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मंचीय कविता के आखिरी स्तम्भ थे नीरज : लक्ष्मी नारायण चौधरी


GAURAV SHUKLA 20/07/2019 10:14:13
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Lucknow. स्वर्गीय गोपालदास 'नीरज' कविता का एक युग थे l अपने जीवन के लगभग 75 साल उन्होनें मंचों पर काव्यपाठ करके गुज़ारे l मंचीय कविता के आखिरी स्तम्भ थे नीरज l यह विचार उत्तर प्रदेश के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने शुक्रवार को संगीत नाटक एकेडमी में व्यक्त किये l वो स्थानीय संगीत नाटक अकादमी के सभागार में स्वर्गीय गोपालदास 'नीरज' की प्रथम पुण्यतिथि पर, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम "नीरज स्मृति" में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे I लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि स्वर्गीय नीरज ने हिन्दी और उर्दू, दोनों ही भाषाओं के मंचों पर हर किसी के साथ प्यार और मोहब्बत साझा की l उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वो जितने नामचीन हिन्दी काव्य पाठ के मंचों पर थे उतनी ही शोहरत उन्हें उर्दू शायरी के मंचों पर भी हासिल थी l उन्होनें हिन्दी और और उर्दू भाषाओं की सामान रूप से सेवा की l उन्होनें कविता को नया आयाम दिया और दोनों ही भाषाओं को आम जन तक पहुंचाया l संस्कृति मंत्री ने कहा कि स्वर्गीय नीरज जी उन चंद कवियों में से थे, जिनकी जितनी मांग हिन्दुस्तान में रही उतनी ही विदेश में भी थी l उन्होनें नेपाल से काव्यपाठ की शुरुआत की और अमेरिका से लेकर आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के तमाम शहरों में आयोजित कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ कर ख्याति अर्जित की l

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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल प्रदेश के खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री अतुल गर्ग ने कहा कि स्वर्गीय गोपालदास 'नीरज' जी के गीतों में गंभीरता के साथ उसके बोलों को कर्णप्रिय बनाना ही उनकी काव्य कला थी l उन्होनें कहा कि सच तो यही है कि नीरज जी हमारे बीच से कभी भी जा नहीं सकते l गीत बनकर वो हमारे बीच में हमेशा गूंजते रहेंगे l अतुल गर्ग ने कहा कि कवि सम्मेलनों में नीरज जी कि मौजूदगी सम्मलेन की सफलता की गारंटी होती थी l उनके द्वारा रचित गीतों और ग़ज़लों की दीवानगी इतनी ज़्यादा थी कि लोग लम्बा सफर तय करके उनको सुनने पहुँचते थे l उनके विरह और प्रेम गीत मन को छूने वाले हैं l उन्होनें सरल भाषा में दिल की गहराइयों तक उतरने वाले गीतों की रचना की l

कई सालों तक महाकवि नीरज के साथ मंचों पर कविता पाठ करने वाले हिन्दुस्तान के वयोवृद्ध कवि डॉ० उदय प्रताप सिंह ने बताया कि महाकवि नीरज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे l उनकी ख्याति का ज़िक्र करते हुए डॉ० उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नीरज ने हिंदी कविता को भारत के अहिन्दी भाषी प्रदेशों में भी प्रचलित किया l उन्होंने बताया कि कुछ लोग कविता रचते हैं लेकिन नीरज जी कविता जीते थे l उनके रोम-रोम में काव्य व्याप्त था l उनकी कविता की विशेषता थी कि हिंदी कविता की विभिन्न विधाओं, जैसे गीत, छंद, दोहा, चौपाई, भजन आदि, में उनका शब्द प्रयोग अतुलनीय था l उनकी शब्द साधना गज़ब की थी l हर विधा की काव्य रचना में उनकी भाषा बदल जाती थी l सरल भाषा में लिखी नीरज की कविताओं में भावानुसार शब्दों का चयन उनके काव्य की विशेषता रही l

