सरकार की नाक के नीचे उड़ रहीं नियम कानून की धज्जियां, कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति


LEKHRAM MAURYA 10/09/2019 17:19:45
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LUCKNOW. राजधानी में मकड़जाल की तरह फैले निजी विद्यालय किस तरह नियम कानून ताख पर रखकर जनता का शोषण कर रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। फिर भी ऐसे शोषित अभिभावकों द्वारा स्कूलों के खिलाफ आवाज न उठाना कहीं न कहीं उनकी मजबूरी है, क्योंकि सरकारी स्कूलों की पढ़ाई की स्थिति जग जाहिर है। पिछले सप्ताह जिलाधिकारी लखनऊ ने बिना मान्यता और कक्षा 5 व 8 तक की मान्यता लेकर इंटर तक विद्यालय चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है, परन्तु अभी तक इस अभियान का कहीं पर कोई असर नहीं दिखाई पड़ रहा है।

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ऐसे विद्यालयों की आपस में इतनी साठगांठ है कि कोई किसी की शिकायत नहीं करता। इसके साथ ही बिना मान्यता वाले विद्यालय संचालक दूसरे मान्यता प्राप्त विद्यालयों से अपने बच्चों के फार्म भरवाते हैं। इन विद्यालयों की जालसाजी का आलम यह है कि जिन छात्रों के पंजीकरण और फार्म दूसरे विद्यालयों से भरवाते हैं। उनको बता दिया जाता है कि किसी अधिकारी द्वारा जांच के समय उन ​बच्चों के अलावा अन्य छात्रों को भी बिना यूनीफार्म के बुलाया जाएगा, जिससे यह न पता चल सके कि यह बच्चे किसी अन्य विद्यालय में पढ़ते हैं।

उस दिन या दो-तीन दिन के लिए पढ़ने वाले विद्यालय के बजाय पंजीकरण/ फार्म भरवाने वाले विद्यालय में भेज दिए जाते हैं। उसके बाद फिर अपने विद्यालय आने लगते हैं। देखने में बाहर से चमक दमक वाले इन विद्यालयों में अभिभावकों को विद्यालय से ही पुस्तकें, यूनीफार्म, टाई बेल्ट जूते, मोजे भी दिए जा रहे हैं। जिनका मनमाना मूल्य वसूला जाता है। अनेक स्कूल संचालक बच्चों को लाने  ले जाने के लिए निजी वैनों का प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही जब ​ग​र्मी की छुट्टियों में विद्यालय बंद रहता है तब भी वैन का किराया अभिभावकों से वसूलते हैं। जिसका कई बार अभिभावक विरोध कर चुके हैं। फिर भी स्कूल संचालकों द्वारा इस तरह की वसूली की जा रही है।

इसके बावजूद उनकी अपनी वैन नहीं होती है। कई विद्यालयों में एक दो टैक्सी वैन या मैजिक के अलावा दर्जनों निजी गाड़ियां किराए पर लगा रखी हैं। कई विद्यालय ऐसे भी हैं, जिनकी बसों, मैजिकों, वैनों में नम्बर तक नहीं पड़े हैं। फिर भी किसी अधिकारी ने आज तक इन पर ध्यान नहीं दिया। इस मामले में पुलिस और आरटीओ से शिकायत करने के बाद भी किसी विभाग ने  इसका संज्ञान नहीं लिया।

राजधानी के विकास खण्ड माल के सहयोगी शिक्षण संस्थान मसीढ़ा हमीर की मान्यता हाई स्कूल तक है और कक्षाएं इंटर तक चला रहा है। पहले यह लखनऊ के किसी न किसी विद्यालय से फार्म भराता था लेकिन दो साल से यह हरदोई जनपद के एक विद्यालय से भराता है। खास बात यह है इस विद्यालय के प्रबन्धक ने दो साल पहले कक्षा 9 में पंजीकरण लखनऊ जनपद के एक विद्यालय में कराया और कक्षा 10 के फार्म हरदोई जनपद से भरा दिए।

इसके बाद इसने दूसरे विद्यालयों से सट्टा कर लिया। इस विद्यालय में दो बसें, दो मैजिक हैं इस विद्यालय की दो बसे और दो मैजिक विना नम्बर के डेढ़ साल से चल रही हैं। इसी तरह ब्राइट कान्वेन्ट हाईस्कूल की मान्यता कक्षा 8 तक है और यह हाई स्कूल का बोर्ड लगाकर कक्षाएं भी संचालित कर रहे हैं। यह अपने विद्यालय में किताबें, यूनीफार्म भी बेचते हैं। इसी तरह विवेकानन्द माडर्न एकादमी बख्शी का तालाब में आधा दर्जन से अधिक निजी वैनों से बच्चों को ढोने का काम किया जा रहा है। रहीमाबाद में कुंवर आशिफ अली इंटर कालेज में भी पुस्तकें विद्यालय में बेंची जाती हैं यूनीफार्म भी स्कूल से दी जाती है। यहां भी टीसी, अंकपत्र, चरित्र प्रमाण पत्र को देते समय मनमानी वसूली की जाती है।

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राजधानी में ही ऐसे करीब 2000 से अधिक विद्यालय हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई करने की जगह किसी न किसी प्रकार से ऐसे विद्यालयों को संंरक्षण प्रदान कर दिया जाता है। इसके अलावा जिलाधिकारी लखनऊ कौशल राज शर्मा ने सभी विद्यालयों को आदेश दिया था कि वे अपने विद्यालय के बाहर बोर्ड पर विद्यालय की मान्यता किस कक्षा तक है और किस वर्ष में किस कक्षा की मान्यता दी गई, उसका कोड भी अंकित किया जाए। जनता को अंधेरे में रखकर मनमाने तरीके से लूटपाट का अड्डा बना चुके बिना मान्यता के स्कूलों ने जिलाधिकारी के इस आदेश का पालन अभी तक नहीं किया है।

इसके अलावा इस तरह के अधिकांश विद्यालयों ने अपने स्कूलोंं के बोर्डों पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लिखा रखा है। उसमें इसका उल्लेख कहीं नहीं है कि विद्यालय की मान्यता किस कक्षा तक है। जिससे आम आदमी को यह नहीं पता चल पाता कि विद्यालय कहां तक मान्यता प्राप्त है। जिससे वह इनके झांसे में आ जाता है। और उसके बाद एक बार इन धोखेबाजों के चक्कर में जो फॅंस गया वह आसानी से निकल नहीं सकता, क्योंकि यह उसको कभी समय से टीसी नहीं देते। कई बार स्कूलों में नामांकन का समय निकल जाने के बाद टीसी दी जाती है जिससे उसका साल बर्बाद हो जाता है। ऐसा ही एक मामला कुवंर आशिफ अली इंटर कालेज रहीमाबाद का प्रकाश में आया है जहां टीसी और चरित्र प्रमाण पत्र के नाम पर 1000 रू0 वसूले गए। 

 

 

Web Title: Rules of the law flying under the nose of the government, in the name of action ( Hindi News From Newstimes)


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