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एक बार फिर धरती के भगवान ने किया कमाल,किशोरी को जन्मजा​त बीमारी से दिलाई निजात


RAGHVENDRA CHAURASIA 08/07/2019 13:27:30
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Lucknow. जी हां धरती के भगवान (डाक्टर) ने अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत एक दीन-दुखी के परिवार को खुशियों से भर दिया है। किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) के चिकित्सकों ने सिग्मायड वेजाइनोप्लास्टी के माध्यम से मरीज (किशोरी) का निजी अंग बनाकर उसको नई जिंदगी तो दी है बल्कि किशोरी को जन्मजा​त बीमारी से निजात दिला दी है। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के बाद अब किशोरी खुशियों से अपना वैवाहिक जीवन जी सकेगी,मगर वह मां नहीं बन पाएगी।

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किशोरी को थी जन्मजात बीमारी 

यूपी के रायबरेली निवासी 15 वर्षीय किशोरी को मासिक धर्म न आने की जन्मजात बीमारी से ग्रसित थी। किशोरी के परिवार वालों ने उसको सैकड़ों अस्पताल में दिखाया ,मगर सभी जगहों से निराशा हाथ लगी थी। किशोरी जब हार थककर केजीएमयू पहुंची। यहां यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विश्वजीत सिंह ने ओपीडी में मरीज को देखा और जांच कराई। जांच के दौरान वह एमआरकेएच सिंड्रोम (टाइप-टू) से पीड़ित पाई गई। चिकित्सकों ने दावा कि एमआरकेएच सिंड्रोम टाइप वन के केस से पीड़ित एक युवती सर्जरी के बाद बच्चा भी पैदा करने में सफल रही है। मगर टाइप -टू कैटेगरी की बीमारी के दो केस पूरे विश्व में पंजीकृत हैं। डॉक्टरों ने बताया कि यह विश्व का केस तीसरा है।

किशोरी नौ बीमारियों के चपेट में थी

केजीएमयू के डॉक्टरों ने बताया कि इस किशोरी को दिल,गुर्दा,गला और रीढ़ की हड्डी समेत 9 बीमारियों की चपेट में थी। आयुष्मान योजना का लाभार्थी होने की के कारण उसका ऑपरेशन मुफ्त में हुआ। ऑपरेशन सफल होने के बाद डॉक्टरों ने मीडिया को बताया कि यूट्रस,ओवरी,यूटेरियन,ट्यूब वगैरह नहीं थे। प्री एनस्थीसिया चेकअप के दौरान पता चला कि किशोरी के दिल के वॉल्व में भी खराबी है। किशोरी के शरीर में एक ही गुर्दा व गर्दन भी छोटी थी। इस तरह उसके शरीर में वे सभी लक्षण मिले,जो एमआरकेएस टाइप टू में पाए जाते हैं।

इस तरह किशोरी को दी नई जिंदगी

केजीएमयू के डॉक्टर विश्वजीत सिंह ने बताया कि किशोरी के शरीर में मौजूद दो मीटर की आंत से 10 सेंटीमीटर का टुकड़ा लिया गया। उस टुकड़े से करीब डेढ़ घंटे के ऑपरेशन के बाद निजी अंग बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आंत के छोटे होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। डॉ विश्वजीत ने बताया कि एमआरकेएच सिंड्रोम का पूरा नाम मेयर,टॉकीटेन्सकी कुस्टर,हाउसर सिंड्रोम है। इन चारों ने मिलकर इसकी खोज की थी। यह एक जेनेटिक बीमारी है। 

किशोरी को नई जिंदगी देने वाली टीम

यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ विश्वजीत सिंह के साथ प्रो राहुल जनक सिन्हा,रेजीडेंट डॉ ज्ञानेंद्र,डॉ मुकेश,डॉ कौशल,डॉ विश्ववानु,एनस्थीया विभाग के डॉ जिया समेत पैरामेडिकल एवं नर्सिंग स्टाफ उपस्थित था। प्रोफेसर राहुल जनक सिन्हा ने बताया कि यहद किसी बच्चे में शारीरिक विकास प्रभावित हो,14 वर्ष की उम्र में मासिक धर्म शुरु न हों,उसकी आवाज बदलने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती जांच और कुछ सर्जरी के बाद युवती के आंतरिक हिस्से को सुधारा जा सकता है।

 

 

Web Title: Once again, the God of the earth did amazing, the teenager was treated with birth and death. ( Hindi News From Newstimes)


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