सरकारी उदासीनता और उपेक्षा के चलते उद्योग जगत में निराशा


RAJNISH KUMAR 27/06/2019 15:02:22
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Lucknow. प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए। सरकार ने उद्यमियों को आशा की नई किरण दिखाते हुए नई औद्योगिक निवेश एवं रोजगार सृजन नीति 2017 की घोषणा की। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, आई.टी., सोलर, हैन्डलूम, एम.एस.एम.ई., फूड प्रोसेसिंग, सिविल इवीएशन सहित करीब 13 विभिन्न क्षेत्रों से सम्बन्धित औद्योगिक नीतियों की घोषणा की है, लेकिन सरकारी उदासीनता और उपेक्षा के चलते उद्योग जगत को दो साल बीतने के बाद भी निराशा हाथ लग रही है। 

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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने बताया कि प्रदेश सरकार ने जितनी भी औद्योगिक नीतियां बनाई हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन को लेकर कोई कारगर तंत्र नहीं बनाया गया है और न ही सम्बंधित शासनादेश पर अमल किया गया है। ये सभी घोषणाएं कागजों पर ही चल रही हैं।

उदाहरण के तौर पर उ.प्र. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) प्रोत्साहन नीति 2017 में प्रावधान था कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए 2 करोड़ रुपए तक के कोलेटरल फ्री ऋण के लिए बैंको द्वारा क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फार माइक्रो स्माल इंटरप्राइजेज के लिए ली जाने वाली वन टाइम गारंटी फीस और वार्षिक सेवा शुल्क का भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा बजट प्रावधान कराते हुए वहन किया जाएगा। इस घोषणा का क्रियान्वयन आज तक नहीं हुआ है।

सरकारी विभागों एवं उपक्रमों द्वारा खरीदे जाने वाले समान के लिए जारी टेंडरों में कोई भी रिस्ट्रेक्टीव शर्त जैसे टर्न ओवर इत्यादि नहीं लगायी जाएगी, के स्पष्ट आदेश है, लेकिन इन आदेशों का आए दिन उल्लंघन किया जा रहा है, जिस वजह से प्रदेश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग टेंडरों में भाग लेने से वंचित रहते हैं। इसके अलावा सरकारी विभागों को एमएसएमई द्वारा सप्लाई किए गए माल का भुगतान 45 दिनों के अन्दर करने का प्रवधान है, लेकिन इसमें महीनों लग रहे हैं। 

उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के औद्योगिक क्षेत्रों की भी हालत काफी खराब है। यूपीसीडा प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, लेकिन मनमाने ढंग से मेन्टीनेन्स चार्ज और विस्तारीकरण शुल्क में बढ़ोतरी कर रहा है, जिसकी शिकायतें मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी की गई, लेकिन अब तक समाधान नहीं पाया है। 

आईआईए ने ये भी मांग की

- प्रदेश में पूर्व नेट मीटरिंग प्रणाली के चलते बड़ी संख्या में रूफ टॉप सोलर पावर संयत्र लगाए गए थे, लेकिन इस व्यवस्था को प्रतिबन्धित कर दिया है। इस सुविधा को फिर से बहाल किया जाए।

- केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश में भी एमएसएमई से 25 प्रतिशत सामान की खरीद सभी विभागों और उपक्रमों में अनिवार्य की जाए।

- बीमार और बंद पड़ी एमएसएमई इकाइयों के पुनर्जीवन/पुनर्वासन अथवा एक्जिट की नीति बनाई जाए।

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बता दें कि आईआईए के प्रतिनिधि मंडल ने एमएसएमई सेक्टर की समस्याओं के समाधान को लेकर बीती 24 जून को केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी, लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

 

Web Title: ndustry disappointment due to government's indifference and neglect ( Hindi News From Newstimes)


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