राष्ट्रीय स्वंय संघ के नेता कृष्ण गोपाल ने कहा दलित शब्द अंग्रेजों की है देन


RAGHVENDRA CHAURASIA 27/08/2019 17:14:51
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New Delhi.राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नेता व संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल ने एक कार्यक्रम के दौरान विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि भारत में छुआछूत की शुरुआत इस्लाम के आगमन से हुई है। इसके आगे उन्होंने यह भी कहा ​देश को दलित शब्द के बारे में नहीं पता था यह शब्द अंग्रेजों की देन है।

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अंग्रेजों का षड़यंत्र था बांटो और राज करो

आरएसएस के नेता व महासचिव कृष्ण गोपाल राजनीतिक उत्तरायण और भारत का दलित विमर्श पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम में कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत में छुआछूत की शुरुआत इस्लाम के आगमन के बाद हुई। इसकेे आगे उन्होंने कहा कि देश को दलित शब्द के बारे में नहीं पता था क्योंकि यह अंग्रेजों का षडयंत्र था जो बांटो और राज करो के लिए लाया गया था। गोपाल ने कहा कि आरएसएस एक जाति विहीन समाज का समर्थन करता है। गोपाल ने कहा कि छुआछूत का पहला उदाहरण इस्लाम के आगमन के बाद देखने को मिला। यह राजा दहीर (सिंध के आखिरी हिंदू राजा) के घर में तब देखने को मिला जब उनकी रानियां जौहर (स्वेच्छा से खुद को आग के हवाले करना) करने के लिए जा रही थीं। उन्होंने मलेच्छ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि उन्हें जल्द जौहर करना चाहिए वरना ये मलेच्छ उन्हें छू लेंगे और वह अपवित्र हो जाएंगी। यह भारतीय पाठ में छुआछूत का पहला उदाहरण था।

मौर्य आज पिछड़ी जाति की है मगर पहले ऊंची जाति थी

कृष्ण गोपाल ने बताया कि कैसे जिन जातियों की पहले इज्जत की जाती थी वह अब पिछड़ी हो गई हैं। गोपाल ने कहा,आज मौर्य एक पिछड़ी जाति है। पाल बंगाल के राजा हुआ करते थे लेकिन आज वह पिछड़े हो गए हैं। आज बुद्ध की जाति शाक्य अन्य पिछड़ा गर्व की श्रेणी में आ गई है। हमारे समाज में दलित शब्द की मौजूदगी नहीं थी यह अंग्रेजों की साजिशें थी जो हमें बांटकर राज करना चाहते थे। यहां तक कि संविधान सभा ने भी दलि​त की जगह अनुसूचित जाति शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। गोपाल ने कहा कि भारत में अस्पृश्यता का पहला उदाहरण तब आया जब लोग का मांस खाते थे,वे अनटचबेल घोषित हुए। ये स्वंय आंबेडकर जी ने भी लिखा है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे यह समाज में प्रसारित होता गया और समाज के एक बड़े हिस्से को अस्पृश्य करार दिया गया। लंबे समय तक उनका उत्पीड़न और अपमान किया गया। पिछले लंबे समय तक उनका उत्पीड़न और अपमान किया गया। गोपाल ने कहा कि रामायण लिखने वाले महर्षि वाल्मीकि दलित नहीं थे,बल्कि शुद्र थे और और उनका बहुत सम्मान किया जाता था।

 

Web Title: Krishna Gopal, the leader of the National Self-Association, said that the word Dalit is from the British ( Hindi News From Newstimes)


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