मुख्य समाचार
UPTET : हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त, 1 लाख से ज्यादा शिक्षकों को मिली राहत अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर बोला करारा हमला, कहा- नौजवानों की जिन्दगी में ... फतेहपुर में प्रतिबंधित मांस मिलने पर बवाल, मदरसे पर पथराव साक्षी मामले पर मालिनी अवस्थी का बड़ा बयान, लड़कियां जीवन साथी चुनें लेकिन... यूपी पुलिस को मिली बड़ी सफलता, दो इनामी बदमाश किए ढेर वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल पर लगाए गम्भीर आरोप, मचा घमासान अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी, अचानक युवक की खुली आंखे और फिर जो हुआ... सरकारी आवास के मोह पॉश में जकड़े दो पूर्व मंत्रियों को गहलोत सरकार ने दिया जुर्माने का झटका सलमान संग फिल्मों में डेब्यू कर सुपरस्टार बनीं कटरीना का नहीं है कोई क्राइम रिकॉर्ड 149 साल बाद बन रहा गुरू पूर्णिमा पर चंद्र दुर्लभ योग सपा नेता अखिलेश यादव की गोली मारकर हत्या, सियासत में भूचाल
 

सुंदर पहाड़ी वादियों में बसा चकराता, एडवेंचर के लिए जरूर जाएं


SHRADDHA SAHU 24/06/2019 15:06:08
36 Views

Dehradun. उत्तराखंड, जो देवभूमि के नाम से जानी जाती है। यहां की खूबसूरत हसीन वादियों से कौन वाकिफ नहीं है। ऊंचे-ऊंचे पहाड और पेड़-पौधे प्रकृति की खूबसूरती की मिसाल कायम करते हैं। उत्तराखण्ड, भारत के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। तो आइए चलें उत्तराखण्ड के एक खूबसूरत पर्यटक स्थल चकराता, जो प्रकृति की गोद में अत्यंत ही मनमोहक, रमणीय और एडवेंचर से भरपूर है। जहां आप कम बजट में भी परिवार के साथ छुट्टी में घूमने जा सकते हैं। 

24-06-2019163539Increaseinth4

चकराता भीषण गर्मी में शांत, प्रदूषणमुक्त माहौल और अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थानों में से एक है। यहां पहाड़ियों में छोटे-छोटे बसे घर बेहद ही खूबसूरत लगते हैं। शोर से दूर कुछ पल शांति की चाहत हो या कैंपिंग करनी हो या राफ्टिंग या फिर ट्रेकिंग, यहां हर चीज की सुविधा है।देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1957 में चकराता क्षेत्र का दौरा किया था।

देहरादून से चकराता की दूरी सड़क मार्ग से करीब 90 किमी. है। देहरादून से आप दो रास्तों मसूरी-नागथात और विकासनगर-कालसी होकर बस, टैक्सी व अन्य छोटे वाहनों से चकराता पहुंच सकते हैं। चकराता क्षेत्र में पेट्रोल पंप की सुविधा नहीं है, इसलिए प्राइवेट वाहन से आने वाले पर्यटक विकासनगर व कालसी में टैंक फुल कराकर ही यहां आएं। जॉली ग्रांट (देहरादून) चकराता से 113 किमी. की दूरी पर स्थित निकटतम हवाई अड्डा है। निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून रेलवे स्टेशन है। मार्च से जून और अक्टूबर से दिसंबर के बीच आप जौनसार-बावर की खूबसूरत वादियों का लुत्फ ले सकते हैं। जून के आखिर से सिंतबर के मध्य यहां बरसात होती है, जबकि सर्दियों में यहां जबर्दस्त ठंड पड़ती है।

जौनसार-बावर के पारंपरिक घर 

यमुना, टोंस व पावर नदी के बीच जौनसार-बावर का इलाका बसा है जो 463 वर्ग मील तक फैला हुआ है। जमना (यमुना) नदी के पार होने के कारण यह क्षेत्र जमना पार का इलाका कहलाता है जो बाद में जौनसार नाम से प्रचलित हो गया। उत्तर दिशा वाले क्षेत्र को पावर नदी के कारण बावर कहा जाने लगा। जौनसार-बावर में पारंपरिक मकान, आम मकानों से बेहद अलग होने के ​कारण काफी ज्यादा आकर्षक का केन्द्र बनते है। ये मकान पगोड़ा शैली में पत्थर और लकड़ी से बने होते है। मकानों की ढलावदार छत पहाड़ी स्लेटी पत्थर की बनी होती हैं। दो, तीन या चार मंजिल वाले इन मकानों की हर मंजिल पर एक से चार कमरे बने होते हैं। सर्दी में ये मकान सर्द नहीं होते हैं। एक और खास बात। इन मकानों के निर्माण में ज्यादातर देवदार की लकड़ी का इस्तेमाल होता है। उस पर की गई महीन नक्काशी देखते ही बनती है।

