मायावती और अखिलेश पर उपचुनाव से पहले संकट, सियासी घमासान तेज


NAZO ALI SHEIKH 13/07/2019 09:56:50
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Lucknow. लोकसभा चुनाव के बाद अब यूपी में विधानसभा की 12 सीटों पर उपचुनाव होना है। जिसको लेकर सभी राजनैतिक दलों ने कमर कस ली है। सियासी पारा भी चुनाव को देखते हुए सातवें आसमान पर पहुंच गया है। लेकिन उपचुनाव से ठीक पहले बसपा और सपा के शीर्ष नेता मायावती व अखिलेश पर संकट मंडराने लगा है। हालांकि, लोकसभा चुनाव के दौरान भी कुछ इसी तरह के संकट में दोनों ही दिग्गज नेता फंसते दिखाई दे रहे थे। दरअसल, सीबीआई भ्रष्टाचार मामले में जांच कर रही है। यह भ्रष्टाचार का मामला अखिलेश यादव और मायावती के शासनकाल के समय हुआ था। ऐसे में सबीआई दोनों ही राजनैतिक दिग्गजों पर शिकंजा कस सकती है। 

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बताते चलें कि प्रदेश में 1,100 करोड़ रुपये के चीनी मिल घोटाला मामले की जांच काफी समय से सीबीआई कर रही है। हालांकि, अभी तक महज जांच और छापेमारी का ही सिलसिला चल रहा है। हाल ही में  सीबीआई ने मायावती के शासनकाल में करीबी अधिकारी रहे नेतराम के आवास पर छापा मारा था। सरकारी संपत्तियों की बिक्री में नेतराम का नाम भी सामने आ गया है। वहीं, समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर खनन घोटाले का आरोप है। जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। खनन घोटाले का मामला प्रजापति सहित 6 नौकरशाहों से जुड़ा हुआ है।

खबरों के मुताबिक प्रजापति और तीन आईएएस अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी और तलाशी के बाद सीबीआई सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव से पूछताछ कर सकती है। चूंकि उस दौरान अखिलेश यादव की सरकार थी। 2012 से लेकर जुलाई, 2013 तक पूर्व में सीएम रहे अखिलेश के पास ही खनन मंत्रालय था। सीएम कार्यालय से उस दौरान कई खनन के पट्टे की फाइलों पर मंजूरी दी गई थी। जांच एजेंसी इस बात पर भी गौर करेगी कि सीएम कार्यालय से खनन पट्टे को लेकर जो मंजूरी दी गई थी, नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं। साथ ही एजेंसी सभी फाइलों की जांच भी कराएगी।

बताते चलें कि अब तक के जांच में यह सामने आया है कि पूर्व मंत्री प्रजापति ने अनिवार्य ई-टेंडर नियमों का पालन नहीं किया था। यह भी बात सामने आ रही है कि अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया। प्रजापति के निर्देश पर ही फाइलों पर हस्ताक्षर किए गए थे। फिलहाल अखिलेश यादव ने उस दौरान प्रजापति को बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, यह भी आरोप लग रहा कि सीएम कार्यलय ने नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज कर दिया था। सीबीआई अभी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

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वहीं, सीबीआई ने नेतराम पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। चीनी मिल घोटाला मामले में नेताराम से पूछताछ के बाद सच्चाई सामने आ सकती है। सीबीआई के द्वारा दर्ज मामले में वर्ष 2010-11 के दौरान चीनी मिलों को औने-पौने कीमतों पर बेचा गया था। उस समय बसपा सुप्रीमो वर्ष 2007 से 2012 तक सीएम थीं। नेतराम के साथ ही विनय प्रिय दुबे पर भी सीबीआई की तलवार लटकी है। दुबे मायावती के शासनकाल में करीबी अधिकारी माने जाते थे। 

Web Title: Mayawati and Akhilesh, before the bypoll ( Hindi News From Newstimes)


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