बच्चियों से दुष्कर्म के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, सीजेआई ने लिया स्वत: संज्ञान


DEEP KRISHAN SHUKLA 13/07/2019 10:26:30
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New Delhi. बच्चियों के बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट बेहद संजीदा है। लगातार बढ़ रही इन घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने इन इसे जनहित याचिका के रूप में इन मामलों का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। इसके बाद कोर्ट ऐसे निर्देश जारी कर सकती है जिससे इन दुष्कर्म के मामलों के खिलाफ राष्ट्रीय ​जवाबदेही तय हो सके। 

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बता दें कि बीते छह माह में देश भर में बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं ने 24 हजार का आंकड़ा पार कर लिया है। 
देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने लगातार बढ़ रही इन घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पर सुनवाई करने का निर्णय लिया। 
विभिन्न अखबारों और पोर्टलों पर आने वाली रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील किया गया। 
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिक अनिरूद्ध बोस इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। 

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कोर्ट ने मामले में सहयोग के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता वीवी गिरी को बतौरा अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया है। 
उनका काम होगा कि वह ऐसे दिशा निर्देश तैयार करने में मदद करें जिससे इन मामलों की रोकथाम में राज्यों को कार्रवाई व वीडियो रिकॉर्डिंग जारी करने में मदद मिल सके। 
कोर्ट ने कहा कि आवश्यकता पड़ती है तो इन मामलों की विशेष रूप से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाई जा सकती है। 

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बता दें कि बीती 1 जुलाई को चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को चालू वर्ष में 1 जनवरी से 30 जून तक बच्चियों के साथ दुष्कर्म के दर्ज होने वाले मुकदमों की रिपोर्ट देने को कहा था। 
उन्होने इन मामलों में जांच किस चरण तक पहुंची है इसका भी आंकड़ा मांगा था साथ ही यह सूचना भी मांगी थी कि ऐसे कितने मामले अदालतों में लंबित है। 

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  मामले में नहीं चलेगी ​की तीसरे पक्ष की दखलंदाजी
मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्री को इस मामले को जनहित याचिका के रूप में 'रिपोर्ट की गई बच्चों से दुष्कर्म की घटनाओं की संख्या में फिर से खतरनाक वृद्धि' के नाम से दर्ज करने के निर्देश दिए है। इस मामले की एक और खास बात यह होगी कि वरिष्ठ अधिवक्ता गिरी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के आलवा कोई तीसरा पक्ष इस मामले में दखल नहीं दे सकता है। 

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  मुकदमों का अंबार, निपटारा नगण्य
देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से जुटाए गए आंकड़ों में जो तस्वीर सामने आई है वह बेहद चौंकाने वाली है। देश भर में इस वर्ष 1 जनवरी से 30 जून तक छह माह की समयावधि में पुलिस ने बच्चियों से दुष्कर्म के कुल 24212 मुकदमे दर्ज किए हैं। जिनमें 11,981 मामलों की छानबीन चल रही है ज​बकि 12231 की चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। लेकिन ट्रायल और निपटारे के आंकड़े बेहद निराशाजनक है। अब तक मात्र 6,449 मामलों का ट्रायल शुरू हुआ है जबकि निपटारा होने वाले मामलों का आंकड़ा मात्र 911 ही है। कुल दर्ज मामलों से तुलना की जाए तो महज 4 फीसदी मामले ही निपट पाए हैं।

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  बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में यूपी सबसे अव्वल
राज्यवार इन मामलों के आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर है। यूपी पुलिस ने छह माह में 3457 मुकदमे पंजीकृत किए है जिनमें तकरीबन आधे मामलों की छानबीन चल रही है। 2389 मामलों के साथ मध्य प्रदेश इस सूची में दूसरे नम्बर पर है। इसके अलावा राजस्थान में 1285, कर्नाटक में 1133, गुजरात में 1124, तमिलनाडु में 1043, केरल में 1012, ओडिशा में 1005 मुकदमें बच्चियों के साथ दुष्कर्म के दर्ज हुए हैं।

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Web Title: CJI took serious note of rising cases of misbehavior against girls ( Hindi News From Newstimes)


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