नई पीढ़ी को भूजल संरक्षण के लिए जागरूक होना जरूरी


LEKHRAM MAURYA 17/07/2019 11:19:35
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लखनऊ। आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ एवं भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘भूजल सप्ताह-2019’ का आज आंचलिक विज्ञान नगरी के प्रेक्षागृह में भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केन्द्रीय भूजल बोर्ड के निदेशक, श्री वाई0बी0 कौशिक ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को भूजल के लिए विशेष रूप से जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए अधिक से अधिक अन्न को उपजाने के लिए जल का अधिकाधिक दोहन हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हमारे वातावरण में प्रदूषक लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने लोगों को भूजल संरक्षण के अभियान से स्वेच्छा से जुड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

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इस अवसर पर भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 के निदेशक, श्री वी0के0 उपाध्याय ने जलशक्ति अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार भूजल की समस्या से निपटने के लिए कई योजनाएँ चला रही है। अब हम सभी को एकजुट हो करके दूषित जल की समस्या से निपटते हुए भूजल स्तर को सुधारना होगा। बुन्देलखण्ड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ के लोगों ने  पोखरों व तालाबों को अतिक्रमण से बचाकर एवं वर्षाजल संचय कर जल संकट की समस्या को काफी हद तक हल कर लिया है। इसी तरह के कदम हम लोगों को भी उठाने होगें। छात्र-छात्राएं भूजल सप्ताह के कार्यक्रमों से सीखें और इसकी महत्ता दूसरों को भी बतायें।
डा0 राज मेहरोत्रा, परियोजना समायोजक, आंचलिक विज्ञान नगरी ने अतिथियों व विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए बच्चों को भूजल सप्ताह समारोह को मनाने के उद्देश्य से अवगत कराया। डा0 मेहरोत्रा ने भूगर्भ जल उपयोग एवं भविष्य के आकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारत भूजल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, उसमें भी कृषि में सबसे अधिक जल का उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि भूजल की 70 प्रतिशत रिचार्जिंग वर्षा जल से हो जाती है परन्तु शहरीकरण एवं आधुनिकीकरण ने अधिकांश जगहों पर कंकरीट के जंगल खड़े कर दिये हैं, यह चिन्ताजनक है। इस समस्या को सब लोगों को मिलकर सुलझाना पड़ेगा एवं शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। 
श्री आर0एस0 सिन्हा, सलाहकार, भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को बताया कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम से जुड़ें। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी परसनल वाटर मैपिंग कर एक दिन में उपयोग होने वाली जल की मात्रा का आंकलन करें एंव डेटा बनाए ताकि इस समस्या का आंकलन कर इसके निदान खोजे जा सकें। 
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वर्तमान में उपयोग होने वाले जल संचय तकनीकों से अवगत कराया गया, जिससे वह इन तकनीकों को समझकर अपने देश के लिए अधिक उन्नत एवं अधिक कुशल जल संचय तकनीक विकसित करने का प्रयास करें एवं इस तरह के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के लिए एक लिखित प्रश्नोŸारी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें लखनऊ, फतेहपुर एवं सीतापुर के विभिन्न 9 विद्यालयों के लगभग 830 विद्यार्थियांे ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस समारोह की कड़ी में 

लखनऊ। आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ एवं भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘भूजल सप्ताह-2019’ का आज आंचलिक विज्ञान नगरी के प्रेक्षागृह में भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केन्द्रीय भूजल बोर्ड के निदेशक, श्री वाई0बी0 कौशिक ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को भूजल के लिए विशेष रूप से जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए अधिक से अधिक अन्न को उपजाने के लिए जल का अधिकाधिक दोहन हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हमारे वातावरण में प्रदूषक लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने लोगों को भूजल संरक्षण के अभियान से स्वेच्छा से जुड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 के निदेशक, श्री वी0के0 उपाध्याय ने जलशक्ति अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार भूजल की समस्या से निपटने के लिए कई योजनाएँ चला रही है। अब हम सभी को एकजुट हो करके दूषित जल की समस्या से निपटते हुए भूजल स्तर को सुधारना होगा। बुन्देलखण्ड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ के लोगों ने  पोखरों व तालाबों को अतिक्रमण से बचाकर एवं वर्षाजल संचय कर जल संकट की समस्या को काफी हद तक हल कर लिया है। इसी तरह के कदम हम लोगों को भी उठाने होगें। छात्र-छात्राएं भूजल सप्ताह के कार्यक्रमों से सीखें और इसकी महत्ता दूसरों को भी बतायें।
डा0 राज मेहरोत्रा, परियोजना समायोजक, आंचलिक विज्ञान नगरी ने अतिथियों व विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए बच्चों को भूजल सप्ताह समारोह को मनाने के उद्देश्य से अवगत कराया। डा0 मेहरोत्रा ने भूगर्भ जल उपयोग एवं भविष्य के आकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारत भूजल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, उसमें भी कृषि में सबसे अधिक जल का उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि भूजल की 70 प्रतिशत रिचार्जिंग वर्षा जल से हो जाती है परन्तु शहरीकरण एवं आधुनिकीकरण ने अधिकांश जगहों पर कंकरीट के जंगल खड़े कर दिये हैं, यह चिन्ताजनक है। इस समस्या को सब लोगों को मिलकर सुलझाना पड़ेगा एवं शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। 
श्री आर0एस0 सिन्हा, सलाहकार, भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को बताया कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम से जुड़ें। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी परसनल वाटर मैपिंग कर एक दिन में उपयोग होने वाली जल की मात्रा का आंकलन करें एंव डेटा बनाए ताकि इस समस्या का आंकलन कर इसके निदान खोजे जा सकें। 
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वर्तमान में उपयोग होने वाले जल संचय तकनीकों से अवगत कराया गया, जिससे वह इन तकनीकों को समझकर अपने देश के लिए अधिक उन्नत एवं अधिक कुशल जल संचय तकनीक विकसित करने का प्रयास करें एवं इस तरह के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के लिए एक लिखित प्रश्नोŸारी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें लखनऊ, फतेहपुर एवं सीतापुर के विभिन्न 9 विद्यालयों के लगभग 830 विद्यार्थियांे ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस समारोह की कड़ी में 

 

Web Title: New generation must be aware of ground water conservation ( Hindi News From Newstimes)


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