24-06-2019161329Increaseinth2

ट्रैकिंग, रेफलिंग के लिए खास

ट्रैकिंग, रेफलिंग के लिए भी यह उम्दा और अनुकुल जगह माना जाता है। स्थानीय निवासी नेशनल शूटर पंकज चौहान कहते हैं, जब सीजन अनुकूल रहता है तो यहां पर्यटकों की भीड़ लग जाती है। चकराता की पहाडियां ट्रेकिंग व रेपलिंग के शौकीनों के लिए बहुत ​ही अनुकुल मानी जाती है। यहां पर्यटकों को चकराता के पास मुंडाली, बुधेर, मोइला टॉप, खंडबा, किमोला फॉल और आसपास की चोटियों पर ट्रेकिंग व रेपलिंग कराई जाती है।

स्थानीय लोखंडी होटल संचालित करने वाले रोहन राणा बताते हैं, बुधेर के पास गुफा व छोटी-बड़ी चोटियों की श्रृंखला है। गर्मियों में यहां ट्रैकिंग के लिए विभिन्न शहरों व महानगरों से सैलानी पहुंचते हैं। यहां पर्यटकों को ट्रेकिंग, रेफलिंग कराने के लिए प्रशिक्षित युवा रखे गए हैं।

24-06-2019163508Increaseinth3

यादों का खूबसूरत घर

55वीं सिरमौर रेजीमेंट के कर्नल एच.रॉबर्ट ह्यूम ने वर्ष 1869 में चकराता छावनी की स्थापना की। अंग्रेजों ने चकराता को छावनी क्षेत्र के रूप में समुद्र तल से करीब सात हजार फीट की ऊंचाई पर बसाया था। इससे पूर्व वर्ष 1815 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जौनसार-बावर को अपने अधीन ले लिया था। इस दौरान मसूरी से चकराता की पहाडिय़ों से होकर शिमला तक पैदल मार्ग बनाया गया।

वर्ष 1927 में चकराता कैलाना छावनी में जिम्नेजियम सिनेमा की दो शाखाएं थीं, जहां केवल गर्मियों में ही सिनेमा दिखाया जाता था। इसके अवशेष आज भी हैं जो इस क्षेत्र को खूबसूरत यादों का घर बनाते हैं। यहां पुराने दौर के बने हुए रोमन कैथोलिक व स्कॉटिश चर्च भी हैं जो यहां आने वालों को बीते समय की कहानी सुनाते नजर आते हैं।

24-06-2019164448Increaseinth5

विदेशी पर्यटकों पर रोक! सामारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चकराता छावनी क्षेत्र चीन व नेपाल सीमा के नजदीक पड़ता है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से यहां विदेशी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक है। दरअसल, यहां घूमने के लिए उन्हें चकराता छावनी के कमांडेंट से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।

गुफाओं वाला बुधेर व मुंडाली व खडंबा 

चकराता के समीप 2800 मीटर (9184 फीट) की ऊंचाई पर स्थित मखमली घास का मैदान है जिसे बुधेर (मोइला दंडा) से जाना जाता है। बुधेर एशिया के बेहतरीन जंगलों में एक है। यहां चूना पत्थर की प्रचुरता की वजह से कई छोटी-बड़ी गुफाएं हैं।

यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए देवदार वन के बीच अंग्रेजों के दौर में बना चकराता वन प्रभाग का वन विश्राम गृह मौजूद है। चकराता के समीप ही लगभग दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मुंडाली व खडंबा की पहाडिय़ां है। यहां आसपास बने लोक देवों के मंदिर भी आकर्षण के केंद्र हैं।
 

24-06-2019165149Increaseinth6

चकराता के पास देववन की ऊंची चोटी से हिमालय का मनमोहक नजारा भावविभोर कर देने वाला है। देववन व कनासर में वन विभाग के अधिकारियों का ट्रेनिंग कैंप है। यहां आइएफएस अधिकारी ट्रेनिंग के लिए आते है।

24-06-2019165237Increaseinth7

चिरमिरी से सूर्यास्त का नजारा

चकराता से चार किमी. दूर चिरमिरी नामक जगह है जहां शाम के वक्त सूर्यास्त का नजार बेहद ही खूबसूरत दिखाई पड़ता है। चकराता की सैर पर आए पर्यटक सूर्यास्त के वक्त् चिरमिरी आते है और इस अनोखे प्रकृति के नजारे को करीब से देखने का अलौकिक आनंद लेते हैं।

24-06-2019165704Increaseinth8

चिंताहरण महादेव मंदिर और टाइगर फॉल

वर्ष 1933 में छावनी बाजार चकराता में कारोबार करने आए श्याम सुंदर गोयल ने चिंताहरण महादेव मंदिर की खोज कर इसका पुनर्निर्माण कराया था। भक्तगण बड़ी संख्या में भगवान भोलेनाथ के दर्शनों को आते हैं। छावनी बाजार चकराता से 17 किमी. दूर लाखामंडल मार्ग पर टाइगर फॉल (1395 मीटर) स्थित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी शेर की दहाड़ जैसी आवाज है।

