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तो इसलिए उठ रही मुस्लिमों की पवित्र तीर्थ यात्रा के विरोध में आवाजें


DEEP KRISHAN SHUKLA 09/07/2019 15:23:02
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New Delhi. इस्लाम की सबसे पवित्र कही जाने वाले हज यात्रा को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आयी है। जिस यात्रा को एक बार करना हर मुस्लिम का सपना है अब उसी यात्रा के विरोध के स्वर उठने लगे है। खास बात यह है कि ये विरोध की आवाजे किसी और की नहीं बल्कि मुस्लिम समुदाय से आ रही हैं। यह कौतुहल तब और बढ़ जाता है कि सउदी अरब के शासन प्रिंस मोहम्मत बिन सलमान इस यात्रा को और आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए है। ऐसे में इस विरोध की क्या वजह हो सकती यह जानना भी बेहद जरूर है। तो आइए समझते हैं क्या है पूरा मामला। 

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मक्का और मदीना जैसे पवित्र इस्लामी तीर्थ स्थलों वाला देश सऊदी अरब में इन दिनों आंतरिक राजनीतिक कलह की सुलगन से जूझ रहा है। 
प्रिंस सलमान सऊदी अरब की तरक्की और इस पवित्र यात्रा की बेहतरी के लिए जो नीतियां अपना रहे हैं उनसे मुस्लिम और धार्मिक संगठन संतुष्ट नहीं हैं। 
यूं तो हज यात्रा के ​बहिष्कार के स्वर बीते साल ही उठने शुरू हो गए थें। इस साल अप्रैल में जब लीबिया के सुन्नी मौलवी गैंड मुफ्ती सादिक अल धरीआनी ने जब इस यात्रा के बहिष्कार का आह्वान किया तो दुनिया भर से उठ रही आवाजे एक हो गयी और इन्होंने एक गूंज का रूप ले लिया। इस यात्रा के विरोध का एक मात्र कारण यह ही नहीं बल्कि अन्य भी तमाम कारण हैं। 

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  कमाई से दहशत फैलाने का आरोप
लीबियाई के मौलवी ने तो यहां तक आरोप लगाए है कि हज से मिलने वाले आर्थिक मजबूती का इस्तेमाल दहशत फैलाने में हो रहा है। सऊदी अरब हज में होने वाली कमाई से हथियारों की खरीददारी कर रहा है। आरोप है कि इन हथियारों से ही सीरिया, ट्यूनीशिया, सूडान, लीबिया और अल्जीरिया जैसे देशों में दहशत फैलाने का काम किया जा रहा है। इसी का हवाला देते हुए मौलवी सादिक ने मुसलमानों से हज पर जाकर खून खराबा फैलाने वाले देश की मदद न करने की बात कही है।

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  हज से होने वाली कमाई भी है विरोध की वजह
इस पवित्र यात्रा के विरोध का एक दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि दुनियाभर के मुसलमान यहां पवित्र यात्रा करने आते है। बाजारीकरण और पूंजीवादी युग में धर्म से ज्यादा अहमियत लोग पैसों को देने लगे हैं। माना जा रहा है कि कई देश ऐसा मानते है कि दुनिया भर के मुस्लिम इस यात्रा के नाम पर अपना पैसा अरब में खर्च कर आते हैं। जिससे वहां की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। 
  पहले ही मुखरित हो चुके है बहिष्कार के स्वर
लीबिया के मौलवी ही पहले सख्श नहीं हैं जिन्होंने हज यात्रा के बहिष्कार की आवाज बुलंद की हो। इससे पहले ही अरब के प्रखर आलोचक युसूफ अल काराडावी ने बीते साल इस यात्रा के बहिष्कार का फतवा अगस्त माह में जारी किया था। उन्होंने तो अपने फतवे में हज के विकल्प भी सुझाए थे। 
  इस ट्विटर हैंडल पर हो रहा विरोध #boycotthajj
इस बार हज को लेकर शुरू हुआ विरोध वैश्विक स्तर पर पहुंच गया है। दुनियाभर से मुसलमान एक सुर में सऊदी प्रिंस की खिलाफत में एक ही सुर आलाप रहे हैं। यही नहीं यह विरोध सोशल साइट ट्विटर तक पहुंच गया है। जिसमें #boycotthajj के हैशटैग पर इस ​बहिष्कार का जमकर प्रचार किया जा रहा है। इस ट्विटर हैंडल पर प्रिंस सलमान को खून का सौदागर तक बनाया गया है। 
  जब दुनिया भर के मस्जिदों को की थी अरबों-खरबों की फंडिंग
वहीं दूसरी ओर हज यात्रा के मायनों को बखूबी जानने वाला सऊदी अरब अपने ऐतिहासिक मूल्यों का खास खयाल रखता है। इस्लाम के दोनों प्रमुख शहरों मक्का और मदीना के आकर्षण को बचाए रखने के लिए सऊदी अरब  हर प्रयास करता है। यही वजह है कि ईराम में 1979 में इस्लामिक क्रांति के दौरान धार्मिक मान्यताओं को बचाने के लिए सऊदी अरब में दुनियाभर के मस्जिदों अरबों-खरबों की फंडिंग की थी।

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  इस्लामिक देशों के नेतृत्वकर्ता की भूमिका में सऊउी अरब
दुनिया के किसी भी कोने में शिया सुन्नी में बहस छिड़ती है तो दुनिया भर के मुसमानों की टकटकी सऊदी अरब के अंतिम फैसले पर ही लगी होती है। यह कुव्वत सऊदी अरब को इस्लामिक देशों का नेतृत्वकर्ता होने का अहसास कराती है। अपने इस ओहदे को अरब किसी कीमत पर खोना नहीं चाहेगा। लीबिया के मौलवी हो या फिर यमन के खलीफा सऊदी अरब की कोशिश सभी को शांत करने की होगी। जिसके चलते अरब देशों में आंतरिक कलह बढ़ सकती है इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। 
  क्या कहते हैं आंकड़ें
इन सब से इतर आंकड़ों पर गौर करें तो हर साल तकरीबन 23 लाख यात्री हज करने जाते हैं। जिससे सऊदी अरब को अरबों-खरबों की कमाई होती है।वहीं दूसरी ओर यूएन की एक रिपोर्ट कहती है कि अरब देशों में दहशतगर्दों द्वारा अस्पतालों, बच्चों के स्कूलों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में हालातों को नियंत्रण में करना सऊदी अरब को अहम जिम्मेदारी हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इसके लिए सऊदी अरब क्या कदम उठाता है। 

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Web Title: So for this reason the voices in protest are rising against the holy pilgrimage of Muslims ( Hindi News From Newstimes)


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