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जीवन से जुड़े गहन दर्शन को बहुत ही सरल भाषा में 'नीरज' जी ने अपनी कविताओं में प्रस्तुत किया l वो महान विचारक थे और उनके विचारों को आचार्य रजनीश (ओशो) ने अपने लेखन में संदर्भित किया है l महान क्रांतिकारी योगी और दार्शनिक महर्षि अरविन्द घोष के साहित्य की उन्हें बहुत अच्छी समझ थी l डॉ० उदय प्रताप ने बताया कि स्वर्गीय नीरज जी को खगोल विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र दोनों का अच्छा ज्ञान था l उन्होनें ने बताया कि "एक बार नीरज जी के साथ जयपुर में आयोजित कवि सम्मलेन में भाग लेकर लौट रहा था l मैंने प्रधानाचार्य का इंटरव्यू दिया था और उसमें चयन भी हो गया था l रास्ते में नीरज जी ने कुछ ज्योतिषीय गणना करने के बाद कहा - तुम 05 मई से पहले ज्वाइन नहीं कर पाओगे l मैंने कहा कि मैं ज्योतिष में यकीन नहीं करता l आप ज्योतिष छोड़िये और कविता करिये l मैं घर पहुंचा तो मुझे इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने की मार्कशीट नहीं मिली l मार्कशीट बनवाने में इतना वक़्त लगा कि नीरज जी की भविष्यवाणी सच हो गयी l"

डॉ० उदय प्रताप ने बताया फिल्मों में गीत लेखन करने में उन्हें बहुत सम्मान मिला l फिल्मी गीत लिखने का सिलसिला कुछ वर्षों तक ही चला l नीरज जी एक ऐसे फिल्मी गीतकार थे जिनकी कविताओं को ध्यान में रखकर फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखी गयी l अमूमन गीतकारों को पहले ही फिल्मी धुन और दृश्य बताये जाते हैं l फिर उन्हें दृश्य के अनुसार गीत लिखने पड़ते हैं l फक्कड़ मिज़ाज़ नीरज को मायानगरी रास नहीं आयी l इस नगरी को उन्होनें अलविदा कहा और फिर से मंचों पर लौट आए l उन्होनें बताया कि अपनी उम्र के अंतिम दिनों में मेरी उनसे भेंट हुई l उन्होनें कहा कि अब गला भी खराब है, लीवर भी खराब है l हमारी हर चीज खराब है l हमारी उम्र का 94वां साल शायद भारी है l उम्र के अंतिम पड़ाव पर शायद उनमें जिजीविशा की कमी आ गयी थी l

हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक एवं प्रबंध न्यास्री श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने ट्रस्ट के संरक्षक तथा प्रसिद्द भजन गायक पद्मश्री अनूप जलोटा जी की माता जी श्रीमती कमला जलोटा जी का 85 वर्ष की उम्र में आज सुबह मुंबई में आकस्मिक निधन हो जाने पर शोक प्रकट किया तथा सभागार में उपस्थित सभी लोगों ने 1 मिनट का मौन धारण कर जलोटा की माता को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की I मालूम हो कि आज "नीरज स्मृति" कार्यक्रम में अनूप जलोटा जी को शामिल होना था I 

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स्वागत भाषण में हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने कहा कि स्वर्गीय नीरज जी ट्रस्ट की साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों से अपने जीवन काल के अंतिम क्षण तक जुड़े रहे l संरक्षक की हैसियत से उनका आशीर्वाद हमेशा हम सबको प्राप्त होता रहा l उन्होनें ट्रस्ट के द्वारा किये जा रहे कार्यों की हमेशा प्रशंसा की l हमारे ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि अब हर साल 19 जुलाई को नीरज जी की याद में "नीरज स्मृति" कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा l "नीरज स्मृति" कार्यक्रम में साहित्यकार तथा हिंदी संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ० मनीष शुक्ला ने नीरज जी द्वारा रचित कविताओं का पाठ किया l गायक प्रदीप अली ने नीरज जी द्वारा रचित फिल्मी गीतों का गायन किया l अंत में श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया l 'नीरज' जी के सुपुत्र श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' ने आयोजन में उपस्थित होकर "नीरज स्मृति" आयोजन की महत्ता को बल प्रदान किया l

Web Title: manchiy kavita ke akhiri stambh the neeraj ( Hindi News From Newstimes)


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