आपसी सहमति से संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं: सुप्रीम कोर्ट


NAZO ALI SHEIKH 22/08/2019 14:39:04
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New Delhi. महिला और पुरुषों के बीच यदि आपसी सहमति से शारीरिक संबध बनते हैं और पुरुष शादी नहीं करे तो यह रेप नहीं माना जाएगा। कोई भी महिला शादी का झूठा वादा करके रेप किया गया ऐसा कह कर आरोप नहीं लगा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। 

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बताते चलें कि सेल्स टैक्स की सहायक आयुक्त द्वारा सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट के खिलाफ यह कहकर केस दर्ज कराया था कि दोनों ही एक दूसरे के साथ संबंध में थे। दानों का एक दूसरे के घर पर भी आना जाना रहता था। कई बार तो एक साथ रात में रुके भी थे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि इससे पता चलता है, शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने थे। 

शिकायतकर्ता का यह आरोप था कि वह सीआरपीएफ अफसर को 1998 से ही जानती हैं। अफसर ने शादी करने का झांसा दिया और 2008 में शारीरिक संबंध बनाया था। इसके बाद आठ सालों तक वह संबंध बनाता रहा। जब शादी की बात की तो अफसर ने जाति को लेकर शादी नहीं करने को कहा, लेकिन इसके बाद भी संबंध बनाता रहा। 

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सीआरपीएफ अफसर ने जब अन्य महिला से शादी करने की बात बताई तो रेप का एफआईआर दर्ज करा दिया गया। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि झूठी शादी का वादा तत्काल प्रासंगिकता का होना चाहिए या यौन क्रिया में संलग्न होना महिला का निर्णय है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला से जो वादा किया गया उसे यह जानकारी थी कि उसे तोड़ा भी जा सकता है। 

Web Title: Relationship with mutual consent is not misdeed: Supreme Court ( Hindi News From Newstimes)


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