है। अगर कोई भी व्यक्ति 4 या उससे ज्यादा घंटे से फ़ोन पर समय बिता रहा है, तो उसको  डिजिटल गैजेट्स से संपर्क कम करने के लिए सचेत करना चाहिए।

Web Title: As much as the addictive addiction is the digital addiction of stamps and pubs, get rid of such ( Hindi News From Newstimes)


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