24-06-2019171656Increaseinth9

कोटी-कनासर का सुंदर बुग्याल 
मसूरी-चकराता-त्यूणी हाइवे पर चकराता से 31 किमी. दूर कोटी-कनासर बुग्याल (मखमली घास का मैदान) पड़ता है। समुद्र तल से 8500 फीट की ऊंचाई पर देवदार के जंगलों से घिरे बुग्याल है। यहां देवदार के 600 वर्ष पुराने वृक्ष आज भी मौजूद हैं। 

लाखामंडल का आकर्षण
चकराता से 62 किमी. दूर समुद्र तल से 1372 मीटर (4500 फीट) की ऊंचाई पर लाखामंडल स्थित है। कहते हैं कि कौरवों ने पांडवों व उनकी माता कुंती को जीवित जलाने के लिए यहां लाक्षागृह (लाख का घर) का निर्माण कराया गया था। यमुना नदी के किनारे बसे लाखामंडल के प्राचीन शिव मंदिर की ऊंचाई 18.5 फीट है। सवा लाख शिवलिंगों का संग्रह है।

छत्र शैली में बने लाखामंडल के शिव मंदिर का निर्माण सिंहपुर के यादव राजवंश की राजकुमारी ईश्र्वरा ने अपने पति जालंधर के राजा चंद्रगुप्त की स्मृति में करवाया था। मंदिर बड़े शिलाखंडों से निर्मित है। यहां मिले शिलालेख में ब्राह्मी लिपि व संस्कृत भाषा का उल्लेख है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने लाखामंडल की यात्रा की थी। इस मंदिर को आठवीं सदी का बताया जाता है, जबकि स्थानीय लोग इसे पांडवकालीन बताते हैं। प्राचीनकाल लाखामंडल क्षेत्र बंदरगढ़ कहलाता था।

यहां लाक्षेश्र्वर मंदिर होने से इसका नाम लाखामंडल पड़ा। लाखामंडल में प्राचीन सभ्यताएं विद्यमान हैं। यमुना नदी के किनारे बसे इस स्थल को त्रिवेणी तीर्थ भी कहा जाता है। यहां यमुना, ऋषिगंगा, रिखनाव गाड, बाणगंगा, गंगाणी पाणी नाम की पांच जलधाराओं का संगम होता है।

24-06-2019172337Increaseinth10

चार जिलों का केंद्र त्यूणी बाजार

समुद्र तल से एक हजार मीटर की ऊंचाई पर बसे त्यूणी बाजार आने-जाने के लिए दो हाइवे समेत चार मोटर मार्ग हैं। पर्यटकों के ठहरने के लिए यहां लोक निर्माण विभाग व वन विभाग के दो बंगले और होटल बने हुए हैं। यहां से सिद्धपीठ श्री महासू देवता मंदिर हनोल 15 किमी. की दूरी पर है, जबकि शिमला की दूरी 90 किमी. है।

24-06-2019172703Increaseinth11

हनोल के महासू महाराज व चीड़ महावृक्ष की समाधि!
समुद्र तल से 1200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हनोल मंदिर की मान्यता देशभर में है। यहां देश-विदेश के पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। देहरादून से मसूरी-पुरोला, विकासनगर-चकराता या हरिपुर-मीनस होते हुए हनोल पहुंचा जा सकता है। हनोल से पांच किमी. दूर त्यूणी-पुरोला राजमार्ग पर स्थित खूनीगाड में एशिया महाद्वीप के सबसे ऊंचे चीड़ महावृक्ष की समाधि है। 

24-06-2019172953Increaseinth12

परंपराओं की स्वादिष्ट थाली
जौनसार-बावर और चकराता की सबसे अच्छी चीज होती है,वह कांसे की थाली में खाने को खिलाना। यहां आसपास खाने-पीने की बड़ी दुकानें नहीं हैं, तो यहां आपको परपंरागत व्यंजन सीडे, अस्के का स्वाद मिलेगा। लाल चावल, मीट, कचौरी, राजमा व उड़द की दाल, लाल चावल की खिचड़ी, तिल-भंगजीरे की चटनी, पहाड़ी खीरे के सलाद जैसे व्यंजनों को आम खानपान के रूप में परोसा जाता है।

Web Title: Survive the beautiful hilltops, go for adventure. ( Hindi News From Newstimes)


अब पाइए अपने शहर लखनऊ की खबरे (Lucknow News in Hindi) सबसे पहले Newstimes वेबसाइट पर और रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें न्यूजटाइम्स की हिंदी न्यूज़ ऐप एंड्राइड (Hindi News App)


कमेंट करें

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपकी प्रतिक्रिया